udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news कक्षा चार में पढ़ने वाली साक्षी ने भेजी पीएम को चिट्टी

कक्षा चार में पढ़ने वाली साक्षी ने भेजी पीएम को चिट्टी

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केदारघाटी के सुदूर गांव हुड्डू की रहने वाली है साक्षी ,सैनिक स्कूल में बेटियों को प्रवेश दिलाने की मांग

रुद्रप्रयाग। सैनिक स्कूल में बेटियों को भी प्रवेश के मिले इसके लिए केदारघाटी के सुदूर गांव हुड्डू की साक्षी ने प्रधानमंत्री मोदी से गुहार लगाई है। कक्षा चार में पढ़ने वाली साक्षी रावत सेना में अफसर बनना चाहती है। वह भी चाहती है कि लड़कों की तरह उसे भी सैनिक स्कूल में प्रवेश करने वाली परीक्षा में बैठने का मौका मिले। अपनी इस आंकाक्षा को साकार करने के लिए उसने देश के प्रधानमंत्री एवं रक्षा मंत्री को चिठ्ठी लिखी है।

ऊखीमठ के हुड्डू गांव निवासी साक्षी रावत अगस्त्यमुनि के एक अशासकीय विद्यालय में कक्षा चार में पढ़ती है। उसका गांव भी पहाड़ के अन्य गांवों की भांति सैनिक बाहुल्य गांव है। गांव के वीर सैनिकों को देखते हुए उसके मन में भी सेना में जाने की इच्छा जागी, लेकिन छोटी उम्र के कारण उसका यह सपना सच होने में देर है सोच कर चुप्पी साध ली। तभी उसके साथ पढ़ने वाले कई लड़कों ने सैनिक स्कूल के फार्म भरने लगे तो उसे लगा कि अपने सपने को सच में बदलने का अच्छा अवसर है, मगर सैनिक स्कूल में लड़कियों को प्रवेश नहीं मिलने से वह मायूस हो गई।

अपने पिता से उसने कई बार कहा लेकिन वह भी क्या कर सकते थे। आखिर थकहार कर उसने सीधे प्रधानमंत्री एवं रक्षामंत्री को चिठ्ठी लिखकर बेटियों के लिए सैनिक स्कूल के दरवाजे खोलने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री को लिखी चिट्टी में साक्षी ने कहा कि निवेदन है कि मैं उत्तराखण्ड के पहाड़ी जिले रुद्रप्रयाग के हुड्डू गांव की रहने वाली हूँ।

मेरा गांव केदारनाथ क्षेत्र के ऊखीमठ ब्लॉक में पड़ता है। वर्तमान में मेरे गांव में 70 फौजी हैं जो देश की सीमाओं की रात दिन रक्षा करते हैं। मैं भी बड़ी होकर उनकी तरह फौजी बनना चाहती हँू। जिसके लिए मैं सैनिक स्कूल में पढ़ना चाहती हँू। वहां से पढ़ने वाले बच्चे अच्छे फौजी बनते हैं लेकिन वहां हम बेटियों को प्रवेश नहीं मिलता है।

मैं आपको इस आशा से पत्र लिख रही हँू कि हम पहाड़ की बेटियां उन वीर सैनिकों की बेटियां हैं जो रात दिन सीमा पर लड़ते हैं और सारे देश की रक्षा करते हैं। मैं जब भी गांव में फौजी वर्दी को देखती हँू तो स्वयं को फौजी बनने की सोचती हँू। हमारे पहाड़ के हर गांव में बफौजी हैं लेकिन फौज की शिखा प्राप्त करने के कोई साधन नहीं हैं।

एक सैनिक स्कूल घोड़ाखाल में और एक हमारे रूद्रप्रयाग में खुलने जा रहा है। लेकिन उनमें बेटियों के लिए प्रवेश नहीं हैं इसलिए आप इन स्कूलों में हम बेटियों को प्रवेश दिलाने की कृपा करेंगे।

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