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किसानों ने सडक़ों पर फेंकी सब्जियां, आक्रोश में अन्नदाता

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नई दिल्ली । अपनी मांगों को लेकर मध्य प्रदेश समेत देश के 7 राज्यों के किसान आज से आंदोलन पर हैं। राष्ट्रीय किसान महासंघ ने 130 संगठनों के साथ केंद्र सरकार के खिलाफ 10 दिवसीय आंदोलन का आह्वान किया है। इस बीच आक्रोशित किसानों ने शहरी इलाकों में दूध की आपूर्ति बंद कर दिया है।

इतना ही नहीं सडक़ों पर फलों और सब्जियों को फेंक कर अपना विरोध जताया है। उधर, किसान आंदोलन के बीच केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने गुरुवार को कहा है कि सरकार इस खरीफ सत्र से ही स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों को इसी सत्र में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिलेगा। मध्यप्रदेश के झबुआ में धारा 144 लगा दी गई है।

किसानों से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। मंदसौर में पूरे शहर में पुलिस की तैनाती कर दी गई है। उत्तर प्रदेश के आगरा में अपने वाहनों की फ्री आवाजाही कराने के लिए किसानों ने टोल पर कब्जा कर लिया है। यहां किसानों ने जमकर की तोडफ़ोड़ की। किसान आंदोलन का असर सत्ता और सियासत दोनों में देखने का मिल रहा है। किसान संगठनों के ऐलान के बाद जहां राज्य सरकारें अलर्ट हो गई हैं, वहीं विपक्ष इसे सियासी रंग देने में जुटा है।

मध्यप्रदेश: गांव से नहीं निकलेंगे ग्रामीण
मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने देर रात तक बैठक की। पूरे मामले की कमान उन्होंने खुद संभाल रखी है। प्रदेश में किसान संगठनों के सख्त फैसले से शहरी लोगों में बेचैनी बढ़ चली है। संगठनों का कहना कि गांव बंद आंदोलन के दौरान कोई भी ग्रामीण शहर की ओर रुख नहीं करेगा। इस दौरान गांव से कोई भी सामग्री बाहर नहीं आएगी।

किसान संगठनों के इस कड़े रुख के बाद शहरी लोगों की मुश्किलें बढ़ चली हैं। क्योंकि उनकी रोजमर्रा की चीजें गांव से ही मुहैया होती हैं। यही वजह है आंदोन के एक दिन पूर्व गुरुवार को मध्यप्रदेश में शहरी बाजारों में भारी भीड़ देखी गई। इंदौर, देवास और मध्यप्रदेश के कई थोक और फुटकर सब्जी मंडियों में भारी भीड़़ देखी गई।

मौके का फायदा उठाते हुए व्यापारियों ने अपने हिसाब से दाम ब़ढ़ाकर बेचे। इस आंदोलन को कारगर बनाने के लिए किसान संगठनों ने पूरी ताकत झोंक दी हैं। 6 जून को मंदसौर गोलीकांड की बरसी के मौके पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के आने की तैयारी से सियासी पारा और गर्म हो गया है। सरकार पूरे आंदोलन को कांग्रेस समर्थित बता रही है तो किसान संगठन इसे सिरे से खारिज कर रहे हैं।

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