देशभर के पुलिस अधिकारी डटे पुलिस अकादमी में

देहरादून । उत्तराखण्ड में बात जीरो टॉलरेंस की हो रही है लेकिन हरियाणा व दिल्ली के एम्स में भ्रष्टाचार के सैकडों मामलों को बेनकाब करने वाले उत्तराखण्ड आईएफएस अफसर संजीव चतुर्वेदी को सरकार ने हल्द्वानी में वन अनुसंधान केन्द्र के सरकारी ंिपजरे में ही कैद करके रख दिया है?

 

हैरानी वाली बात है कि जिस आईएफएस अफसर से भ्रष्ट सफेदपोश व अफसर कांपते हों उन्हें उत्तराखण्ड में भ्रष्टाचारियों पर नकेल लगाने के लिए सरकार आगे क्यों नहीं लाना चाहती यह हैरान करने वाली बात है?

 

गजब बात तो यह है कि जिस संजीव चतुर्वेदी को उत्तराखण्ड सरकार कोई काम नहीं देना चाहती उस अफसर को देश की सबसे बडी पुलिस अकादमी में देशभर के पुलिस अफसरों को भ्रष्टाचार से जंग लडने का पाठ पढाने के लिए उन्हें मंच पर बुलाया गया तो उन्होंने अफसरों को गुर सिखाये कि कैसे भ्रष्ट अफसरों पर नकेल लगाई जाये।

 

और बताया कि उन्होंने अपने कार्यकाल में अब तक क्या-क्या काम किये और काम के दौरान उन्हें किस तरह से मंत्रियों, अफसरों से जंग लडनी पडी और किस तरह वह न्यायालय व उसके बाहर अपनी लडाई लडते आ रहे हैं।

 

हैदराबाद पुलिस अकादमी में संजीव चतुर्वेदी को जो सम्मान भारत सरकार द्वारा दिया गया उससे उत्तराखण्ड का नाम भी रोशन हुआ है और यह बात भी उठ रही है कि आखिरकार जिस राज्य में भ्रष्टाचार व घोटाले चरम पर हों वहां अगर संजीव चतुर्वेदी जैसा अफसर मौजूद है तो उन्हें भ्रष्टाचारियों के खिलाफ लडी जाने वाली जंग में उतारने से सरकार क्यों डरी हुई है?

 

उल्लेखनीय है कि पूर्व सरकार के कार्यकाल में दिल्ली एम्स से आईएफएस संजीव चतुर्वेदी को उत्तराखण्ड काडर भेजा गया तो पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने उन्हें विजिलेंस व कोई भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देने से अपने कदम पीछे रखे और उन्हें हल्द्वानी में वन अनुसंधान में तैनात कर दिया गया।

 

छह माह से उत्तराखण्ड में त्रिवेन्द्र सरकार आसीन है और वह भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस का दम भर रही है लेकिन इस सरकार ने भी भ्रष्टाचार के खिलाफ बडी लडाई लडने वाले संजीव चतुर्वेदी को विजिलेंस व कोई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं सौंपी जिसके चलते राज्य में सवाल खडे हो रहे हैं कि आखिरकार संजीव चतुर्वेदी जैसे अफसरों को सरकार अपनी टीम में शामिल क्यों नहीं कर रही जो कि भ्रष्टाचार को जड से उखाडने का बूता रखते हैं।

 

बता दें कि संजीव चतुर्वेदी ने हरियाणा में आईएफएस तैनात रहते हुए वन विभाग में सैकडों भ्रष्टाचार के मामले उजागर कर सरकार के सामने एक बडा संकट खडा किया था उसके बाद उन्हें दिल्ली के एम्स अस्पताल में भेजा गया और संजीव चतुर्वेदी के लिए अलग से चीफ विजिलेंस अफसर की पोस्ट बनानी पडी।

 

संजीव चतुर्वेदी ने एम्स में भ्रष्टाचार के बडे-बडे मामलों को जब उजागर किया तो उससे स्वास्थ्य महकमें से जुडे नेताओं व डाक्टरों मे भूचाल मच गया था। इसके बाद उन्हें उत्तराखण्ड भेज दिया गया और कितनी अजीब बात है कि जिस संजीव चतुर्वेदी का लाभ त्रिवेन्द्र सरकार उठाने से गूरेज कर रही है

 

उस अफसर को भारत सरकार ने हैदराबाद बल्लभ भाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में नौ से ग्यारह अक्टूबर तक चले विजिलेंस व भ्रष्टाचार के सेमिनार में अफसरों को लैक्चर देने के लिए आमंत्रित किया। संजीव चतुर्वेदी ने भ्रष्टाचार को किस तरह से मिटाने के लिए काम किया इसके गुर उन्होंने अफसरों को सिखाये।