दो साल से छोटे बच्चे की रीढ़ की सफल सर्जरी,देश में पहला मामला 

नयी दिल्ली। राजधानी के एक अस्पताल में एक साल नौ महीने के बच्चे की रीढ़ की हड्डी का सफल ऑपरेशन किया गया है और डॉक्टरों का दावा है कि टीबी के संक्रमण की वजह से रीढ़ की हड्डी में आई विकृति को समाप्त करने के लिए इतने छोटे बच्चे की सर्जरी का भारत में यह पहला मामला है।

वसंत कुंज स्थित इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के डॉक्टरों ने इस सर्जरी में स्पाइनल डिफोर्मिटी करेक्शन करके कई चुनौतियों के बावजूद रीढ़ की हड्डी की वक्रता को 110 अंश से 40 अंश तक कम करने में सफलता हासिल की।

 

इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर में स्पाइनल सर्जरी विशेषग्य डॉ गुरुराज संगोनदीमथ ने आज यहां बताया कि अप्रैल में जब बच्चा उनके पास आया तो उसके पैरों में कमजोरी की वजह से वह ठीक से चल नहीं सकता था और दर्द से पीडि़त था। बच्चे को क्यूफोटिक विकृति थी जिसमें झाुकाव की वजह से रीढ़ की हड्डी बाहर की ओर होने लगी थी।

 

उन्होंने बताया कि समर नाम का यह बच्चा इस विकृति के साथ ही रीढ़ की टीबी से भी पीडि़त था। एमआरआई में पता चला कि टीबी की वजह से हड्डियों को नुकसान हुआ था।

 

उन्होंने कहा कि स्थिति चुनौतीपूर्ण थी क्योंकि इतने छोटे बच्चे की इस तरह की पहले कोई सर्जरी नहीं की गयी। उसकी हड्डियों को जोडऩे के लिए इतने छोटे स्क्रू लगाना भी चुनौतीपूर्ण था।

 

समर अब पूरी तरह स्वस्थ है। अभी कुछ साल तक उस पर नियमित निगरानी रखनी होगी और हड्डियों के जुड़ जाने तक उसे डॉक्टरों के संपर्क में रहना होगा।डॉ गुरुराज ने बताया कि बच्चे का टीबी का इलाज अलग से चल रहा है जिससे उसका संक्रमण समाप्त हो जाएगा।

 

इंडियन स्पाइनल इंजरीज सेंटर के चिकित्सा निदेशक डॉ एच एस छाबड़ा ने बताया कि बच्चे की उम्र कम होने के बावजूद सर्जरी के लिए इंतजार नहीं किया जा सकता था क्योंकि देर होने पर उसके पैर पूरी तरह कमजोर हो सकते थे।

 

उन्होंने यह भी कहा कि अगर इस तरह के मामलों में जहां टीबी की वजह से हड्डी में विकृति हो रही है और समय पर टीबी के संक्रमण का पता चल जाए तो सर्जरी की भी जरूरत नहीं पड़ती और टीबी का उपचार करके इस डिफॉर्मिटी को खत्म किया जा सकता है लेकिन मौजूदा मामले में रीढ़ की हड्डी प्रभावित हो चुकी थी और उसमें वक्रता आ गयी थी।