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लापरवाही : जिंदा बच्चे को किया मृत घोषित !

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हाई कोर्ट ने दिया जांच का आदेश

नई दिल्ली। नवजात को मृत घोषित करने में सफदरजंग अस्पताल की कथित चिकित्सकीय लापरवाही की घटना पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र को मामले की जांच का आदेश देने का निर्देश दिया है.

 

घटना इस वर्ष जून माह की है. अदालत ने आदेश में यह उल्लेख किया कि नवजात को वापस अस्पताल लाया गया था और वेंटिलेटर पर रखा गया था. लेकिन 36 घंटे बाद उसकी मौत हो गई. न्यायमूर्ति विभु बाखरू ने कहा कि जिस तरह माता-पिता को नवजात सौंपा गया वह तरीका भी क्षुब्ध कर देने वाला है.

 

अदालत ने स्वास्थ्य मंत्रालय का प्रतिनिधित्व कर रही केंद्र सरकार की स्थायी अधिवक्ता मोनिका अरोड़ा और वकील कुशाल शर्मा को घटना की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति की स्थापना का निर्देश दिया. अदालत ने कहा कि पैनल में स्वास्थ्य सचिव या उनका नामित किया व्यक्ति होना चाहिए जिसका दर्जा संयुक्त सचिव से कम ना हो, स्वास्थ्य सेवाओं के अतिरिक्त महानिदेशक और राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक भी इसमें शामिल होने चाहिए.

 

निर्देश में कहा गया कि समिति आठ हफ्तों के भीतर अपनी रिपोर्ट पेश करे. अदालत ने कहा कि समिति को यह अधिकार है कि वह स्टाफ के किसी भी सदस्य को, चिकित्सकों को पूछताछ के उद्देश्य से बुला सकती है और उन्हें पैनल के साथ पूरा सहयोग करना होगा. इसके अलावा सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक को निर्देश दिया गया कि वह नवजात के माता-पिता को संबंधित सभी दस्तावेज दें

 

और उनकी एक प्रति समिति के अवलोकन के लिए रखें. अदालत ने कहा कि माता-पिता अस्पताल की कथित चिकित्सकीय लापरवाही के खिलाफ दिल्ली चिकित्सा परिषद में शिकायत भी दर्ज करवा सकते हैं. इन निर्देशों के साथ अदालत ने मामले को सुनवाई के लिए तीन जनवरी 2018 के लिए सूचीबद्ध कर लिया.

 

माता-पिता द्वारा दायर याचिका के मुताबिक घटना इस वर्ष 18 जून की है, उनके बच्चे का जन्म समयपूर्व (चार महीने पहले) हो गया था. बच्चे का जन्म सुबह पांच बजकर 45 मिनट पर हुआ था और छह बजे माता-पिता को बताया गया कि नवजात नहीं रहा है. अंतिम क्रिया के लिए नवजात को एक लिफाफे में उन्हें सौंप दिया गया. छ घंटों बाद नवजात को अंतिम क्रिया के लिए ले जाते वक्त पता चला कि वह सांस लेने की कोशिश कर रहा है. उसे फिर अस्पताल ले जाया गया.

 

अस्पताल में उसे ऑक्सीजन दी गई लेकिन वह 36 घंटे से ज्यादा जीवित नहीं रहा. याचिका में माता-पिता ने घटना की जांच की मांग की है, इसके अलावा जिस सदमे से वह गुजरे हैं उसके लिए मुआवजे की मांग करते हुए संबद्ध चिकित्सकों और स्टाफ के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की.

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