पेयजल की समस्या से निपटने के लिए रणनीति तैयार करने के निर्देश

पौड़ी:  जिला कार्यालय सभागार में जिलाधिकारी सुशील कुमार की अध्यक्षता में पेयजल विभागों की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलाधिकारी ने आगामी गर्मी के माहों में पेयजल की समस्या से निपटने के लिए रणनीति तैयार करने के निर्देश पेयजल विभाग के अभियन्ताओं को दिये।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे अपने फील्ड स्टाफ समेत अवर तथा सहायक अभियन्ताओं को अवकाश कदापि न दें तथा पेयजल व्यवस्थाओं को चुस्त दुरूस्त बनाये रखने के लिए मुस्तैदी का कार्य करना सुनिश्चित करंे। समीक्षा बैठक में जिलाधिकारी ने वन अधिनियम से लंबित पेयजल योजनाओं की भी जानकारी उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये। उन्होंने पेयजल की स्थिति की जानकारी अधिकारियों से ली।
इस अवसर पर जल संस्थान पौड़ी के अभियंता द्वारा बताया गया कि मुख्यालय को 6 एमएलडी पानी की आवश्यकता है जिसके सापेक्ष वर्तमान में 4.8 एमएलडी पानी उपलब्ध हो रहा है। इनमें से 3.5 एमएलडी पानी श्रीनगर पंपिंग योजना तथा 1.5 एमएलडी पानी नानघाट योजना से प्राप्त हो रहा है। बताया गया कि अभी पेयजल की किल्लत नहीं है। किन्तु आगामी दिनों में पानी की समस्या को दूर करने के लिए संस्थान द्वारा टैंकरों की व्यवस्था की जाएगी।
उन्होंने बताया कि अभी तक नौ स्थानों से पेयजल की शिकायतें प्राप्त हुई हैं। जहां पर पेयजल की किल्लत दूर करने के लिए जल संस्थान द्वारा आवश्यक कदम उठाये जा रहे हैं। उन्होंने जिलाधिकारी को बताया कि पंपिंग योजना को अनवरत बनाये रखने के लिए विद्युत व्यवस्था सही रूप से चले ताकि लोगों को शुद्ध पेयजल प्राप्त हो सके। इस अवसर पर कोटद्वार की पेयजल की व्यवस्था की जानकारी देते हुए बताया गया कि कोटद्वार भाबर क्षेत्र में 31 ट्यूबवेल पंपिंग प्लांट के माध्यम से तथा सिंचाई विभाग के 18 ट्यूबवेल के माध्यम से भी जलापूर्ति की जा रही है। बताया गया कि जनपद में 749 हैंडपंप स्थापित हैं।
जिनमें से 33 हैंडपंप कोटद्वार क्षेत्र में लगाये गये हैं। जिलाधिकारी ने हैंडपंपों की आवश्यक मरम्मत कराये जाने के निर्देश भी अभियंताओं को दिये। उन्होंने कोटद्वार में कामर्शियल उद्देश्य से लगाये गये टुल्लू पंपों की छापामारी करने तथा अवैध कनेक्शनधारियों पर भी शिकंजा कसने के निर्देश दिये। इस अवसर पर श्रीनगर की पेयजल व्यवस्था की जानकारी लेते हुए जिलाधिकारी ने पेयजल के अभियंताओें से कहा कि वे श्रीनगर में स्थापित ट्यूबवेल के माध्यम से भी लगातार पेयजल व्यवस्था बनायें इसके अलावा लैसंडोन, यमकेश्वर, पाबौ, थलीसैंण, धुमाकोट समेत विभिन्न स्थानों पर पेयजल व्यवस्था सही बनाये रखने के निर्देश भी जिलाधिकारी द्वारा दिये गये।
इस अवसर पर श्रीकोट क्षेत्र के लिए पंपिंग योजना के पुनर्गठन किये जाने की बात अभियंताओं द्वारा प्रमुखता से उठायी गई। इस अवसर पर भैरवगढ़ी पेयजल पंपिंग योजना के संबंध में जिलाधिकारी द्वारा जानकारी प्राप्त की गई। बताया गया कि इस योजना पर गत 28 अप्रैल को एएफसी करा ली गई है तथा पुर्नआगणन तैयार कर पत्रावली शासन को भेजी गई है। जिलाधिकारी ने जल संस्थान से अभियंता से जानकारी प्राप्त की कि सतपुली में हंस फाउंडेशन द्वारा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराये जाने में सहयोग करने का दायित्व लिया गया है। उन्होंने इस चिकित्सालय को पेयजल की आपूर्ति करने के लिए ट्यूबवेल नयार नदी से लगाने के लिए आगणन बनाये जाने के भी निर्देश दिये।
जिलाधिकारी ने पेयजल विभागों के अभियंताओं से कहा कि वे विभाग की समस्त योजनाओं की जानकारी उपलब्ध करायें तथा चालू योजनाओं के पूर्ण होने की तिथि के संबंध में भी अवगत करायें। इस अवसर पर जिलाधिकारी ने स्वजल को सोलिड लिक्विड ट्रिटमेंट प्लांन नदियों के किनारे लगे कस्बों जैसे श्रीनगर, सतपुली, पाबौ आदि स्थानों में बनाये जाने के निर्देश स्वजल प्रबंधक को दिये। इसके अलावा जिलाधिकारी ने आगामी 3 मई को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक किये जाने हेतु शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया।
पेयजल महकमें की आज आयाजित इस बैठक में अधीक्षण अभियंता जल संस्थान जेएस मेवाड़, अधिशासी अभियंता जल संस्थान पीके सैनी, अधिशासी अभियंता जल निगम मिशा सिंहा, अधिशासी अभियंता श्रीनगर संदीप कश्यप, सहायक अभियंता मनीष कुमार, स्वजल परियोजना प्रबंधक आर एस चौहान ने विभागीय जानकारियांे से जिलाधिकारी को अवगत कराया। इस अवसर पर सीडीओ विजय कुमार जोगदंडे, डीडीओ वेद प्रकाश, अर्थ एवं संख्या अधिकारी निर्मल शाह, सीईओ मदन सिंह रावत, डीईओ बेसिक  केएस रावत, मुख्य कृषि अधिकारी  डा. डीएस राणा आदि उपस्थित रहे।
इसके अलावा जिलाधिकारी ने निर्माणाधीन कलक्ट्रेट भवन का निरीक्षण किया तथा लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को आवश्यक दिशा निर्देश दिेये। उन्होंने दैवी आपदा प्रबंधन केंद्र का भी निरीक्षण किया तथा वहां पर विभिन्न विभागों के संपर्क नंबरों के साथ ही आवश्यक संसाधनों के बारें में भी जानकारी प्राप्त की। जिलाधिकारी ने जिला कार्यालय में विभिन्न पटलों पर जाकर पटल सहायकों को कार्र्याे में तेजी लाने के निर्देश दिये।
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