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गंगा प्रदूषण को नहीं मिल रही मुक्ति

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हरिद्वार । सामाजिक संस्थायें एवं स्थानीय व्यापारियों व लोगों द्वारा समय-समय पर गंगा प्रदूषण को मुक्त करने की बात कही जाती है। लेकिन धरातल पर कार्य होते हुए नजर नहीं आ रहे हैं। कनखल स्थित छोटी नहर में कूड़े के अम्बार साफ तौर पर देखे जा सकते है। आस पास के कॉलोनीवासी अपने घरों का कूड़ा सीधे छोटी नहर में डाल रहे हैं। जबकि सामाजिक संस्थाओं द्वारा गंगा प्रदूषण मुक्ति की बात कहीं जाती है। लेकिन गंगा को प्रदूषण से मुक्त नहीं किया जा रहा है। हरिद्वार के विभिन्न गंगा तटों पर लगातार कूड़ा करकट फेंका जा रहा है।

एनजीटी के आदेशों के पालन को भी दरकिनार किया जा रहा है। गंगा की सफाई में लगी संस्थायें पूर्ण रूप से कार्य करने में सक्षम नहीं है। हरिद्वार नगरी के विभिन्न क्षेत्रों से होती हुई गंगा की धारा बह रही है। जबकि रिहायशी क्षेत्रों में कूड़ा करकट मैला कुचैले पदार्थ गंगा में बेरोकटोक बहाये जा रहे है। खाने की वस्तुओं के साथ-साथ वेस्ट सामान गंगा में फेंक दिये जाते हैं। हरिद्वार के नागरिक भी गंगा के प्रति अपने उद्देश्यों की पूर्ति नहीं कर पा रहे हैं जिन कारणों से लगातार गंगा का प्रदूषण बढ़ता ही जा रहा है। स्पर्श गंगा अभियान से जुड़े शिखर पालीवाल ने कहा कि लोगों को स्वयं गंगा के प्रति जागरूक होना होगा। कूड़ा करकट पुराने कपड़े पूजा सामग्री, तेल, साबुन, पॉलीथीन, पत्तल आदि को गंगा में ना डालें। साथ ही नगर निगम को भी ठोस उपाय तलाशने होगें जबकि हमारे द्वारा बड़ी संख्या में जन जागरूक अभियान चलाये जा रहे हैं। लेकिन कहीं ना कहीं क्षेत्र के लोग ही गंगा को प्रदूषित कर रहे हैं।

लोगों को स्वयं जागरूक होकर गंगा की कमान संभालनी होगी। रिहायशी क्षेत्र में रह रहे लोगों को जागरूक होकर गंगा की स्वच्छता निर्मलता को आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि सामाजिक संस्थायें लगातार जन जागरूक अभियान चलाती है लेकिन लोग कुछ ही समय में गंगा के प्रति अपनी आस्था को भी दरकिनार कर देते हैं जबकि नगर निगम द्वारा गंगा किनारे बस रहे लोगों को जागरूक करना चाहिये साथ ही भारी संख्या में कूड़े के डिब्बे कॉलोनीयों में लगाये जाने की आवश्यकता है। क्योंकि कूड़ा करकट फैलाने में स्थानीय लोगों की भी भूमिका बनी रहती है।

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