जिंदगी और मौत से जुड़े फैसले भी ले सकेंगी ड्राइवरलेस कारें

लंदन। सेल्फ ड्राइविंग कारें जल्द ही इंसानों की तरह खुद ही जि़न्दगी और मौत से जुड़े फैसले भी ले सकेंगी। वैज्ञानिकों ने पहली बार नैतिकता का मैथमेटिकल मॉडल तैयार किया है जो भविष्य में रोबॉट्स पर अप्लाई किया जा सकेगा।

 

इस मॉडल में एक सामान्य फॉर्म्युला इस्तेमाल हुआ है जिसमें जीवित वस्तुओं के जीवन की कीमत या सर्वाइवल पर आधारित एक वरायटी उपलब्ध है। इससे गाडिय़ां यह तय करने में सक्षम होंगी कि उन्हें ऐक्सिडेंट होने जैसी स्थिति में जानवरों या निर्जीव चीज़ों के बजाय ड्राइवर और राहगीरों, खासकर बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देनी है।

 

अब तक ऐसा माना जाता था कि ये निर्णय संदर्भ पर आधारित होते हैं और ऐलगरिथम में इन्हें नहीं कहा जा सकता। जर्मनी की यूनिवर्सिटी ऑफ ओसनाब्रक के लियॉन सटफेल्ड ने कहा, हमें इसके ठीक उल्टा मिला। विपदा की स्थिति में मानव व्यवहार का सीधा-सा फॉर्म्युला होता है जो वैल्यू ऑफ लाइफ पर आधारित होता है। इसका मतलब है कि मानव के नैतिक व्यवहार को ऐलगरिथम से डिस्क्राइब किया जा सकता है।

 

रिसर्चर इमर्सिव वर्चुअल रिऐलिटी नाम की एक तकनीक का इस्तेमाल करते हैं जिसमें वॉलंटियर्स को तस्वीरों और आवाजों से घेरकर रोड ट्रैफिक जैसी स्थिति बना दी गई। उसके बाद उनसे एक धुंध भरे दिन में कार चलाने के लिए कहा गया और उनके सामने नकली चीज़ों, जानवरों और इंसानों को लाकर ऐक्सिडेंट जैसी स्थितियां बनाई गईं। इसके बाद निकले आंकड़ों से परिणाम निकाले गए।

 

उन्होंने पाया कि निश्चित ऐक्सिडेंट्स की स्थिति में वैल्यू ऑफ लाइफ के आधार पर लिए गए नैतिक फैसलों का विवरण दिया जाना संभव है। यूनिवर्सिटी ऑफ ओसनाब्रक, जर्मनी के गॉर्डन पीपा ने कहा कि इस स्टडी में सामने आई चीज़ों का सेल्फ ड्राइविंग कारों के व्यवहार पर गहरा प्रभाव होगा।

 

उन्होंने कहा, हमें यह समझना होगा कि ऑटोनोमस सिस्टम्स को नैतिक फैसले लेने चाहिएं या नहीं। अगर हां, तो उनका व्यवहार मानव के नैतिक व्यवहारों पर निर्भर होना चाहिए या नैतिक थिअरी पर और सबसे महत्पूर्ण कि अगर कुछ गलत हो जाए, तो इसकी जिम्मेदारी किसपर होनी चाहिए।

टीम ने चेतावनी दी है कि अब हम उस दौर में हैं जब हमें साफ नियम बनाने होंगे, वरना मशीनें बिना हमारे खुद फैसले लेने लगेंगी।

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