गुजरात में स्मृति ईरानी बन सकती हैं सीएम,हिमाचल प्रदेश में विकल्प की तलाश

नई दिल्ली । गुजरात और हिमाचल में शानदार जीत के बाद अब भाजपा के सामने दोनों राज्यों में मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा तेज हो गई है। मोदी दोनों राज्यों में ऐसे चेहरों को आगे रखना चाहेंगे जो उनके 2019 के मिशन को पूरा करने में सक्षम तो हो ही साथ जनता भी उन्हें स्वीकार करे। मोदी अब कोई और जोखिम नहीं उठाना चाहेंगे। दोनों राज्यों में सीएम कौन होगा, अब माथापच्ची इसी को लेकर है।

गुजरात में भाजपा ने 182 सीटों में से 99 सीटों पर कब्जा किया है। भले ही यह आकड़ा पिछले चुनाव से कम हो लेकिन भाजपा बहुमत से सरकार बनाने को सज है। गुजरात में इस बार भाजपा विजय रुपाणी को राज्य का मुख्यमंत्री न बनाकर किसी नए चेहरे को आगे लाएगी। सूत्रों की मानें तो नए नामों में केंद्रीय मंत्री और मोदी की मुंह बोली बहन स्मृति ईरानी का नाम सबसे आगे चल रहा है। स्मृति का पक्ष इसलिए मजबूत माना जा रहा है

क्योंकि उनमें एक तो संगठन क्षमता है दूसरा वे गुजराती भाषा में भी माहिर हैं। दूसरे नंबर पर केंद्रीय सडक़ परिवहन, राजमार्ग और शिपिंग के राज्यमंत्री मनसुख मांडविया का नाम चल रहा है। मांडविया पाटीदार तो हैं ही, साथ में किसान भी हैं। उनका नाम जमीनी नेताओं में शुमार किया जाता है। तीसरा नाम वजुभाई वाला का है, यह क्षत्रिय समाज से एक मजबूत नाम है। वजुभाई फिलहाल कर्नाटक के गवर्नर हैं लेकिन संगठन के बारे में उनकी अचूक जानकारी और सौराष्ट्र में मजबूत पकड़ उन्हें राज्य में लौटा सकती है।

भाजपा ने चुनाव लडऩे की जिम्मेदारी हिमाचल में प्रेम कुमार धूमल को दी थी और उनको ही सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया था लेकिन वहां की जनता ने धूमल को पूरी तरह से नकार दिया। हिमाचल में पार्टी तो जीत गई लेकिन सेनापति हार गए। धूमल हमीरपुर की सुजानपुर सीट पर बुरी तरह से हारे। धूमल अपने ही पुराने सहयोगी और बागी बनकर कांग्रेस में पहुंचे राजिन्दर राणा से मात खा गए।

इसी हार के साथ उनका तीसरी बार सीएम बनने का सपना चकनाचूर होता दिख रहा है। धूमल की जगह पार्टी अब चेहरों को हिमाचल की कुर्सी पर बैठाने पर विचार कर रही है। पहला नाम जय राम ठाकुर का है, वे पूर्वमंत्री तो रहे ही हैं, वहीं उन्होंने हिमाचल में बतौर भाजपा अध्यक्ष भी काम किया है। ठाकुर को सोमवार ही हिमाचल के नतीजों के बाद दिल्ली से बुलावा भी मिला है। दूसरा नाम जो चर्चा में है वो है आरएसएस के प्रचारक अजय जामवाल का। जामवाल मंडी इलाके से ताल्लुक रखते हैं।

तीसरा नाम केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा का लिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी की पसंद नड्डा को पिछले दिनों काफी प्रमोट किया गया था,लेकिन ऐन वक्त पर पार्टी ने धूमल का नाम आगे कर दिया। सीएम न बनाने पर भी नड्डा अपने काम में जुटे रहे। उन्होंने राज्य में मोदी-शाह की रैली को सफल बनाने का कार्यभार संभाल रखा था और पूरा आयोजन वही देख रहे थे।

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