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…कमीशन के गटर में गिर गयी डीएम महोदया-देखे वीडियो

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कलेक्टर सफाई का जायजा लेने गयी और खुद गटर में गिर गयी। डीएम नाले के जिस ढक्कन पर खडी थी वहीं टूट गया

उदय दिनमान डेस्कः कमीशन के गटर में गिर गयी डीएम महोदया। एक वाक्या कमीशन के खेल का सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रही एक वीडियो के अनुसार एक जिलाधिकारी निर्माण कार्य का निरीक्षण करने पहुंची और काम में गडबडी पर ठेकेदार को कार्य सुधार के जैसे ही निर्देश दे रही थी वैसे ही वह भी कमीशन की भेट चढ कर घायल हो गयी। यह वीडियो कहां का है पता तो नहीं चल पाया लेकिन है मेरे देश का।

भारत जैसे विकासशील देश में पुल का गिरना, सडक का टूटना और पुस्तों का गिरना आम बात है। क्योंकि यहां कदम दर कदम पर कमीशन का खेल खेला जाता है। विकास का नहीं। यही कारण है कि देश आज भी विकास के पथ पर चल रहा है विकास कमीशन के चक्कर में पडकर विनाश का रूप ले लेता है। आज भी देश में विकास के नाम पर जारी धनराशि में से मात्र पाच से दश प्रतिशत ही विकास कार्य में लगाया जाता है बाकी सब कमीशन का होता है।

आपको बता दें कि हर कदम पर कमीशन का खेल चलता है ठेकेदारों-इंजीनियरों का खूब घालमेल..। जी हां, चार फीसदी काम दिलाने का फिर 8 से 12 फीसदी काम कराने यानी निर्माण कार्य के लिए बिल की धनराशि पर कमीशन..। कुछ ऐसी ही हकीकत से इंजीनियर न केवल खुद माला-माल होते जाते हैं बल्कि इसका एक हिस्सा ऊपर सियासी दलों के आकाओं तक पहुंचाने का भी चलन रहा है।

जानकारों की मानें तो अकेले राजकीय निर्माण निगम में मौजूदा वक्त में ज्यादा से ज्यादा निर्माण परियोजनाएं बतौर कार्यदायी संस्था दी जा रही हैं। चलन यह हो गया है कि जो भी फर्म शासन से काम लेकर आती है उसे काम देने के लिए कुल कीमत मसलन, 100 करोडका चार फीसदी देना पडता है। इसमें प्रबंध निदेशक और ऊपर मंत्री तक पहुंचाया जाता है। फिर निर्माण जिस यूनिट को दिया जाता है। वहां के निर्माण के पहले बिल पेमेंट पर 8 से 12 फीसदी कमीशन वसूलने का चलन है। इसमें दो फीसदी की दर से प्रोजेक्ट मैनेजर, महाप्रबंधक, प्रबंध निदेशक और फिर फाइनेंस व लेखाधिकारियों में बंटता है।

भारत में कमीशन का खेल आपको बताते है कहां से शुरू और कहा तक खत्म होता है। यहां योजना बनने से लेकर धरातल पर उतारने तक में कमीशन लिया जाता है और यह कमीशन पद के हिसाब से होता है। देश विकास कर रहा है कि विकास की गर्त में जा रहा ळै कोई नहीं समझ पता। समझ पाता है तो सिर्फ कमीशन को। यह वीडियों जो यहां साभार दिया गया है में साफ दिख रहा है कि क्या हुआ। यह कहा का है इसके बारे में ज्यादा जानकारी तो नहीं लग पायी लेकिन यह वीडियो हमारी व्यवस्था को आइना जरूर दिखाता है।

https://youtu.be/qd4mcNBaCK8

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