udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news नंदाकिनी नदी में मिली दुर्लभ मछली ! सोशल मीडिया पर फोटो वायरल 

नंदाकिनी नदी में मिली दुर्लभ मछली ! सोशल मीडिया पर फोटो वायरल 

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उदय दिनमान डेस्कः नंदाकिनी नदी में मिली दुर्लभ मछली ! सोशल मीडिया पर फोटो वायरल । मछली की जिस फोटों के लिए यह कहा जा रहा है कि यह नंदप्रयाग में नंदाकिनी नदी में मिली है उसका आकार भैस के मुह जैसा है। अगर आपको भी ऐसी मछली दिखे तो आपका उत्सुक होना स्वाभविक है। यह फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो इसे साभार लेकर यहां दिया गया। सत्य क्या है पता नहीं चल पाया।

 

वैसे तो मछलियों की अनेक प्रजातियां हैं और मछलियों के मानव आकृति और अन्य प्राणियों की आकृति के मिलने की खबरे आमतौर पर सोशल मीडिया के समय में सामान्य हो गयी है। इससे पूर्व भी ऐसी कई खबरे आ चुकी हैं और ऐसी खबरों का जल्छ वायरल होना भी स्वाभाविक है। इस समय मामला उत्तराखंड के चमोली जनपद स्थित नंदप्रयाग का बताया जा रहा है तो यह अपने आप में एक अनोखी घटना है।

 

सोशल मीडिया पर जिस तरह से यह बताया जा रहा है कि यह मछली नंदप्रयाग में नंदाकिनी नदी में मिली तो उससे कौतुहल के साथ-साथ यह पर्यावरण के लिए एक संकेत है कि अगर उस छोटी नदी में यह प्राणी मिल सकता है तो यहां अन्य संभावनाएं ीाी है। फिलहाल सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के अनुसार यह मछली प्रातः नदी में मछली मारने वालों के जाल में फसी। पहले तो वह घबरा गए, लेकिन बाद में गौर से देखने पर उन्हें यह मछली ही लगी और उसका मुह भैस के समान था।

 

इसके बाद बाजार कयासों और सोशल मीडिया पर यह फोटोशाप का कमान आदि रयूमरों से भरा रहा। फिलहाल अगर यह सत्य है तो यह दुलर््भ मछली है और इसके साथ इस नदी में अन्य दुर्लभ मछलियां ीाी हो सकती है।अगर यह घटना सत्य है तो वन विभाग और मत्स्य विभाग को इस बारे में तथ्यात्क जांच के बाद इसके संरक्षण की दिशा में कदम उठाने चाहिए ताकी इस दुर्लभ जीव के संरक्षण की दिशा में कार्य हो सके।

 

आपको बता दें कि नंदाकिनी नदी गंगा नदी की पांच आरंभिक सहायक नदियों में से एक है। यह नदी तथा अलकनंदा नदियों के संगम पर नन्द प्रयाग स्थित है। यह सागर तल से २८०५ फ़ीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां पर गोपाल जी का मंदिर दर्शनीय है। नंदप्रयाग का मूल नाम कंदासु था जो वास्तव में अब भी राजस्व रिकार्ड में यही है। ऐसा कहा जाता है कि स्कंद पुराण में नंगप्रयाग को कण्व आश्रम कहा गया है जहां दुष्यंत एवं शकुंतला की कहानी गढ़ी गयी। स्पष्ट रूप से इसका नाम इसलिये बदल गया क्योंकि यहां नंद बाबा ने वर्षों तक तप किया था।

 

आप जानते है कि इस धरती पर जल की मात्रा अधिक होने के कारण यहां कई किस्म के जलजीव है। इनमें मछली भी है। मछली शल्कों वाला एक जलचर है जो कि कम से कम एक जोडा़ पंखों से युक्त होती है। मछलियाँ मीठे पानी के स्त्रोतों और समुद्र में बहुतायत में पाई जाती हैं। समुद्र तट के आसपास के इलाकों में मछलियाँ खाने और पोषण का एक प्रमुख स्रोत हैं। कई सभ्यताओं के साहित्य, इतिहास एवं उनकी संस्कृति में मछलियों का विशेष स्थान है।

 

इस दुनिया में मछलियों की कम से कम 28,500 प्रजातियां पाई जाती हैं जिन्हें अलग अलग स्थानों पर कोई 2,18,000 भिन्न नामों से जाना जाता है। इसकी परिभाषा कई मछलियों को अन्य जलीय प्रणी से अलग करती है, यथा ह्वेल एक मछली नहीं है। परिभाषा के मुताबिक़, मछली एक ऐसी जलीय प्राणी है जिसकी रीढ़ की हड्डी होती है (कशेरुकी जन्तु), तथा आजीवन गलफड़े (गिल्स) से युक्त होती हैं तथा अगर कोई डालीनुमा अंग होते हैं (लिंब) तो वे फ़िन के रूप में होते हैं।

 

कुछ मछलियाँ न केवल विशालकाय हैं, बल्कि इतनी खतरनाक है कि पूरे इंसान को निगल भी सकती हैं।इसके साथ ही कई प्रजातियां भ है। चलिए जानते ळैं इनके बारे में-

किलर कैटफिश
यह हिमालय की तलहटी में मिलने वाली एक विशाल और नरभक्षी कैटफिश प्रजाति है।

डीमन फिश –
जैसा कि इसका नाम है, यह दैत्याकार मछली है। यह दुनिया की सबसे खतरनाक मछलियों में से एक है। यह बड़े से बड़े जीवों को भी निगल जाती है। डीमन फिश अफ्रीका की कांगो नदी में पाई जाती है।

डेथ रे –
थाइलैंड की मीकांग नदी में जेरेमी ने दुनिया की सबसे बड़ी मछलियों में से एक डेथ रे को खोज निकाला। इसका वजन लगभग 7 सौ पाउंड है। इसके शरीर पर एक जहरीली और कांटेदार पूंछ होती है, जिसके प्रहार से इंसान की जान भी जा सकती है।

किलर स्नेकहेड –
मछली से ज्यादा गैंगस्टर लगने वाली यह मछली हवा में सांस लेती है और जमीन पर भी रेंग लेती है। अपनी ही प्रजाति के जीवों को यह शौक से खाती है। यह एशिया में मुख्य रूप से चीन और दक्षिण कोरिया में पाई जाती है।

कांगो किलर –
अफ्रीका की कांगो नदी में पाई जाने वाली कांगो किलर के खतरनाक होने का अंदाजा इस बात से लगा सकते है कि अफ्रीका में इसके बारे में एक लोककथा है, जिसमें कहा गया है कि यह मछली एक आत्मा के रूप में मछुआरों को ललचा कर उन्हें मौत की तरफ ले जाती है।

अलास्कन हॉरर –
अलास्का की बर्फीली झील में मिलती है महाकाय अलास्कन हॉरर। इसके बारे में प्रचलित लोककथाओं में इसे आदमखोर माना जाता है।

रिट वैली किलर –
अफ्रीका की रिट वैली में एक विशालकाय जीव रहता है -एम्पुटा या नाइल पर्च। यह अफ्रीका के ताजे पानी की सबसे बड़ी मछली है।

पिरान्हा –
वर्ष 1976 में यात्रियों से भरी बस अमेरिका के अमेजॉन नदी में गिर गई और कई लोगों की जान चली गई। जब शवों को बाहर निकाला गया, तो उनमें से कुछ को पिरान्हा मछलियों ने इतनी बुरी तरह खा लिया था कि उनकी पहचान उनके कपड़ों से हुई।

एलिगेटर गार –
यह सादे पानी की ऐसी मछली है, जो इंसानों पर आक्रामक हमले करती है। यह शार्क की तरह खतरनाक और मगरमच्छ की तरह विशाल है।

यूरोपिययन मैनईटर –
यह यूरोप के ताजे पानी वाली नदियों में अपनी थूथन उठाए घूमती रहती है। आक्रामक वैल्स कैटफिश इंसानों को भी अपना शिकार बना सकती है।

अमेजॉन असासिंस –
अमेजन की गहराइयों में रहने वाली असासिंस शिकार को अपनी जीभ से कुचलती है, जो हड्डी से बनी होती है।

अमेजन लैश ईटर्स –
यह अफ्रीकन मछली इंसान को निगल सकती है। यह जब हमला करती है, तो शरीर पर छुरा घोंपने जैसा निशान बन जाता है।

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