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जिला स्तर पर एग्रो-बिजनेस कंसोर्टियम बनाए जाएं: राज्यपाल

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देहरादून। राज्यपाल डॉ. कृष्ण कांत पाल ने किसानों को खेती संबंधी तमाम जानकारियां उपलब्ध करवाने के लिए जिला स्तर पर एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम बनाए जाने पर बल दिया है।

उन्होंने कहा कि कृषि विशेषज्ञों को खेती के नए तौर तरीकों व तकनीक के प्रति किसानों में विश्वास जगाना होगा। किसान नए तरीके की खेती को तभी अपनाएंगे जब उन्हें विश्वास हो जाए कि इससे उन्हें लाभ होगा। राज्यपाल एक स्थानीय होटल में एसोचैम द्वारा खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार व भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के सहयोग से ‘‘खाद्य प्रसंस्करण व किसान सम्पदा योजना’’ विषय पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि किसान खेती कर सकता है परंतु वह अपने उत्पादों के व्यवसाय में पीछे रह जाता है जिससे उसे समुचित कीमत नहीं मिल पाती है। खेती को सुव्यवस्थित व्यवसाय की शक्ल देने व खेती को लाभकारी बनाने के लिए एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम स्थापित किए जाने की आवश्यकता है। इसलिए जिला स्तर पर ‘‘एग्रो बिजनेस कंसोर्टियम’’ बनाए जाएं जहां किसानों को मार्केटिंग से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी मिल सके।

राज्यपाल ने उदाहरण देते हुए कहा कि बल्गेरियन गुलाब बहुत महंगा होता है। देश में इसकी काफी मांग है और इसे बाहर से आयात किया जा रहा है। उत्तराखण्ड के मुन्स्यारी में इसकी खेती के लिए परिस्थितियां काफी अनुकूल हैं। कुछ लोग इसे कर भी रहे हैं। परंतु मार्केट की पूरी जानकारी न होने के कारण इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है।

राज्यपाल ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का संकल्प किया गया है। किसानों की आय बढ़ाने के लिए खेती के तमाम पहलुओं पर काम करना होगा। खेती के उत्पादन को बढ़ाने के साथ ही कृषिगत उत्पाद के प्रसंस्करण, एरोमेटिक, हॉर्टीकल्चर व कृषि से प्रत्यक्ष व परोक्ष तौर पर जुड़ी अन्य गतिविधियों पर भी ध्यान देना होगा।

राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में प्रत्येक जिले में मिट्टी की अपनी विशेषता है। जी.बी.पंत विवि ने जिलावार रिपोर्ट तैयार की है जिसमें कि यह देखा गया है कि किस जिले में क्या फसलें लगाई जाएं ताकि वहां के किसानों को अधिकतम लाभ हो। कृषि को प्रोत्साहित करने के लिए विशेषज्ञों के अनुसंधान व योजनाओं का लाभ किसानों तक पहुंचाना सुनिश्चित करना होगा।

किसानों की समस्याओं को दूर करने पर फोकस करना चाहिए तभी किसान जमीन से जुड़े रहेंगे। दुर्गम क्षेत्रों में कृषि संबंधी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना होगा। पर्वतीय खेती के लिए स्टोरेज, सप्लाई-चैन, खाद्य प्रसंस्करण आदि सुविधाएं उपलब्ध करवानी होंगी।

कृषि व उद्यान मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में पलायन को रोकना है तो कृषि पर फोकस करना होगा। कृषिगत उत्पादों के मूल्यवर्धन के लिए फूड प्रोसेसिंग महत्वपूर्ण है। राज्य में कृषि के विकास के लिए भारत सरकार से पूरा सहयोग मिल रहा है। उद्यानिकी विकास के लिए 700 करोड़ रूपए की योजना को स्वीकृति मिली है।

पिछले 17 वर्षों में राज्य को कृषि क्षेत्र में उतनी सहायता नहीं मिली जितनी इस बार मिली है। कृषि मंत्री ने कहा कि राज्य में पोस्ट-हार्वेस्टिंग नुकसान काफी ज्यादा है। इसलिए खाद्य प्रसंस्करण को अपनाना होगा ताकि हमारे दूसरे, तीसरे व चैथे ग्रेड के फलों का भी उपयोग हो सकें। राज्य के प्रमुख मंदिरों में फूलों की मांग बहुत अधिक है।

चमोली जिले में राज्य सरकार फूलों की खेती को प्रोत्साहित कर रही है। राज्य में स्वरोजगार के लिए हॉर्टीकल्चर सर्वोत्तम विकल्प है। कार्यक्रम में निदेशक आई.सी.ए.आर. डॉ. पी.के.मिश्रा, एसोचैम के चेतन विज सहित कृषि वैज्ञानिक, किसान आदि उपस्थित थे।

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