मथि पहाड़ बिठी निस गंगाड बिठी, स्कूल दफ्तर गों बजार बिठी

पहाड़ से लेकर परदेश तक नेगी दा के लिये लाखों लोगों ने मांगी दुआएं। स्वास्थ्य में तेजी से सुधार!

उत्तराखंड आन्दोलन के दौरान — नेगी दा के गाये गीत —- मथि पहाड़ बिठी निस गंगाड बिठी, स्कूल दफ्तर गों बजार बिठी— भुला कख जाणा छां तुम लोग उत्तराखंड आन्दोलन मा– ने राज्य आन्दोलन में संजीवनी का कार्य किया था। इस गीत ने लोगों में एक नई उर्जा का संचार किया था। उन दिनों ये गीत उत्तराखंड के हर गांव से लेकर शहर, बसों, स्कूल, दफ्तरों में लोगों को गाते हुए सुना जा सकता था। इस गीत को सुनते ही लोगों में अलग राज्य के प्रति उत्साह और जोश भर जाता था। आंदोलन के दौरान इस गीत ने पूरे उत्तराखंड को एक सूत्र में पिरोया था।

 
ठीक इसी तरह परसों देर सायं जब उत्तराखंड के लोगों को नेगी दा के अस्वस्थ होने की सूचना मिली तो हर कोई हतप्रभ और चिंतित होने लगा। देखते ही देखते ये खबर हर जगह पहुँच गई। हर कोई नेगी दा के स्वास्थ्य को लेकर अपने दोस्तों, रिश्तेदारों, फ़ोन, फेसबुक, वटसप के जरिये जानकारी लेने लगे। जिसके बाद पहाड़ के गांव से लेकर सात समन्दर पार तक लोगों ने नेगी दा के जल्द से जल्द स्वस्थ होने की दुआएं मांगी।

 

इस दौरान पहाड़ों के गांवो से लेकर शहरों, पूरे देश और विदेशों में भी लोगो नें नेगी दा के कुशलता की कामना की गई। कई जगह मंदिरों में पूजा अर्चना तो कई जगह हवन भी किये गये। पूरे उत्तराखंड की निगाहें नेगी दा पर लगी हुई थी हर कोई अपने अपने स्तर से जानकारी ले रहा था। कल सुबह तो नेगी दा के बारे में जानकारी लेने के लिए सर्च इंजन गूगल में मोदी से भी आगे निकल गए थे नेगी दा। जो ये दर्शाता है की नेगी दा को चाहने वाले और उनके स्वास्थ्य के बारे चिंतित लोग लाखों की संख्या में हैं। जो की उन्हें बेइंतहा प्यार करतें हैं। हर कोई नेगी दा को जल्द स्वस्थ देखना चाहता था।

 
वास्तव में नेगी दा की नाजुक बनी स्थिति से हर कोई बैचैन था। जैसे ही मुझे इस खबर के बारें में पता लगा मैं भी बहुत चिंतित होने लगा। और नेगी दा के स्वास्थ्य को लेकर हर किसी से सही स्थिति के बारे में जानकारी लेता रहा। परसों रातभर तो आँखों से जैसे नींद ही गायब थी। रही सही कसर झूठे अफवाहों और मेसेजों ने पूरी कर दी थी। इस दौरान तो कई लोगों को अपनी लिस्ट से ब्लाक करना पड़ा। कई लोग तो बिना सोचे समझे झूटे अपडेट और काॅपी पेस्ट कर रहें थे।

 

जिससे मन बेहद दुखी हो रहा था। लेकिन इन सबके बीच मन के अंदर से हर समय यही आवाज और भरोसा मिलता रहा की नेगी दा जल्द ही स्वस्थ होंगे। और आखिरकार लाखों लोगों की दुआएं असर कर गई। दुआओं व डॉक्टरों के अथक प्रयासों से नेगी दा के स्वास्थ्य में सुधार हुआ। तब जाकर एक अजीब सी बैचेनी से छुटकारा मिल पाया व मन शांत हुआ। जानकारी के अनुसार अभी नेगी दा के स्वास्थ्य में तेजी से सुधार हो रहा है और वे जल्द ही खतरे से बाहर आ जायेंगे। इससे बड़ी व शुकुन भरी खबर और कोई नहीं हो सकती है। बहुत जल्द ही एक बार वे फिर हम आप सब लोगो के बीच होंगे।

 

 

वास्तव में अगर देखा जाय तो नेगी दा के गीतों में असली पहाड़ बसता है। गीतों के हर बोल में पहाड़ की परम्परायें, लोकसंस्कृति, लोकजीवन, और लोकविरासत झलकती है। आवाज में ऐसा जादू की बच्चों से लेकर बुजुर्ग और बेटियों से लेकर दादी तक हर किसी की आँखे छलछला जाती है। ४१ बरसों की गीतों की गीतांजली में उन्होंने पहाड़ के हर विषय को अपनी आवाज दी। या यों कहिए की वे पहाड़ के पर्याय बन गये। हमारी पीढ़ी तो उनके गीतों को सुनकर ही बड़ी हुई है।

 

अगर पूरे पहाड़ को कहीं एक जगह बैठकर देखना और महसूस करना हो तो उनके गीतों को सुनकर देखा और महसूस किया जा सकता है। वे उत्तराखंड के सांस्कृतिक विरासत के पुरोधा हैं। नेगी दा के गीतों ने समाज में अपना व्यापक असर डाला है और इनके गीत जनगीत बन गये। नेगी दा के गीतों ने पहाड़ के जनमानस की समस्याओं से लेकर पीड़ा को लोगों के सामने रखा साथ ही समाज को एक नई दिशा दी। इसके अलावा नेगी दा के गीतों नें सरहदों और भाषाओँ के बंधन को भी तोडा। और समाज में अपनी अमिट छाप छोड़ी। नेगी दा के जितने प्रशंसक पहाड़ में है उससे भी ज्यादा देश, विदेशों में भी हैं।

 

कुल मिलाकर हम ये कह सकते हैं नेगी दा और पहाड़ एक दूसरे में रचे बसे हैं। भगवान बद्रीविशाल, केदारनाथ और मां भगवती नंदा से प्रार्थना है कि वे नेगी दा को अतीशीघ्र स्वस्थ करें।

संजय चौहान की फेसबुक वाल से साभार