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नयी परंपरा : आस्था के संगम में प्रधानमंत्री मोदी का गढ़वाली भाषा में सम्बोधन !

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केदारनाथ पुननिर्माण: शिलापट्टो के नामो पर सियासत भी जनता को अखरती रही,क्या सफल रही है मोदी की केदारयात्रा ?

उदय दिनमान डेस्कः 2013 की आपदा के बाद से केदारनाथ पुननिर्माण को लेकर सियासत की सुस्ती जनता की उम्मीदो को पंख नही चड़ा पाई है। देश दुनिया की आस्था के केन्द्र केदारनाथ को लेकर जिस मजबूत इच्छाशक्ति की दरकार जनता को सरकारो से थी वह राजनीतिक प्रतिद्वंदता में समाप्त होती दिखाई दे रही है। देश की दोनो बड़ी पार्टीयाँ बीजेपी और काग्रेस इस पात में खड़ी है। पीएम मोदी के हालिया केदारनाथ दौरे को लेकर जिस मिशन ” केदारनाथ कायाकल्प ” को प्रचारित किया जा रहा है, उसका अधिकांश खाका राज्य की पूर्ववर्ती हरीश रावत खीच चुकी थी और बकायदा काम भी शुरू किया जा चुका था, ऐसे में पीएम मोदी की नयी योजना बीजेपी की कम काग्रेस प्रायोजित ज्यादा नजर आती है।

 

केदारनाथ मे हुई जनसभा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि केदारनाथ में पुनर्निर्माण के बाद यात्रियों की सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया जाएगा। यहां 24 घंटे बिजली रहेगी और टेलीफोन और इंटरनेट सुविधा का भी पूरा ख्याल रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि केदारपुरी को पूरी तरह से आधुनिक बनाया जाएगा और उन्हें विश्वास है कि बाबा केदारनाथ के आर्शीवाद से आजादी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर 2022 तक उनका यह संकल्प पूरा हो जाएगा।

 

अब पुरोहितों को जो मकान मिलेंगे वो थ्री इन वन होंगे. बिजली, पानी और स्वच्छता का पूरा प्रबंध होगा. पूरी सड़कों को चौड़ा किया जाएगा. पोस्ट ऑफिस, बैंक, कंप्यूटर की व्यवस्था समेत सारा प्रबंध होगा. केदारनाथ के पूरे रास्ते भक्तिमय माहौल देने की कोशिश होगी. यहां पांच परियोजनाओं का प्रारंभ हो रहा है. मंदाकिनी के घाट का भी निर्माण कार्य होगा. यहां लोगों के बैठने का इंतजाम होगा. यहां जो भी काम होगा उसमें पर्यावरण के नियमों का पालन किया जाएगा. उसमें आधुनिकता होगी, लेकिन उसकी आत्मा वही होगी जो केदार ने सदियों से अपने भीतर समाहित करके रखा है।

 

मोदी ने केदारनाथ को लेकर अपने पुराने रिशते को लेकर जिस प्रकार से भावुक बयान देकर संवेदना बटोरने की कोशिश भी करी लेकिन वह भावुकता उनकी घोषणाओ से मेल नही खाती दिखी। हालाकि काग्रेस की योजनाओ को अपना बताकर उदघाटन कर वो सियासती चाल चलने में सफल जरूर साबित हो गये। लेकिन केदारघाटी की असल उम्मीदो को पंख नही लगा पाऐ।

 

केदारपुरी को फिर से भव्य और सुरक्षित बनाने के लिऐ सबसे अहम केदारनाथ तक सड़क की बहुचर्चित योजना पर कोई घोषणा नही हुई। गौरीकुण्ड से केदारनाथ तक रोप वे योजना तो उनके मिशन से पहले ही नदारद है। जिस कायाकल्प योजना को अपनी योजना बताकर मोदी जनता को लुभाना चाहते है उसका भी अधिकांश हिस्सा राज्य की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पूर्ण कर चुकी है अथवा उस पर इस समय निर्माण हो रहा है। फिर ऐसी कौन सी योजना है जिसका विजन लेकर मोदी बड़ी बड़ी बाते कह कर चले गये है।

 

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर अपनी केदारनाथ यात्रा के दौरान परंपराओं का अनादर करने तथा 2013 की बाढ़ के बाद मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य के बारे में लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। पार्टी ने दावा किया कि उनकी यात्रा की योजना गुजरात चुनाव को ध्यान में रखकर बनाई गई थी और यह उनके अभिमान को परलक्षित करता है।

 

प्रधानमंत्री पर राज्य के लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि जब वह हादसा हुआ था, केंद्र की तत्कालीन संप्रग सरकार ने पुनर्वास कार्य के लिए एक समिति गठित की थी और 8,000 करोड़ रुपए राहत के लिए मंजूर किए थे।उसी समय 2200 करोड़ रुपए जारी कर दिए गए थे और पिछले तीन साल में मोदी सरकार द्वारा एक पैसा भी नहीं जारी किया गया।

 

मोदी की हालिया यात्रा को लेकर केदारघाटी में जनता की कई चर्चाऐ बहस का हिस्सा बन चुकी है। घाटी का एक बड़ा हिस्सा मानता है कि मोदी जी केदारनाथ तक सड़क पहुचाकर घाटी को सबसे बड़ी सौगात दे सकते थे जिसका उन्होने जिक्र तक नही किया। जनता ये भी कहती है कि सिचाई विभाग की उन योजनाओ के उदघाटन के लिऐ देश के प्रधानमंत्री को आना पड़ा जबकि वो राज्य सरकार की योजनाऐ थी। केन्द्र से सीधे कोई विशेष योजना केदारनाथ के लिऐ होती तो उनका आना सार्थक कहलाता।

 

जनपक्ष कहता है तीर्थ धामो को सियासत भाषणो से दूर रखा जाना चाहिऐ था लेकिन मोदी जी यहा भी अव्वल निकले। केदारपुरी में बकायदा जनसभा कर जनता को पहली बार सम्बोधित कर वो नयी परंपरा सृजित कर गये है जो तीर्थ धामो की मर्यादा के विपरीत है। शिलापट्टो के नामो पर सियासत भी जनता को अखरती रही।

 

केदारनाथ के विकास कार्यो पर केदारनाथ के विधायक का नाम शिलापट्टो से गायब कर भाजपा की नैतिकवादी छवि की पोल खुल गयी है। अपने ही सासंद बीसी खण्डूड़ी का नाम भी इन उदघाटन शिलापट्टो से दूर रखा गया है। सही अर्थो में माने तो जनता की नजर में मोदी की केदार यात्रा मात्र फ्लाप शो ही नजर आई है।

 

गढ़वाली भाषा में मोदी जी के सम्बोधन पर जनता चुटकी ले रही है। जनता का कहती है विकास के बजाय मोदी सिर्फ जनता को अपनी भाषा से लुभाना भर चाहते है जबकि आज उनकी डबल इंजन की सरकार होने पर भी गढ़वाली कुमाऊँनी को संविधान की आठवी अनुसूचि में सामिल होने को लेकर कोई मजबूत प्रयास नही कर पायी है। वो इतने ही लोकभाषा प्रेमी थे तो मान्यता दिलवाकर राज्य की जनता का दिल जीत सकते थे।

 

हर बार केदारघाटी की जनता ठगी जा रही है कभी कोई गीत गवाकर भरमाने का प्रयास करता है तो कभी कोई केदारघाटी का बेटा बताकर संवेदनाऐ बटोरना चाहता है।मोदी जी बाबा केदार हम सबके है, बाबा का दरबार देश दुनिया के लिऐ आस्था का संगम है, आप बेहतर करेगे तो न केवल आज बल्कि युगो युगो तक जनता आपको याद करती रहेगी।

दीपक बेंजवाल दस्तक, केदारघाटी

की फेसबुक वाल से साभार

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