धीरे-धीरे संभल रहा है अगस्त्यमुनि शहर ,दंगाईयों ने किया दस लाख का नुकसान

रुद्रप्रयाग। शुक्रवार को हुए बबाल के बाद अगस्त्यमुनि शहर धीरे-धीरे संभलने लगा है। बाजार मंें जहां सामान्य दिनों की तरह चहल पहल नजर आ रही है, वहीं दूसरे समुदाय के व्यापारी भी अपने अपने प्रतिष्ठानों में हुए नुकसान का जायजा ले रहे हैं। सब्जी विक्रेताओं ने भी आधे अधूरे ढंग से सब्जियां लगानी शुरू कर दी है।

 

हालांकि अभी नीचे से सब्जियों की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। स्थानीय सब्जी विक्रेता किसी तरह से सब्जी की आपूर्ति कर रहे है। पूरे बाजार में जगह जगह पुलिस डेरा डाले हुए है। विशेषकर दूसरे समुदाय के व्यापारिक प्रतिष्ठानों के सामने पुलिस किसी भी अनहोनी को रोकने के लिए सचेत है।

यहां बबाल थमने के तीसरे दिन सबकुछ सामान्य नजर आ रहा है। बाजार में सबकुछ तो मिल रहा है, लेकिन सबसे अधिक कमी सब्जियों की हो रही है। असल में सब्जी व्यवसाय पर इसी सुमदाय का लगभग कब्जा है। नीचे से सब्जी लाने वाले भी यही लोग हैं। ऐसे में सब्जी की इक्का दुक्का दुकान ही खुली नजर आ रहीं हैं। वह भी स्थानीय लोगों की।

वे लोग भी सब्जी श्रीनगर या अन्य बाजारों से लाकर बेच रहे हैं। वहीं दूसरे समुदाय के सब्जी विक्रेता भी अपने ठीये को सुधारने का प्रयास करने लगे हैं। एक दो दिनों में वे फिर से सब्जी बेचने लग जायेंगे। जिससे सब्जी की कमी नहीं होगी। वहीं कुछ व्यवसायी जिनका इस बबाल में नुकसान हुआ है।

वे नुकसान का जायजा ले रहे हैं। गारमेण्ट विक्रेता वासिद ने अपने परिवार के साथ दुकान में हुए नुकसान का जायजा लेते हुए आंसुओ पर काबू रखते हुए बताया कि सब कुछ तबाह हो गया। कुछ भी नहीं बचा है। लगभग दस लाख से अधिक का नुकसान हुआ है। अब किस तरह से जी सकेगे कहा नहीं जा सकता हैं वहीं सब्जी बिक्रेता इकबाल ने बताया कि काफी नुकसान हुआ है।

 

उनकी दुकान दंगाइयों ने पूरी तरह से नष्ट कर दी थी। वह किसी तरह से अपनी सब्जी की दुकान को फिर से खड़ा करने की जुगत कर रहा है। वहीं कई व्यवसायी तो अभी नजर भी नहीं आये। हार्ड वेयर आदि विक्रेता भी अपने प्रतिष्ठानों को खोले हुए हैं। और हमेशा की तरह वहां खरीदारी हो रही है। जिसमें स्थानीय ग्राहक ही अधिक हैं।

 

जगह जगह पुलिस की मौजूदगी ने प्रभावित समुदाय के लोगों में सुरक्षा का भाव जगाया है।। और वे बेखौफ अपने प्रतिष्ठानों को खोले हुए हैं या खोलकर हुए नुकसान का जायजा ले रहे हैं। इस पूरे बबाल में दंगाइयों ने केवल बाहरी लोगों को ही निशाना बनाया। स्थानीय निवासियों की दुकानों को कहीं कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया।

 

यहां तक कि जब उग्र भीड़ बेड़ूबगड़ स्थित दूसरे समुदाय की बस्ती में पहंुची तो वहां भी केवल बाहरी फेरीवालों को ही निशाना बनाया गया। फिर भी कहा जा सकता है कि दूसरे समुदाय के वासिन्दे अपने गमों को भुलाकर फिर से जीवन के संघर्ष में उठ खड़े होने का प्रयास नये सिरे से करने लगे हैं।

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