केदारनाथ पैदल मार्ग और यात्रा पड़ावों पर स्थानीय लोगों को मिले रोजगार

चार वर्षों से रोजगार के लिये भटक रहे आपदा पीडि़त केदारघाटी के बेरोजगार,यात्रा पड़ावों और पैदल मार्ग पर रोजगार करने की नहीं मिल रही अनुमति,लाटरी के माध्यम से वितरित की जा रही हैं दुकानें
रुद्रप्रयाग। तीन मई से शुरू हो रही विश्व प्रसिद्ध केदारनाथ धाम की यात्रा में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग जोर-शोर से उठने लगी हैं। स्थानीय बेरोजगार युवाओं का कहना है कि पूर्व कांग्रेस के साथ ही अब नई भाजपा सरकार का ध्यान स्थानीय आपदा पीडि़तों को रोजगार देने पर नहीं है। आपदा पीडि़त आज भी रोजगार की तलाश में दर-बदर भटक रहे हैं।

 
दरअसल, केदारघाटी की 80 प्रतिशत आबादी भगवान केदारनाथ की यात्रा पर निर्भर है। छह माह यात्रा सीजन चलने के दौरान केदारघाटी के लोग होटल, लॉज, घोड़े-खच्चर, डंडी-कंडी के साथ ही अन्य व्यापारिक प्रतिष्ठानों का संचालन करके अपना रोजगार चलाते हैं, लेकिन आपदा के बाद से स्थिति परवर्तित हो गई है। गौरीकुंड से केदारनाथ तक 14 किमी पैदल मार्ग पर हजारों लोग छोटे-छोटे कारोबार करके अपनी आजीविका चलाते थे, लेकिन आपदा में सबकुछ तबाह हो गया। चार वर्ष बीत जाने के बाद भी आज तक स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्राप्त नहीं हो पाये हैं। कई आपदा पीडि़त तो रोजगार न मिलने के कारण यहां से पलायन कर चुके हैं, जबकि कई लोगों को अभी भी रोजगार मिलने की उम्मीद हैं।

 
आपदा के बाद से शासन-प्रशासन ने सभी यात्रा जिम्मेदारियों अपने हाथों में ले ली हैं, जबकि आपदा से पूर्व स्थानीय लोग ही यात्रा का संचालन करते थे। प्रशासन की ओर से जो भी दुकानें यात्रा पड़ावों, पैदल मार्ग पर बनाई जा रही हैं। उनका आवंटन लाटरी के माध्यम से किया जा रहा है। ऐसे में कुछ ही लोगों को रोजगार मिल रहा है। अधिकांश लोगों को रोजगार नहीं मिल पा है। रोजगार न मिलने के अभाव में बेरोजगार आपदा पीडि़तों के सम्मुख कई समस्याएं खड़ी हो गई हैं।

 
केदारघाटी रोजगार बचाओं संघर्ष समिति के दिवाकर गैरोला ने कहा कि रोजगार न मिलने की दिशा में आपदा पीडि़त जनता के सम्मुख कई समस्याएं खड़ी हो गई है। रोजगार न मिलने से आपदा पीडि़त दर-बदर भटक रहे हैं। आपदा के चार वर्षों बाद भी रोजगार की दिशा में कोई कार्य ना होना सरकार की नाकामयाबी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यदि स्थानीय लोगों को रोजगार के साधन उपलब्ध नहीं कराये जाते हैं तो जोरदार विरोध होगा।

 
वहीं केदारनाथ के विधायक मनोज रावत ने भी रोजगार के साधन उपलब्ध न होने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि केदारनाथ यात्रा पूंजीपतियों के हाथों में सिमटती जा रही है, जिस कारण स्थानीय लोगों में केदारनाथ यात्रा और परम्पराओं के प्रति निराशाजनक भाव पैदा होता जा रहा है, जो कि केदारनाथ यात्रा के लिये शुभ संकेत नहीं है। उन्होंने कहा कि स्थानीय जनता को रोजगार के साधन उपलब्ध कराने चाहिये। केदारघाटी की जनता का रोजगार छह माह तक भगवान केदारनाथ की यात्रा पर ही निर्भर है। श्री रावत ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि स्थानीय लोगों को रोजगार नहीं दिया जाता है और लोगों से रोजगार छीना जाता है तो, उसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा।