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जनता दरबार में बेरोजगार फरियादियों ने मांगा रोजगार !

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रुद्रप्रयाग। पुराने विकास भवन में जिलाधिकारी मंगेश घिल्डि़याल की अध्यक्षता में आयोजित जनता दरबार व तहसील दिवस में फरियादियों ने 12 शिकायतें दर्ज कराई, जिसमें सात शिकायतों का मौके पर निस्तारण किया गया।

 

इस अवसर पर जिलाधिकारी ने तय समय सीमा के भीतर अधिकारियों को शिकायतांे का निस्तारण करने के साथ ही यात्रा व्यवस्थाओं मे दी गई जिम्मेदारियों का निर्वहन बखूबी करने के निर्देश दिए। कहा कि अधिकारी क्षेत्र भ्रमण कर व्यवस्थाओं का जायजा लें और रिपोर्ट जिला कार्यालय को प्रेषित करें।

 

इस अवसर पर ग्रामीण प्रेम सिंह ने बताया कि उसके आजीविका के साधन एक मात्र घोडा था, जिसकी मत्यु हो जाने पर वह बेरोजगार हो गया है। प्रार्थी द्वारा घोडे का बीमा नहीं कराया गया था जिससे आर्थिक नुकसान होने पर आर्थिक सहायता दिलाने, नारायण कोटी निवासी चम्पा देवी ने केदारनाथ मार्ग पर टेंट लगाने की अनुमति के संबंध में जिससे रोजगार प्राप्त हो सके, ग्राम नाला निवासी नीमा देवी के पति जो कि चालक थे की दुर्घटना में मत्यु हो जाने पर गाडी मालिक से मुआवजा दिलाने के संबंध में, पीआरडी सेवा से हटायी गई समस्त पीआरडी महिला जवानो ने पुन नियुक्ति दिलाने के संबंध में षिकायत दर्ज कराई।

 

इस अवसर पर एसीएमओ डॉ ओपी आर्य ने अधिकारियों को राष्ट्रीय सुरक्षा मिशन के बारे में जानकारी दी जिससे सभी लक्षित परिवारों को विभागों के सहयोग से कवर किया जा सके। इस योजना के अन्तर्गत प्रति वर्ष प्रति परिवार को पांच लाख रूपये के लाभ की सुविधा दी जाएगी। ये परिवार एसईसीसी डाटा बेस पर आधारित गरीब और कमजोर आबादी के होंगे।

 

इस अवसर पर डीएफओ मंयक शेखर, अपर जिलाधिकारी गिरिश गुणवन्त, एसडीएम सदर देवानंद, सीओ श्रीधर बडोला, पीडी एनएस रावत, सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

 

 

जीवीके कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश
विकासखंड जखोली की ग्राम पंचायत पपड़ासू में गंभीर पेयजल संकट के लिए जिम्मेदारी श्रीनगर जल विद्युत परियोजना पर निर्माण कर रही कंपनी के खिलाफ जिलाधिकारी ने मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए हैं। इस संबंध में ग्राम प्रधान शशि देवी ने जिलाधिकारी को एक शिकायती पत्र सौंपा।

 

दरअसल, ग्राम पंचायत पपड़ासू में द्यूल सेरा पेयजल स्रोत से पानी की सप्लाई होती है। इस योजना का रख-रखाव जल संस्थान के अधीन है। श्रीनगर जल विद्युत परियोजना निर्माण से अलकनंदा में बनी झील के कारण वर्ष 2013 से पेयजल योजना बार-बार क्षतिग्रस्त है। तब से ग्रामीण बारिश या फिर अलकनंदा का दूषित पानी पीने को मजबूर हैं।

 

स्थिति यह है कि पेयजल योजना तक पहुंचने का मार्ग भी पानी में डूब गया है। ऐसे में ग्रामीणों को अपनी जान जोखिम में डालकर नदी पार कर पेयजल योजना दुरूस्त करनी पड़ती है। कुछ दिन योजना पर पानी चलने के बाद फिर योजना क्षतिग्रस्त हो जाती है।

 

ग्राम प्रधान शशि देवी ने जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल को गांव की समस्या से अवगत कराते हुए कहा कि गांव में पानी का गंभीर संकट है। क्षतिग्रस्त योजना को ठीक करने के लिए गांव के युवाओं को जान हथेली पर रखकर नदी में कूदना पड़ रहा है। भविष्य में किसी के साथ अनहोनी होती है तो इसके लिए जीवीके कंपनी और जिला प्रशासन जिम्मेदार होगा।

 

उन्होंने कहा कि जीवीके कंपनी हर बार आश्वासन देती है कि कंपनी योजना का निर्माण करेगी, लेकिन आज तक किसी स्तर पर कार्यवाही नहीं हुई।

 

इस पर जिलाधिकारी मंगेश घिल्डियाल ने पुलिस उपाधीक्षक श्रीधर प्रसाद बुडोला को कंपनी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के आदेश दिए। डीएम ने कहा कि परियोजना निर्माण से गांव की पेयजल योजना को नुकसान पहंुचा है। इसकी भरपाई भी कंपनी को करनी होगी।

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