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हिमाचल: अचानक दर्जनों चमगादड़ मरे ! निपाह वायरस का खौफ !

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शिमलाः हिमाचल: अचानक दर्जनों चमगादड़ मरे ! निपाह वायरस का खौफ ! हिमाचल में भी ऐसा ही एक मामला नाहन की पंचायत बर्मापापड़ी में सामने आया है. यह खबर अपने आप में चौकाने वाली होने के साथ-साथ खौफजदा भी है। अचानक से चमकादरों के मरने से लोग खौफ में हैं।

आपको बता दें कि केरल में निपाह वायरस से अब तक 10 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है. जबकि 15 पीड़ितों का इलाज जारी है. सरकार ने केरल के अलावा 5 अन्य राज्यों में भी निपाह को लेकर सावधानी बरतने के लिए एडवाइजरी और अलर्ट जारी किए हैं. इनमें जम्मू-कश्मीर, गोवा, राजस्थान, गुजरात और तेलंगाना शामिल हैं.
यहां बर्मापापड़ी सीनियर सेकंडरी स्कूल के प्रांगण में एक पेड़ में वर्षों से चमगादड़ रह रहे हैं, लेकिन अचानक ही दर्जनों चमगादड़ मरे हुए पाए गए.मरे चमगादड़ों के ढेर को देखते ही लोगों में सनसनी फैल गई है. इस घटना के बाद प्रशासनिक अमला मौके पर पहुंचा. मृतक चमगादड़ों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेज दिए गए हैं. इनकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद ही मौत की वजह का खुलासा हो पाएगा.अचानक हुई इन चमगादड़ों की मौत पर वन विभाग के डीसी ललित जैन का कहना है कि चमगादड़ों की मौत के बाद इस क्षेत्र में ऐसा वायरस फैल ही नहीं सकता है.
क्योंकि चमगादड़ों के मरने से किसी भी प्रकार के संक्रमण फैलने की कोई संभावना नहीं पाई गई है.लोगों को डरने की कोई आवश्यकता नहीं है. उन्होंने कहा कि एडीएम एसएस राठौर के नेतृत्व में एक टीम को मौके पर भेज दिया गया है. कहा जा रहा है कि गर्मी के कारण चमागादड़ों की मौत हुई है. उन्होंने बताया कि पशुपालन विभाग के अधिकारियों द्वारा मृत चमगादड़ों के सैंपल लिए गए, जिसे पूना और जालंधर प्रयोगशालाओं में भेजे जा रहे हैं.
विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (WHO) के मुताबिक निपाह वायरस एक ऐसा वायरस है जो जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। यह जानवरों और इंसानों दोनों में गंभीर बीमारियों की वजह बन सकता है। इस वायरस का मुख्‍य स्रोत चमगादड़ है जो फल खाते हैं। ऐसे चमगादड़ों को फ्लाइंग फोक्स के नाम से भी जाना जाता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने चेतावनी दी है कि भारत और ऑस्ट्रेलिया में निपाह वायरस के फैलने का सबसे अधिक खतरा है। केरल में मामले सामने आने के बाद देश में खतरे की घंटी बज चुकी है। यह बीमारी लाइलाज है। संक्रमण के बाद बीमारी को बढ़ने से नहीं रोका गया तो 24 से 48 घंटे में मरीज कोमा में जा सकता है और उसकी मौत हो सकती है।निपाह वायरस (NiV) के इंसानों में संक्रमण का पता चिकित्सीय जांचों द्वारा लगाया जा सकता है।
 निपाह के संक्रमण की जांच शुरुआती दौर से लेकर श्वसनतंत्र के गंभीर रूप से प्रभावित होने और जानलेवा इन्सेफेलाइटिस होने तक कराई जा सकती है।यह  संक्रमण चमगादड़ और सुअर से फैलता है। फल और सब्जी खाने वाले चमगादड़ और सुअर के जरिये निपाह वायरस तेजी से फैलता है। इसका संक्रमण जानवरों और इंसानों में एक दूसरे के बीच तेजी से फैलता है।
लक्षण ?
-धुंधला दिखना
-चक्कर आना
-सिर में लगातार दर्द रहना
-सांस में तकलीफ
-तेज बुखार
कैसे करें बचाव ?
पेड़ से गिरे हुए फल न खाएं।
जानवरों के खाए जाने के निशान हों तो ऐसी सब्जियां न खरीदें।
जहां चमगादड़ अधिक रहते हों वहां खजूर खाने से परहेज करें।
संक्रमित रोगी, जानवरों के पास न जाएं।
नहीं इसके पहले भी निपाह वायरस के प्रकोप कई मामले सामने आ चुके हैं। भारत, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, फिलीपिन्स, मलेशिया से ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं। 1998 में मलेशिया के कांपुंग सुंगई निपाह गांव के लोग पहली बार इस संक्रमण से पीड़ित हुए थे। इसलिए इसका नाम निपाह वायरस पड़ा। संक्रमित होने वाले ग्रामीण सुअर पालते थे। उसके बाद 2004 में बांग्लादेश में आया था।
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