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कथित भारत बंद: सोशल मीडिया से थमा पूरा देश ! सुरक्षा के कड़े इंतजाम

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नई दिल्ली: आठ दिन पहले हुए दलित संगठनों के भारत बंद के जवाब में मंगलवार को भारत बंद की आशंका. आज फिर भारत बंद, किसी संगठन से नहीं, सोशल मीडिया से थमा पूरा देश!

आपको बता दें कि  दो अप्रैल को दलितों के भारत बंद के खिलाफ आज सवर्णों की तरफ से कथित भारत बंद का एलान किया गया है. इस भारत बंद को सोशल मीडिया के जरिए बुलाया गया है. कोई एक संगठन या नेता इसकी अगुवाई नहीं कर रहा है. दो अप्रैल के दलितों भारत बंद के दौरान एमपी, यूपी राजस्थान समेत कई जगहों पर जमकर हिंसा हुई थी.

 

इस हिंसा में अलग अलग जगहों पर करीब 10 लोगों की जान चली गई थी. इसलिए सोशल मीडिया पर बुलाए इस भारत बंद को देखते हुए प्रशासन पहले से मुस्तैद है कि पहले जैसी हिंसा न हो.इस कथित बंद के मद्देनजर गृहमंत्रालय ने सभी राज्यों को अलर्ट भेजा है. गृहमंत्रालय की एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि अगर हिंसा तो इसके लिए सीधे डीएम और एसपी जिम्मेदार होंगे. एमपी, यूपी और राजस्थान को खास सतर्क रहने के लिए कहा गया है.

 

राज्यों ने बंद के मद्देनजर एतिहातन कदम भी उठाएं हैं. मध्य प्रदेश के भिंड में कर्फ्यू लगा है, इंटरनेट सेवा पर भी रोक लगाई गई है. एमपी के कई जिले में धारा 144 लागू है. दलितों के बंद के दौरान भिंड, मुरैना और ग्वालियर में सबसे ज्यादा हिंसा हुई थी.राजस्थान के जयपुर में भी धारा 144 लागू है और आधी रात से इंटरनेट सेवा बंद पर रोक लगा दी गई है. बंद की वजह से ज्यादातर स्कूल नहीं खुलेंगे. वहीं झालावाड़ में बंद को प्रशासन ने भ्रामक बताया है.

कई शहरों में कर्फ्यू
भारत बंद में दो अप्रैल जैसी हिंसक घटनाएं ना हों, इसके लिए शासन-प्रशासन ने कमर कस ली है. संवेदनशील इलाकों में धारा-144 लागू करके बड़ी संख्या में सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं. कई स्थानों पर इंटरनेट सेवाओं को स्थगित कर दिया गया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों को सुरक्षा इंतजाम चाक-चौबंद करने का परामर्श जारी किया है.

हिंसा पर नपेंगे डीएम-एसएसपी
गृह मंत्रालय के अधिकारी ने मीडिया को यह जानकारी दी कि सभी राज्यों को भारत बंद के संबंध में एडवाइजरी जारी कर दी गई है. गृह मंत्रालय ने कहा कि अपने इलाके में होने वाली किसी भी हिंसा के लिए जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार होंगे. मंत्रालय ने सभी राज्यों को एक परामर्श जारी किया है कि कुछ समूहों द्वारा सोशल मीडिया पर 10 अप्रैल को बुलाए गए भारत बंद के मद्देनजर आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएं.

उत्तर प्रदेश में भी हाई अलर्ट
यूपी के लखनऊ, मेरठ, हापुड़, मुजफ्फरनगर सहित कई शहरों में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. हापुड़ और मेरठ को छावनी में बदल दिया गया है. दो अप्रैल के दिन यहां बड़े पैमाने पर हिंसा हुई थी. यहां इंटरनेट सेवाएं भी बाधित कर दी गई हैं.

 

यूपी के मेरठ जोन के 6 जिलों में हाई अलर्ट है. गाजियाबाद, इलाहाबाद में धारा 144 लागू है तो वहीं सहारनपुर में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई. फिरोजाबाद में पहली से 9वीं कक्षा तक के स्कूल को बंद किया गया है. किसी बड़े संगठन ने बंद का ऐलान नहीं किया है, लेकिन सोशल मीडिया पर 3 अप्रैल से ही इसकी कॉल चल रही है। 2 अप्रैल को हुए दलितों के बंद में 17 लोगों की मौतों को ध्यान में रख इस बार केंद्र सरकार ने राज्यों को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की हिदायत दी है।

 

गृह मंत्रालय ने कहा है कि कहीं भी हिंसा हुई तो उस इलाके के डीएम और एसपी को निजी तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए राज्य में जयपुर सहित 13 जिलों में कानून व्यवस्था संभालने के लिए बीएसएफ और सीआरपीएफ जैसी पैरामिलट्री फोर्स तैनात की गई है। राजधानी में धारा 144 लागू कर दी गई है। मोबाइल इंटरनेट 24 घंटे (मंगलवार रात 10 बजे तक) के लिए बंद कर दिया गया है। हालांकि, राजस्थान यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. आरके कोठारी ने कहा कि सभी सेंटर्स पर परीक्षाएं यथावत रहेगी। सुरक्षा के लिए पुलिस तैनात की है।

 

उल्लेखनीय है कि एससी-एसटी एक्ट में तत्काल गिरफ्तारी पर रोक लगाने संबंधी सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में 2 अप्रैल को दलित संगठनों ने भारत बंद किया था। इस दौरान देश में कई जगह उपद्रव व आगजनी की घटनाएं हुई थीं।राज्य के 13 जिलों में किसी भी तरह की अप्रिय घटना रोकने लिए बीएसएफ की 20 कंपनियों को तैनात किया है। जालौर और भरतपुर में सबसे ज्यादा 3-3 तीन कंपनियों को लगाया गया है।

 

बाड़मेर, सवाई माधोपुर और बीकानेर में 2-2 कंपनियां और जोधपुर ग्रामीण, नागौर, सीकर, जैसलमेर, डूंगरपुर, धौलपुर, भीलवाड़ा व करौली में 1-1 कंपनी को तैनात किया गया है। करौली में बीएसएफ के साथ सीआरपीएफ की 2 और दौसा में 1 कंपनी को तैनात किया गया है। जयपुर कमिश्नरेट की पुलिस सोशल मीडिया पर चल रहे प्रस्तावित आंदोलन को लेकर अलर्ट हो गई है। जयपुर कमिश्नरेट को पुलिस के साथ आरएसी की कंपनियां दी गई हैं और 7 सीआरपीएफ की कंपनियों शहर में हर मुख्य मार्ग व चौराहों पर तैनात कर दी गई है।

 

 

प्रदेश में अर्द्ध सैनिक बलों की 23 कंपनियां तैनात हैं। इनमें 3 रेपिड एक्शन फोर्स व 20 बीएसएफ की कंपनियां शामिल है। केंद्र सरकार ने सीआरपीएफ की सात और कंपनियां सोमवार को राज्य सरकार को उपलब्ध करवा दी। संवेदनशील शहरों में ये कंपनियां पुलिस के सहयोग के लिए तैनात कर दी गई है। गौरतलब है कि इससे पहले करीब 10 साल पहले 2008-09 में गुर्जर आंदोलन के दौरान प्रदेश के दौसा और करौली जिलों में बीएसएफ की तैनाती हुई थी।

 

प्रदेश में कोई बंद नहीं है। कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सरकार सख्ती से निपटेगी। कलेक्टर-एसपी को इसके निर्देश दिए गए हैं। डेढ़ दर्जन से अधिक शहरों में केंद्रीय अर्द्ध सैनिक बलों की 30 कंपनियां पुलिस के सहयोग के लिए तैनात की गई है। अगर कोई जबरन दुकान बंद कराता है। उपद्रव मचाता है तो 100 नंबर के अलावा 2388435 व 2388436 नंबर पर सूचना दी जा सकती है।दलित आंदोलन में मध्यप्रदेश सबसे बुरी तरह प्रभावित हुआ था। 2 अप्रैल के बंद के दौरान हुई हिंसा में 8 लोगों की मौत हुई थी। हिंसा के केंद्र रहे ग्वालियर और भिंड जिलों में कर्फ्यू है।

 

 

अवकाश घोषित करने वाले स्कूलों में सवाई भवानीसिंह, आईआईएस, एसएमएस, एमजीडी, जयश्री पेड़ीवाल, सेंट जेिवयर्स, जेवीपी इंटरनेशनल, सेंट एंसलम्स, सोमानी इंटरनेशनल स्कूल, सेंट एंजेला सोफिया, अमेरिकन इंटरनेशनल, इंडिया ओवरसीज माहेश्वरी समाज के सभी शिक्षण संस्थान शामिल हैं। हालांकि, एमजीडी में परीक्षाएं यथावत रहेंगी।शहर में अधिकतर जगह बाजार खुले रहेंगे।

 

उद्योग व व्यापार संगठन फोर्टी के अध्यक्ष सुरेश अग्रवाल ने बताया- बंद को न तो उनका समर्थन है, न ही विरोध। जो व्यापारी दुकान खोलना चाहते हैं, प्रशासन उनको सुरक्षा देे। वहीं जयपुर व्यापार महासंघ ने सदस्य व्यापार मंडलों से स्वविवेक से फैसला करने को कहा है। राजापार्क व्यापार मंडल के अध्यक्ष रवि नैयर के अनुसार राजापार्क में दुकानें बंद नहीं रहेंगी। किशनपोल और दीनानाथ जी के रास्ते में दुकानें बंद रह सकती हैं। प्रदेश की कृषि उपज मंडियां खुली रहेंगी।

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