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दुनिया का सबसे खौफनाक मच्छर,यह नहीं चूसता खून !

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बीजिंग: चीन के सिचुआन प्रांत में एक चीनी कीटवैज्ञानिक ने खौफनाक दिखने वाले एक विशालकाय मच्छर की खोज की है जिसके पंखों का फैलाव सवा 11 सेंटीमीटर या तकरीबन 4.4 इंच है। चीन की सरकारी मीजिया शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक यह मच्छर पिछले साल अगस्त में पाया गया था।

 

 

सरकारी चीनी संवाद समिति शिन्हुआ की एक रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम चीन के कीट संग्रहालय (इंसेक्ट म्यूजियम ऑफ वेस्ट चाइना) के क्यूरेटर झाओ ली ने बताया कि इसका संबंध दुनिया की सबसे लंबी मच्छर प्रजाति ‘ होलोरूसिया मिकादो’ से है। ली ने पिछले साल अगस्त में चेंगदू में माउंट किं्वगचेंग के फील्ड दौरे के दौरान इसका पता लगाया।

 

ली ने बताया, ‘‘ये मच्छर खौफनाक दिखते हैं, लेकिन ये खून नहीं चूसते। वयस्क मच्छर का जीवन काल केवल कुछ दिनों का होता है और यह मुख्य रूप से पराग का सेवन कर जीते हैं। दुनिया में दसियों हजार प्रकार के मच्छर हैं। महज 100 प्रजाति खून पर पलते हैं और मानवों के लिए समस्या हैं।’’

 

होलोरूसिया मिकादो सिचुआन के पश्चिमी हिस्सों में, मुख्यत:चेंगदू के मैदानी इलाकों में और 2200 मीटर से नीचे पर्वतीय इलाकों में मिलते हैं। उन्हें क्रेन फ्लाई के तौर पर भी जाना जाता है। ली ने बताया, ‘‘अपने विशाल शरीर के चलते वे उडऩे में कमजोर हैं। जब वे उड़ते हैं तो लगता है कि कुलांचे मार रहे हैं।

 

वे ज्यादातर उन इलाकों में पाए जाते हैं जहां पेड़ – पौधों की बहुतायत होती है। ’’मच्छर की सबसे बड़ी प्रजाति चीन के सिचुआन प्रांत मे पाया गया है अब इसके ऊपर रिचर्स करके दुनिया को बताया जाये यह इंशान के लिए नुकसान देह तो साबित नही होगा |

 

न्यूज एजेंस की रिपोर्ट के मुताबिक पश्चिम चीन के कीट संग्रहालय के क्यूरेटर चाओ ली ने बताया कि यह मच्छर दुनिया की सबसे लंबी मच्छर प्रजाति ‘हालोरूसिया मिकादो’ से है। सबसे पहले इस प्रजाति को जापान में पाया गया था। शोधकर्ताओं के मुताबिक सामान्यतः इस प्रजाति के मच्छरों के पंखों का फैलाव 8 सेंटीमीटर तक होता है लेकिन यह नया मच्छर वास्तव में बहुत बड़ा है।

 

क्यूरेटर चाओ ली ने बताया, ये मच्छर भले ही खौफनाक दिखते हों लेकिन इंसान का खून नहीं चूसते। इस प्रजाति के अडल्ट मच्छरों की उम्र कुछ दिनों की होती है और इनका आहार फूलों का परागकण होता है। ली के मुताबिक दुनिया में मच्छरों की हजारों प्रजातियों हैं लेकिन इनमें से महज 100 ही ऐसी होंगी जो इंसानों के लिए समस्या की वजह हों।

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