कंपनियों ने जमा नहीं कराया पीएफ का 6.25 हजार करोड़

नई दिल्ली। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन में बड़ा घोटाला होने की संभावना नजर आ रही है. दरअसल, देश की कई दिग्गज कंपनियों ने कर्मचारियों के पीएफ का 6.25 करोड़ रुपए जमा नहीं कराया है.

 

कर्मचारियों के पीएफ का लेखा-जोखा रखने वाले ईपीएफओ की सालाना रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ है. सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस रिपोर्ट में कर्मचारियों के पीएफ का पैसा न जमा करने वाली कंपनियों के नाम शामिल किए गए हैं. इन कंपनियों में पब्लिक और प्राइवेट सेक्टर की कई दिग्गज कंपनियां शामिल हैं.

 

ईपीएफओ ने 433 कंपनियों की जांच शुरू कर दी है जिन पर पीएफ मैनेजमेंट में गड़बडिय़ों की आशंका है. ईपीएफओ ने अपने फील्ड ऑफिसों से इन 433 कंपनियों का तुरंत ऑडिट कर इनकी वित्तीय हालत पता लगाने का निर्देश दिया है.

 

सरकारी और प्राइवेट कंपनियां शामिल
सूत्रों के मुताबिक इस रिपोर्ट से पता चलता है कि ईपीएफओ में 6.25 हजार करोड़ का डिफॉल्ट हुआ है. 1539 सरकारी कंपनियों ने 1360 करोड़ रुपये नहीं जमा किए जबकि प्राइवेट कंपनियों ने 4651 करोड़ रुपये नहीं जमा किए. घपलेबाजों में प्राइवेट और पीएसयू के कई बड़े नाम शामिल हैं. आपकी कंपनी आपके अकाउंट में पैसा डाल रही हैं या नहीं इसका पता रखना बेहद जरूरी है. इसके लिए नौकरीपेशा लोग अपने पीएफ में जमा पैसे की जानकारी ले सकते हैं. यह जानकारी लेने के कई तरीके हैं.

 

नहीं फाइल किए रिटर्न्स
कंपनियों को ट्रैक करने वाले ईपीएफओ के एक विभाग ने यह पाया कि अपने खुद के प्रविडेंट फंड ट्रस्ट्स चलाने वाली इन 433 कंपनियों ने अपने एम्प्लॉयीज के फरवरी 2018 के पीएफ रिटर्न्स फाइल नहीं किए हैं. ईपीएफओ ने अपने फील्ड ऑफिसों में भी ऐसा ही आंतरिक सर्कुलर जारी किया है.

 

433 कंपनियों ने जमा नहीं किया पैसा
ईपीएफओ ने जिन कंपनियों का जिक्र किया है, उनमें 433 कंपनियां हैं. इन कंपनियों ने पीएफ का पैसा जमा नहीं कराया है. ईपीएफओ के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सालाना रिपोर्ट में इन कंपनियों के नाम शामिल किए गए हैं. ईपीएफओ ने इन कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी है. अभी खातों की जांच की जा रही है. ईपीएफओ जल्द ही इस मामले की रिपोर्ट श्रम मंत्रालय को भी सौंप सकता है.

 

कंपनियों को नहीं मिला पर्याप्त स्कोर
पीएफ नियमों के पालन के मामले में कम से कम 675 कंपनियों ने 600 पॉइंट स्केल पर 300 पॉइंट्स ही स्कोर किए हैं. इन 675 में से कम से कम 433 कंपनियों ने फरवरी के पीएफ रिटर्न्स फाइल नहीं किए हैं जिस कारण ये जांच के घेरे में हैं.

 

छूट पर रोक लगा सकता है ईपीएफओ
कंपनियों के ऑडिट के बाद ही हकीकत सामने आएगी. ईपीएफओ अधिकारी इन कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है. कंपनियों को मिलने वाली छूट पर भी रोक लगाई जा सकती है. अगर कोई कंपनी एक बार यह टैग खो देती है तो उसे हर महीने की 15 तारीख से पहले अपने एम्प्लॉयीज के पीएफ डिडेक्शंस ईपीएफओ को बताने होते हैं. साथ ही कंपनी पीएफ निवेश और उससे पर मिलने वाला ब्याज का कोई अधिकार नहीं रह जाता.

 

राशि जमा करानी ही होगी
घपलेबाजों को पीएफ की राशि जमा करानी ही होगी. ईपीएफओ के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ऐसी स्थिति में कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई करने का पूरा अधिकार है. लेबर लॉ एक्ट के तहत कंपनियों से वसूली के लिए उन पर ठोस कार्रवाई की जा सकती है. हालांकि, अगर कोई घोटाला है तो इसकी जांच एजेंसियों को भी सौंपी जा सकती है.

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