मदरसों में संस्कृत : उत्तराखंड बनेगा संस्कृत पढ़ाए जाने वाला पहला राज्य!

उदय दिनमान डेस्कः मदरसों में संस्कृत : उत्तराखंड बनेगा संस्कृत पढ़ाए जाने वाला पहला राज्य ! राज्य में  मदरसों को संचालित करने वाली संस्था मदरसा वेलफेयर सोसाइटी ऑफ उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को पत्र लिखकर यह मांग की है.अगर ऐसा होता है तो यह इतिहास बनने के साथ-साथ देश में अनेकता में एकता का सपना साकार होगा ही साथ ही राज्य की द्धितीय भाषा को भी सभी को पढने का मौका मिलेगा।

उल्लेखनीय है किउत्तराखंड मदरसा शिक्षा परिषद के तहत राज्य भर में 257 मदरसे संचालित हैं। जिसमें 26 हजार छात्र तालीम ले रहे हैं  राज्य में लगभग 207 मदरसों को संचालित करने वाली संस्था मदरसा वेलफेयर सोसाइटी ऑफ उत्तराखंड ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र रावत को पत्र लिखकर यह मांग की है कि राज्य में चल रहे मदरसों में संस्कृत भाषा का भी ज्ञान बच्चों को दिया जाए। सोसायटी द्वारा चलाए जा रहे 207 मदरसों में लगभग 25 हजार से ज्यादा बच्चे इस समय तालीम ले रहे हैं।

देशभर में उत्तराखंड से पहला राज्य होगा जहां पर किसी मुस्लिम संगठन ने मदरसों के सिलेबस में संस्कृत भाषा को पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने की मांग की है। एमडब्लूएसयू (मदरसा वेलफेयर सोसाइटी ऑफ उत्तराखंड) के चेयरमैन सिब्ते नबी ने मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत को यह पत्र लिख कर उत्तराखंड मदरसा बोर्ड सहित राज्य सरकार को विचार करने पर मजबूर कर दिया है।

नबी का कहना है कि जब मदरसों में बच्चे अंग्रेजी पढ़ते हैं तो फिर संस्कृत भाषा पढ़ने में किसी को क्या दिक्कत आ सकती है। नबी यह भी कहते हैं कि अंग्रेजी तो विदेशी भाषा है जबकि संस्कृति भारतीय भाषा के साथ-साथ उत्तराखंड की द्वितीय राजकीय भाषा है लिहाजा सरकार को इस फैसले पर जल्द मुहर लगानी चाहिये।

उधर, उत्तराखंड मुस्लिम बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार हाजी अख़लाक अहमद अंसारी का कहना है कि सोसायटी की मांग को वह गलत नहीं बताते लेकिन संस्कृत भाषा को मदरसों में लागू करवाने के लिए कुछ टेक्निकल दिक्कतें आ सकती हैं। अख़लाक की मानें तो मदरसों में पहले से ही हिंदी, गणित, विज्ञान और अंग्रेजी जैसी विषय पढ़ाए जा रहे हैं, जोकि जरूरी भी हैं।

आपको बता दें कि फिलहाल उत्तराखंड में SPQEM (स्कीम टू प्रोवाइड क्वालिटी एजुकेशन इन मदरसा) के तहत पहले ही विभिन्न मदरसों में शिक्षा दी जा रही है। SPQEM को केंद्रीय एचआरडी मंत्रालय ने कुछ समय पहले ही लागू किया था। इसमें तमाम सब्जेक्ट्स को जोड़ा गया है। केंद्र सरकार का उद्देश्य है कि इससे मदरसों की शिक्षा व्यवस्था में काफी हद तक सुधार आएगा। इस व्यवस्था के तहत केंद्र सरकार मदरसों में पढ़ाने वाले शिक्षकों को सैलेरी देती है।

उत्तराखंड मुस्लिम बोर्ड के डिप्टी रजिस्ट्रार हाजी अख़लाक अहमद अंसारी कहते हैं कि मदरसों में पहले से ही अंग्रेजी और हिंदी भाषा को तवज्जो दी जा रही है और इसकी आवश्यकता भी है। इसके अलावा मदरसों में केवल एक ही भाषा पढ़ाई जा सकती है जिसके लिए हमारे पास विकल्प के तौर पर अरबी और फारसी भाषा भी हैं।

अख़लाक ने यह भी कहा कि ऐसे में संस्कृत भाषा को अगर मदरसे में पाठ्यक्रम में जोड़ा जाएगा तो यह अव्यवहारिक होगा और संस्कृत को जोड़ने के लिए अरबी और फारसी भाषा को नहीं छोड़ सकते। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि फिलहाल किसी भी सोसाइटी की तरफ से उन्हें कोई पत्र प्राप्त नहीं हुआ है और अगर पत्र आता है तो वह उस पर विचार करेंगे।

उधर सरकार के मंत्री और प्रवक्ता मदन कौशिक ने भी इस मामले में ज्यादा तो कुछ नहीं कहा लेकिन इतना ज़रूर कहा कि अगर किसी को मदरसे में संस्कृत भाषा पाठ्यक्रम में शामिल करवानी है तो वह बोर्ड के पास आए, बोर्ड उस पर विचार करेगा।

उधर, कांग्रेस पार्टी ने भी सोसायटी की इस मांग पर अपना समर्थन देते हुए कहा है कि अगर मदरसों में संस्कृत भाषा पढ़ाई जाती है तो यह बच्चों के लिए अच्छा होगा। कांग्रेस प्रवक्ता मथुरा दत्त जोशी ने इसे राजनीति मोड़ देते हुए कहा है कि राज्य सरकार इसमें जल्द से जल्द अब फैसला ले ले।

by-http://hindi.eenaduindia.com/States/North/Uttarakhand/DehradunCity/2017/12/30170540/madarsa-society-demands-sanskrit-language-in-madarsas.vpf