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मंदी की मार, कंपनी मालिकों के लिए बोझ बने प्राइवेट जेट

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नई दिल्ली। कई बड़े बिजनसमैन ट्रैवलिंग के लिए अपने प्राइवेट जेट का इस्तेमाल करना पसंद करते हैं। लेकिन कारोबार में मंदी आने से कुछ बिजनसमेन के लिए प्राइवेट जेट बोझ बन गए हैं। इसलिए वो इन्हें लीज पर देकर कमाई करने की सोच रहे हैं।

 

इन्फ्रास्ट्रक्चर से लेकर रियल एस्टेट और मीडिया सेक्टर्स की कुछ कंपनियों ने अपने प्राइवेट जेट एग्रीगेटर्स को लीज पर दिए हैं। एग्रीगेटर्स इन एयरक्राफ्ट को ऑपरेट, मेनटेन करते हैं और पैसा कमाने के लिए इन्हें किराए पर देते हैं।

 

पिछले छह से नौ महीनों में ग्रुप, पुंज लॉयड, हीरो ग्रुप, डीएलएफ लिमिटेड, जेपी ग्रुप और भास्कर ग्रुप ने अपने एयरक्राफ्ट एग्रीगेटर्स को किराए पर दिए हैं। दिल्ली-एनसीआर की रियल एस्टेट कंपनी सुपरटेक ने अपना एयरक्राफ्ट उस कंपनी को वापस लौटा दिया है, जिससे यह लीज पर लिया गया था।

 

इस बारे में ईमेल और मेसेज से पूछे गए सवालों का सुपरटेक को छोडक़र किसी कंपनी ने जवाब नहीं दिया। सुपरटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर मोहित अग्रवाल ने बताया, हमारा एयरक्राफ्ट लीज पर था और हमने इसे वापस लौटा दिया है क्योंकि हम कॉस्ट कम करने की कोशिश कर रहे हैं। हमने अग्रीमेंट के तहत लीजिंग कंपनी को पेनल्टी भी चुकाई है।

 

इंडस्ट्री सूत्रों का कहना है कि कंपनियों की हालत खराब है। इसलिए वे बिजनस जेट से किनारा कर रही हैं। प्राइवेट जेट में डील करने वाले एक सूत्र ने बताया, एक प्राइवेट जेट को मेनटेन करना या इसे एयरपोर्ट पर पार्किंग में रखना भी बड़ा खर्च होता है, जिसे कंपनियां जितना अधिक हो सके, कम करने की कोशिश कर रही हैं।

 

उन्होंने कहा कि जेट के मालिक और एग्रीगेटर के बीच अग्रीमेंट इस तरह का होता है जिसमें मालिक जरूरत के अनुसार उड़ान के कुछ घंटों के लिए वादा करता है। इससे कंपनी को भी उड़ान के लिए विकल्प मिल जाता है और विमान के मेनटेनेंस पर होने वाले खर्च की भी बचत होती है।

 

इंडस्ट्री के एक अन्य सूत्र ने कहा कि इन कंपनियों के प्रमोटर्स यह भी नहीं चाहते कि मंदी के दौर में वे बिजनस जेट में उड़ान भरते दिखें। इंडस्ट्री से जुड़े एक एग्जिक्यूटिव का कहना था, बहुत से ऐसे बिजनसमैन हैं जिन्होंने अपने जेट एग्रीगेटर्स को नहीं दिए हैं, लेकिन इसके बावजूद वो इन जेट का इस्तेमाल नहीं कर रहे क्योंकि वे फिजूलखर्च करते हुए नहीं दिखना चाहते।

 

कॉर्पोरेट्स की उड़ानों में कमी आने की पुष्टि एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया के डेटा से भी हो रही है। डेटा से पता चलता है कि इस वर्ष अप्रैल से अगस्त के दौरान जनरल एविएशन चार्टर मूवमेंट में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में लगभग 6.1 पर्सेंट की कमी आई है

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