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 नए साल में नई नौकरियां लाने पर होगा जोर

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नई दिल्ली। नए साल में नीति आयोग के एजेंडा में नौकरियां पैदा करना और कृषि क्षेत्र को रफ्तार देना सबसे ऊपर रहेगा। 2022 तक नया भारत बनाने के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सपने को आकार देने में नीति आयोग की अहम भूमिका रहेगी।

कृषि, कुपोषण, उच्च शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र आयोग की प्राथमिकता में रहेंगे। आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार का कहना है कि विभिन्न पक्षों से विमर्श हो चुका है। नया भारत बनाने को लेकर जल्द ही डॉक्यूमेंट को अंतिम रूप दिया जाएगा। राजीव कुमार ने कहा, ‘अगले वर्ष हमारा जोर कृषि क्षेत्र में बदलाव, कुपोषण, उच्च शिक्षा और रोजगार सृजन पर होगा।

हम 2022 तक नया भारत बनाने के प्रधानमंत्री के आह्वान को आकार देने की दिशा में काम कर रहे हैं। जल्द ही इस पर डॉक्यूमेंट को अंतिम रूप देंगे। इसके बाद आयोग 15 साल के डॉक्यूमेंट पर काम शुरू करेगा।’ आयोग ने हाल ही में तीन साल का एक्शन एजेंडा, सात साल का स्टेटजी पेपर और 15 साल का डॉक्यूमेंट लाने की बात कही थी।

कुमार ने कहा कि आयोग सहयोगी और प्रतिस्पर्धी संघवाद की दोहरी नीति पर चलता रहेगा। इस संदर्भ में उन्होंने 11 राज्यों का दौरा किया है और अगले साल कई अन्य राज्यों का दौरा करेंगे। इनके पीछे उद्देश्य राज्यों को यह भरोसा दिलाना है कि केंद्र में नीति आयोग उनके लिए ही काम कर रहा है। साथ मिलकर ही राज्य केंद्रित विकास योजनाएं तैयार की जा सकती हैं।

अर्थव्यवस्था को लेकर आयोग के उपाध्यक्ष की राय है कि निजी पूंजी व्यय बढ़ रहा है। जल्द ही देश में तेज विकास और आकर्षक नौकरियां देखने को मिलेंगी। अगले साल इस समय तक यानी वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.5 फीसद होगी। दो साल बाद इसका स्तर आठ फीसद के ऊपर होगा।

उन्होंने अगले पांच साल में दोहरे अंक में विकास दर हासिल करने की बात कही। असंगठित क्षेत्रों का संगठित क्षेत्र के दायरे में आना, कारोबारी सुगमता और निवेश नियमों का सरलीकरण इस विकास दर के वाहक बनेंगे।

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