udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news गैरसैंण : अपना वेतन बढ़ाया, जनता जाए भाड़ में !

गैरसैंण : अपना वेतन बढ़ाया, जनता जाए भाड़ में !

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अनिल डुंगरियाल
गैरसैंण। लम्बा चौड़ा तामझाम और दौड़ती गाडियों का काफिला, चार दिन की चांदनी और फिर अंधेरी रात जी हां हम बात कर रहे हैं भराडीसैंण में आयोजित विधानसभा का बजट सत्र की। सत्र समाप्त हो गया और एक बार फिर से सुर्खियों में आया गैरसैंण गैर हो गया। यदि बात करें पूरे सत्र की तो सरकारी काम काज के हिसाब से अब्बल रहा लेकिन जन मुद्दों पर फिसड्डी कहा जायेगा। सदन में अल्पसूचित, तारांकित, अतारांकित, विचाराधीन और अस्वीकार कुल 1081 प्रश्नों में से सरकार ने 351 के ही जबाब दिए।

राज्यपाल के अभिभाषण से 20 मार्च को शुरु हुये पूरे सत्र में 12 विधेयक पारित हुआ। 26 मार्च को सदन अनिश्चित काल के लिए स्थगित हो गया। सरकारी काम के लिए सरकार अपनी पीठ कितनी ही ठोकने वाली सरकार ने जनता के मुद्दों पर बहस करन भी उचित नहीं समझा। राज्य की जनता की तमाम समस्याओं और जन सरोकारों के मामले में सरकार कहीं भी संवेदनशील नहीं दिखाई दी। जिस तरह से 20 मार्च को गैरसैंण राजधानी की मांग को लेकर गैरसैण राजधानी संघर्ष समिति, यूकेडी , उपपा, सीपीएम व उत्तराखंड चिन्हित आन्दोलनकारी समिति सहित कई आन्दोलनकारी संगठनों के विधानसभा घेराव के कार्यक्रम को रोक पाने में सरकार व पसीने छूट गये और आन्दोलनकारियों का दबाव इतना था कि कोराली के तीन बैरीकेट पार कर गये।

इसके साथ ही गैरसैंण राजधानी के आन्दोलन को लगातार 111 दिन होने के बावजूद सरकार गैरसैंण राजधानी के मुद्दे पर चुप्पी साधे रही, यहां तक परवाडी गाँव जहाँ की जमीन पर विधानसभा का निर्माण हुआ है उस गांव की महिलाओं ने 20 मार्च को स्थाई राजधानी के लिए गिरफ्तारी दी तो 21 मार्च को सडक, विधानसभा निर्माण से प्रदूषित हुए पेय जल स्रोतों को बचाने और विधानसभा में होने वाली नियुक्तियों में ग्राम वासियों को प्राथमिकता देने की मांग पर धरने पर बैठी महिलाओं को पुलिस ने तो घेरे रखा लेकिन सरकार उनकी मांगों पर कान नहीं दे रही। पहाड़ों की शिक्षा और चिकित्सा को पटरी पर लाने के प्रयास कहीं दिखे नहीं।

रोजगार कार्यालय में 7 लाख से अधिक बेरोजगारों के पंजीयन के बावजूद सरकार पिछले 4 सालों में 16 हजार लोगों को रोजगार दे पायी है जिसमें रोजगार मेलों के द्वारा निजी क्षेत्र का रोजगार शामिल है। इसके साथ ही पानी, बिजली और आम आदमी की मूलभूत सविधाओं के सवाल पर भी सरकार की चुप्पी काफी सोचनीय है।

विपक्ष ने गैरसैंण राजधानी सहित दूसरे मुद्दों को उठाने का प्रयास किया लेकिन संख्या बल का दबाव देखा गया। जन मुद्दों पर यह संख्या बल का असर हो लेकिन शनिवार 24 मार्च को सदन में पक्ष विपक्ष के बीच जो धक्का मुक्की हुई वह किसी भी रुप में शोभनीय नहीं है। लगभग दो हजार के पुलिस बल और हजारों में कर्मचारी अधिकारियों की भीड स्थानीय जनता की असुविधा का कारण बनती है। सैंकडों की संख्या में आये वाहन अव्यवस्था के परिचायक रहे। स्थानीय लोगों के लिए यहां कुछ दिन कैद सी हो जाती है।

जो असुविधा बजट के नाम पर की जाने वाली पिकनिक से होती है वह स्थानीय लेागों से अधिक कोई नहीं बता सकता है। इस बात में कोई दो राय नहीें है कि विधानसभा के पिछले संकल्प बजट सत्र केगैरसैंण में होने की पूर्ति के अलावा विधायकों का वेतन बढाने की स्वपूर्ति के अलावा सत्र ने जनता को निराश किया है।

साभार- आरएनएस न्यूज सर्विस

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