कल्पेश्वर धाम  : कल्पेश्वर के दर्शन करना कल्पना !

चमोली। पांच वर्ष से लोक निर्माण विभाग वर्ल्ड बैंक 120 मीटर स्पान के झूला पुल का निर्माण नहीं कर पाया है। अगर यह पुल बनता तो इससे इससे पंचकेदारों में पांचवें केदार कल्पेश्वर धाम तक यात्रियों की राह आसान होती। इस बार भी यात्राकाल के दौरान कल्पेश्वर धाम पहुंचने वाले यात्रियों को कच्चे लकड़ी के पुल से ही कल्पगंगा को पार कर भगवान की जटाओं के दर्शन करना पड़ सकता है।

 

वर्ष 2013 में आपदा के दौरान कल्पगंगा नदी के ऊपर बना झुला पुल बह गया था। इसी पुल से श्रद्धालु कल्पगंगा नदी को पार कर भगवान के कल्प भाग के दर्शन कर पाते थे। आपदा में पुल बहने के बाद स्थानीय लोगों ने प्रशासन से पुल निर्माण की गुहार लगाई। इस दौरान लकड़ी के कच्चे पुल का निर्माण कर यात्रियों को इससे आवाजाही कराई गई।

 

वर्ष 2014 में यहां पर 120 मीटर स्पान के लंबे पुल को स्वीकृति मिली। इसके लिए सात करोड़ रुपये आवंटित कर लोक निर्माण विभाग वर्ल्ड बैंक को पुल निर्माण की जिम्मेदारी सौंपी। लंबे समय बाद भी वर्ल्ड बैंक लोनिवि पुल का निर्माण पूरा नहीं कर पाया है। अभी तक पुल के एबेडमेंट के अलावा कुछ अन्य निर्माण नहीं हुआ है। पुल न बनने के कारण प्रत्येक वर्ष ग्रामीण कच्चे लकड़ी के पुल के जरिये श्रद्धालुओं को आर पार कराते हैं।

 

पुल निर्माण में लंबा समय लगने के चलते लोक निर्माण विभाग ने यहां पर ट्रॉली भी लगाई थी। कुछ दिनों तक ट्राली से लोगों ने नदी को पार किया। परंतु बीते एक साल से

 

कल्पेश्वर को पंचकेदारों में पांचवें केदार के रूप में पूजा जाता है। यहां पर भगवान शिव के कल्प अर्थात जटा भाग के दर्शन होते हैं। मान्यता है कि पांडव काल में पांडव भगवान शिव के दर्शनों को आतुर थे। मगर किसी कारण भगवान शिव पांडवों को अपने दर्शन नहीं देना चाहते थे। पांडवों ने पांचो केदारों में भगवान शिव के अलग अलग शरीर के अंगों के दर्शन किए। कल्पेश्वर में पांडवों ने भगवान शिव के कल्प अर्थात जटा भाग के दर्शन किए थे।

 

अधिशासी अभियंता (लोनिवि वर्ल्ड बैंक गोपेश्वर) मनोज कुमार भट्ट का कहना है कि कल्पेश्वर में पुल निर्माण का कार्य चल रहा है। पुल निर्माण में तेजी लाई जा रही है। यहां पर क्षतिग्रस्त ट्रॉली की जल्द मरम्मत कर इसका संचालन शुरू किया जाएगा।

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