लालबत्ती: प्रदीप की राह में कॉटें बिछाने में लगे हैं सजवाण!

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प्रदीप भट्ट के राज्यमंत्री बनने की राह में रोड़ा बने सजवाण !
अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग में उपाध्यक्ष पद पर होनी है ताजपोशी, लेकिन सजवाण ने….

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अगर बात प्रदेश के विकास की हो तो प्रदेश का आम आदमी प्रदेश के विकास के लिए अपनी पूरी शक्ति लगा देगा, फिर चाहे वो किसी भी दल का हो। लेकिन यहां प्रदेश में सत्तासीन कांग्रेस सरकार के कुछ विधायक प्रदेश के विकास के पहिए को रोकना चाह रहे हैं। खासकर प्रदेश के युवाओं की राह में कांटें बिछाने का काम कर रहे हैं वह शायद इसलिए कि कही युवा उनसे आगे न पहुंच जाए। यहां सीधी बात करते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता और तेजतर्रार युवा नेता प्रदीप भट्ट के अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग के उपाध्यक्ष पद पर तैनाती के आदेश जारी कर दिए गए थे। विभाग में फाईल भी चल चुकी थी, सूत्रों की माने तो फाईल अनुमोदन के लिए मुख्यमंत्री कार्यालय पहुंच गई थी, फाईल पर अनुमोदन की मुहर लगती उससे पहले ही संसदीय सचिव और गंगोत्री विधायक विजयपाल सजवाण को इसकी भनक लगी । सूत्रों का कहना है कि इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने सीएम हरीश रावत पर दबाव बनाने के लिए इस्तीफे की धमकी तक दे डाली। जिसका असर यह हुआ कि फिलहाल प्रदीप भट्ट की ताजपोशी का मामला अटक गया है।
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यह कहना गलत नहीं होगा कि गाड-गदेरों वाले प्रदेश का विकास अगर कोई कर सकता है तो वह यही जन्मा, पला-बढा और यहां के पग-पग को जानने और पहचानने वाला ही कर सकता है और वह नाम प्रदेश के वर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत का है। जिस दिन इन्होंने प्रदेश के सीएम का पदभार संभाला था उस दिन उत्तराखंड घायल और खंड-खंड था। इस सबके बाद भी इन्होंने इस पहाडी प्रदेश के लिए वह सब किया जो एक पहाडी बेटे को करना चाहिए था, लेकिन इनकी राह में इनके अपने ही इनके सीएम बनते ही कॉटें बिछाने का काम करने लगे, जिसके कई दुखद परिणाम भी सामने आये और वे लोग आज भी कर रहे है कॉटें बिछाने का काम। प्रदेश के विकास के लिए सीएम हरीश रावत के विजन में उनके अपने ही क्यों कांटे बिछा रहे है यह बात किसी के भी गले नहीं उतर रही है। बात हो रही थी प्रदेश भटृ की।
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सूत्रों की माने तो लगभग नवंबर महीने में सचिव समाज कल्याण को सीएम हरीश रावत की तरफ से प्रदीप भट्ट को राज्यमंत्री बनाए जाने के नियुक्ति आदेश जारी किए गए थे। जिस पर विभागीय सचिव भूपिंदर कौर औलख ने पत्रावली तैयार कर मुख्यमंत्री के अनुमोदन हेतु प्रस्तुत कर दी थी। सबकुछ ठीक ठाक चल रहा था पर जब सूत्रों द्वारा संसदीय सचिव विजयपाल सजवाण को इस बात की भनक लगी तो वो अपना सब काम धाम छोड़कर सीएम दरवार पहुंच गए। जहां उन्होने सीएम हरीश रावत से ऐसा न करने का अनुरोध किया। और बात न मानने पर इस्तीफे की धमकी दे डाली। गौरतलब है कि विजयपाल सजवाण वर्तमान में गंगोत्री सीट से विधायक हैं। विजयपाल सजवाण और प्रदीप भट्ट की खटपट उस वक्त शुरू हुई, जब प्रदीप भट्ट ने भी उत्तरकाशी की गंगोत्री विधानसभा सीट से टिकट की दावेदारी कर दी। उसके बाद से इन दोनों नेताओं के संबधों में खटास आ गई।
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वहीं राज्यमंत्री बनाए जाने की बावत प्रदीप भट्ट ने कहा कि यह मुख्यमंत्री का विवेकाधिकार है। मुझे भी सूत्रों द्वारा ही ज्ञात हुआ था कि मुख्यमंत्री हरीश रावत जी ने कुछ इस तरह का निर्णय लिया है। लेकिन मुझे इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि विजयपाल सजवाण ने सीएम से उन्हें राज्यमंत्री बनाए जाने पर इस्तीफे की धमकी दी है। प्रदीप ने कहा कि मेरे राजनीतिक गुरू सीएम हरीश रावत हैं और मैने उन्ही से संघर्ष करना सीखा है। दो हजार दो में हरीश रावत जी के कारण कांग्रेस की सरकार बनी थी। किन्तु फिर वह मुख्यमंत्री नहीं बन पाये थे। लेकिन आज वह मुख्यमंत्री हैं। और देश के अंदर सबसे प्रभावशाली मुख्यमंत्रियों में उनकी गिनती होती है। मेरे लिए हरीश रावत जी का निर्णय ही मान्य है। मुझे नहीं लगता कि सीएम हरीश रावत जी पर इस तरह की किसी धमकी का असर होता है।
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मुझे सीएम साहब राज्यमंत्री बना रहे थे कोई गंगोत्री का टिकट तो नहीं दे रहे थे जो विधायक सहाब ने इस्तीफे की धमकी दी। मैं तो पिछले पांच साल से गंगोत्री में कांग्रेस सरकार के विकास कार्यों का प्रचार प्रसार करने में लगा हुआ हूं। जिसका सीधा फायदा क्षेत्रीय विधायक विजयपाल सजवाण को ही मिलना है। विजयपाल सजवाण जी को गंगोत्री से जिताने के लिए हम सब काम कर रहें हैं। और निश्चित रूप से कांग्रेस इस बार भी चुनाव जीतेगी। प्रदीप भट्ट ने कहा कि वह लगातार कांग्रेस की मजबूती के लिए काम कर रहे हैं। हरीश रावत जी की लोकप्रियता के कारण कांग्रेस सरकार पुनः राज्य में वापसी करेगी।हालांकि इस मामले में सजवाण का पक्ष जानने का प्रयास किया गया लेकिन उनसे बात नहीं हो पायी और उनका पक्ष नहीं जान पाए। अगर उनसे वार्ता होती ळै तो उनी बात को भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा
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सरकार में किसको क्या जिम्मेदारी दी जाए, निश्चित रूप से यह मुख्यमंत्री हरीश रावत जी का विवेकाधिकार है। मुख्यमंत्री जी द्वारा संगठन के किसी व्यक्ति को राज्यमंत्री बनाया जाए या अन्य कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जाए, इसमें सम्मानित विधायकों को हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। विधायकों को कार्यकर्ताओं के सम्मान का ख्याल रखना चाहिए। नियुक्ति करना मुख्यमंत्री का अधिकार है और उनका निर्णय सर्वमान्य होता है।
मथुरा दत्त जोशी, मुख्य प्रदेश प्रवक्ता कांग्रेस।

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