कोटा सुधारों में देरी से घटेगी आइएमएफ की साख: जेटली

नई दिल्ली । वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आइएमएफ) में कोटा सुधारों की धीमी गति को लेकर निराशा जताई है। उन्होंने कहा है कि इसमें आगे और देरी से इस बहुपक्षीय संगठन की वैधता और विश्वसनीयता कम होगी। आइएमएफ की सालाना बैठक में हिस्सा लेने यहां पहुंचे वित्त मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक व वित्तीय व्यवस्था में बढ़ते जोखिम के समाधान के लिए मुद्राकोष की ओर से निगरानी व्यवस्था बढ़ाने की जरूरत को रेखांकित किया।

 

अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक एवं वित्तीय समिति (आइएमएफसी) की बैठक में जेटली बोले कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था के सामने जो उभरता जोखिम है, उसमें आइएमएफ द्वारा निगरानी बढ़ाए जाने की जरूरत है। आइएमएफ के पास अपनी जिम्मेदारी सही तरीके से निभाने के लिए पर्याप्त संसाधन होने चाहिए। उसे कोटा आधारित संस्थान के रूप में भी काम करने की जरूरत है। इसे देखते हुए आइएमएफ की मौजूदा ऋण क्षमता को बनाए रखने के लिए व्यापक सहमति है। आइएमएफ का मौजूदा संसाधन कोष उधार के संसाधनों पर अधिक निर्भर है। ऐसे में कोटा बढ़ाने की काफी जरूरत है।

 

यह निराशाजनक है कि 15वें जीआरक्यू (कोटा की आम समीक्षा) को पूरा करने की समयसीमा बढ़ाकर 2019 की सालाना बैठक तक कर दी गई है। इसमें और देरी मुद्राकोष की वैधता और विश्वसनीयता को घटाएगी। यह समझौते की शर्तो की भावना के भी खिलाफ होगा। उम्मीद है कि अब निर्धारित हुई समयसीमा का सम्मान किया जाएगा और इसका पालन होगा। भारत आइएमएफ में कोटा सुधारों के लिए दबाव बनाता रहा है। यह इस बहुपक्षीय संगठन की गतिविधियों में विकासशील देशों की आवाज को बढ़ाएगा। इसके अलावा कोटा सुधार बदली आर्थिक वास्तविकताओं, विशेष रूप से विकासशील देशों की बढ़ती ताकत को प्रदर्शित करेगा।

PropellerAds