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जाली नोटों का नया हब बना बांग्लादेश, भारत में भेज रहा खेप

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नई दिल्ली। पिछले साल नवंबर में केंद्र सरकार ने नोटबंदी के जरिये पांच सौ और हजार के पुराने करेंसी नोट को बंद कर दिया था। इससे सरकार को जाली करेंसी रोकने में कुछ हद तक मदद भी मिली है। खासतौर पर पाकिस्तान में मौजूद फर्जी नोट छापने वाली फैक्ट्रियों पर नोटबंदी का बड़ा असर पड़ा है। मगर अब दूसरी चुनौती सामने खड़ी है।

 

पड़ोसी मुल्क बांग्लादेश अब जाली नोटों का बड़ा अड्डा बनकर उभरा है। दो हजार रुपए के जाली नोटों को बनाने और उसकी तस्करी के बड़े केंद्र के रूप में वो उभरा है। सीमा सुरक्षा बल ने पिछले दिनों बांग्लादेश सीमा से जो जाली करेंसी पकड़ी है,उस आंकड़े के आधार पर बीएसएफ ने इसका खुलासा किया है।

 

पहले पाकिस्तान और बांग्लादेश में बने जाली नोट अलग-अलग तेरह रास्तों से देश में आते थे। इसमें जम्मू, पंजाब, राजस्थान, गुजरात, पश्चिम बंगाल, असम जैसे राज्य शामिल हैं। हालांकि इसमें से 11 फ्रंटियर तो ऐसे हैं, जहां से जाली नोट आने के मामले काफी कम हुए हैं, मगर असम और पश्चिम बंगाल से देश में जाली नोट आने के मामले में इस साल जनवरी से तेजी देखी गई है।

 

इस साल के पहले 6 महीने में बीएसएफ ने 32 लाख के जाली नोट पकड़े हैं, जो पिछले साल के मुकाबले कम है। क्योंकि उस वक्त जाली नोटों का बड़ा हिस्सा हजार और पांच सौ के नोटों के जरिए देश में खपाया जाता था।आंकड़ों पर गौर करें तो साल 2015 में 2.6 करोड़ के जाली नोट गुवाहाटी और दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के रास्ते में देश में पहुंचे,

 

वहीं अगले ही साल नोटबंदी के बाद ये आंकड़ा घटकर डेढ़ करोड़ पर पहुंच गया। खुफिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक नोटबंदी के बाद से ही जाली नोट के सिंडीकेट ने इस काम के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में ज्यादा पैसा नहीं लगाया है। मगर वो एक बार फिर से वो देश में जड़ें जमाने की कोशिशों में जुट गए हैं।

 

सूत्रों की मानें तो इसके लिए जाली नोटों के सौदागर दो हजार की नई करेंसी छापने के लिए भारत सरकार द्धारा इस्तेमाल किए जा रहे पेपर की तलाश में जुटे हुए हैं। वहीं बांग्लादेश में बैठे जाली नोटों के सिंडीकेट अब मलेशिया और साउदी अरब से पेपर स्मगलिंग के जरिये इस पेपर को ला रहे हैं। क्योंकि इन देशों से आ रहा पेपर देश में छप रहे नए दो हजार के करेंसी नोट के पेपर से काफी मिलता-जुलता है।

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