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आधुनिक तकनीक और मेहनत से गन्ने की फसल लाई खुशहाली

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उधमसिंह नगर। गन्ने की खेती में किसान को समस्या बहुत होती हैं। उनमे भी कीड़ों का प्रकोप प्रदेश के गन्ना किसानों को बेहद मुसीबत दे रहा हैं। बुवाई के बाद पौधे निकलते ही उनको खाना शुरू करने वाले टॉप बोरर और अर्ली शूट बोरर कीड़ों की वजह से किसान काफी नुक्सान भर रहा हैं।

 

गन्ने की गुणवत्ता कम होने के कारण चीनी मिलों में कम दाम मिलना भी और एक समस्या हो चुका है। मगर कुछ प्रयोगधर्मी किसान आधुनिक तकनीक और अच्छे नस्ल की बीज इस्तेमाल करके इन दिक्कतों से बाहर आकर अन्य किसानों के प्रेरणा के स्रोत के रूप में खड़े हो रहे हैं। उनमे से एक हैं सहदौरा के धोलावन फार्म के सुरेश प्रताप चंद। कीट नियंत्रण के लिए कोराजन कीटनाशक और अधिक पैदावार पाने के लिए सीओ 238 किस्म की गन्ने की बीज इस्तेमाल करने से वे कीड़ों से बाधित खेत में भरपूर फसल पा रहे हैं।

 
सुरेश प्रताप (47) एक परिश्रमी, लगन के पक्के और प्रयोगधर्मी किसान है। वे 50 एकड़ में गन्ने उगाते है। 2-3 साल पहले अपने खेत में कीड़े की असर को देखकर वे बहुत चिंतित हो गये थे। अर्ली शूट बोरर और टॉप बोरर कीड़े गन्ने के पत्ते को नष्ट कर देता था और बाद में बची हुई पत्तियां भी सूखने लगती थीं। बार बार दवाईयां छिडकने से भी कीड़े पूरी तरह से नियंत्रित नहीं होते थे। परिणाम रूप में फसल बहुत कम हो रही थी। इन दिक्कतों से बाहर आने के लिए सुरेश ने ड्यूपॉन्ट इंडिया के कृषि विशेषज्ञों को संपर्क किया। उनके सलाह के अनुसार गन्ने को पहली बार पानी देने के समय में एक बार कोराजन दवाई छिडकाव किये। उससे गन्ने को 90 दिनों से 120 दिनों तक कीड़ों से संरक्षण मिला। परिणाम रूप में गन्ने की गुणवत्ता, मोटाई, वजन, रस और ऊंचाई भी बढ़ गयी।

 
सुरेश प्रताप अपने अनुभव बताते है –  तीन साल पहले मैं अपने खेत में कीड़ों की असर से बहुत चिंतित हो गया था। बाद में जब कृषि विशेषज्ञों की बात पर कोराजन और सीओ -238 बीज इस्तेमाल करने लगा तब से कीड़ांे पर सम्पूर्ण नियंत्रण हो गया। गन्ने में पौधे ज्यादा निकलने लगे और उनकी हरियाली भी बढ गयी। गन्ने को सभी प्रकार के पोषणों को स्वीकार करने की ताकत मिलने से गन्ने की आकार, वजन, गुणवत्ता और ऊंचाई बढ़ गयी। अब चीनी मिलों ने भी हमारे गन्ने को देखकर प्रशंसा व्यक्त कर रहे हैं। इस साल भी उत्तम बारिश, वातावरण के अनुकूल से और कीड़े की नियंत्रण करने से अच्छे फसल की प्रत्याशा में हूँ।

 
गन्ने की खेत में आनेवाले कीड़ों को नियंत्रण करने के लिए वैज्ञानिकों ने भी कोराजन इस्तेमाल करने को ग्रीन सिग्नल दे दिया हैं। प्रसिद्द शुगरकेन रिसर्च इंस्टिट्यूट के वैज्ञानिक डा. वीरेश सिंह कहते हैं की, ष्शूट बोरर, टॉप बोरर और अन्य कीड़े गन्ने पर प्रारम्भ से ही लगना शुरू करते हैं। किसान बताते हैं की एक बार ड्यूपॉन्ट कोराजन छिडकने से कीड़े नियंत्रित हो जाते हैं और अच्छे रिजल्ट मिलते हैं।ष्
गन्ने की खेती में अपनी उपलब्धि से सुरेश प्रताप अब संतुष्ट है और सही समय पर सही कदम उठाने से निश्चिंत भी हैं । इनके सलाह के अनुसार कई मित्र और रिश्तेदार भी अपने खेत मे कीटबाधा से मुक्त हो गये हैं । अब सुरेश प्रताप चंद अपने अनुभव को अन्य किसानों तक पहुंचना चाहते हैं ।

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