udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news चीन बना रहा दुनिया की सबसे लंबी सुरंग ! होगी 1000 km लंबी !

चीन बना रहा दुनिया की सबसे लंबी सुरंग ! होगी 1000 km लंबी !

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  

उदय दिनमान डेस्कः चीन बना रहा दुनिया की सबसे लंबी सुरंग ! होगी 1000 km लंबी ! जी हां यह सत्य है और इस सुरंग के बनने से हिमालय के पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पडेगा वहीं सूखे स्थानों के लिए यह सुरंग वरदान साबित होगी। भारत ने चिंता जताई है क्योंकि इससे हिमालयी क्षेत्र पर असर पड़ेगा। क्योंकि भारत-चीन के बीच कोई वाटर ट्रीटी नहीं है। हालांकि दोनों देशों ने बॉर्डर के दोनों ओर बहने वाली नदियों को लेकर एक एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म बना रखा है।

 

दुनिया भर में चीन की पहचान अलग है और यही कारण है कि चीन हर बार कुछ नया और अनोखा करता है। इस बार भी चीन ने ऐसा ही कर दिया जो किसी अचंभे से कम नहीं है।आपको बता दें कि चीन अपने सूखे इलाके शिनजियांग को कैलिफोर्नियाhttp://udaydinmaan.co.in/ जैसा बनाना चाहता है। इसके लिए वह ब्रह्मपुत्र नदी के पानी को उस इलाके में ले जाना चाहता है। बीजिंग 1000 km लंबी दुनिया की सबसे लंबी सुरंग बनाएगा, जिसके जरिये वह तिब्बत में इस नदी के पानी के बहाव को मोड़ते हुए शिनजियांग ले जाएगा।

 

चीन के इंजीनियर अभी उन तकनीकों का परीक्षण कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल इस सुरंग को बनाने में किया जाएगा। बीजिंग के इस कदम पर एनवायर्नमेंटलिस्ट्स और भारत ने चिंता जताई है क्योंकि इससे हिमालयी क्षेत्र पर असर पड़ेगा।दुनिया के सबसे ऊंचे पठार के कई हिस्सों से होकर निकलेगी सुरंग और यह आने वाले समय में पठार के क्षेत्र को फायदा मिलेगा।

 

चीन की एक न्यूज एजेंसी के मुताबिक हॉन्गकॉन्ग के साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट ने सोमवार को अपनी रिपोर्ट में चीन की इस मंशा का खुलासा किया है। इसके मुताबिक ये प्रस्तावित सुरंग दुनिया के सबसे ऊंचे पठार के कई हिस्सों के नीचे से होकर निकलेगी, ये हिस्से कई झरनों के जरिये आपस में जुड़े हुए हैं। सुरंग चीन के सबसे बड़े एडिमिनिस्ट्रेटिव डिवीजन (शिनजियांग) के विशाल रेगिस्तान और सूखे घास के मैदानों को पानी मुहैया कराएगी।

 

चीन लियॉनिंग प्रोविंस के वाटर प्रोजेक्ट के तहत 85 km लंबी दाहूओफांग सुरंग बना चुका है, जो उसकी अब तक की सबसे लंबी सुरंग है। पानी सप्लाई करने वाली दुनिया की सबसे लंबी सुरंग न्यूयॉर्क में है जो 137 km लंबी है। साउदर्न तिब्बत में ब्रह्मपुत्र नदी को यारलुंग तसांगपो भी कहा जाता है।

 

 

यह कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील से साउथ-वेस्ट में स्थित तमलुंग त्सो (झील) से होते हुए निकलती है। तिब्बत से होते हुए यह भारत के अरुणाचल प्रदेश में चली जाती है। यहां इसे इसेसियांग नदी के नाम से जाना जाता है। यही नदी आगे चलकर और चौड़ी हो जाती है और तब इसका नाम ब्रह्मपुत्र हो जाता है।

 

यारलुंग तसांगपो (ब्रह्मपुत्र) नदी का पानी भारत और बांग्लादेश भी इस्तेमाल करते हैं। इसलिए नई दिल्ली पहले ही इसे लेकर बीजिंग से चिंता जता चुका है। यूं तो यह नदी चीन और भारत दोनों में बहती है, लेकिन चीन बरसों से इसके पानी पर अपना अधिकार जता रहा है। वह ब्रह्मपुत्र नदी पर पहले ही कई बांध बना चुका है और नए भी बना रहा है और अब वह इसका पानी सुरंग के जरिए शिनजियांग में ले जाना चाहता है।

 

 

ब्रह्मपुत्र के बहाव को बदलकर इसका पानी इस्तेमाल करने के चीन के इरादे को भारत अक्सर बाइलेट्रल बातचीत में उठाता रहा है और बीजिंग द्वारा बनाए जा रहे बांधों का विरोध करता रहा है। भारत में एनवायर्नमेंटलिस्ट्स का एक तबका ऐसा भी है, जो उत्तराखंड में 2016 में आई बाढ़ के लिए चीन को जिम्मेदार मानता है। इनका मानना है कि चीन द्वारा किए जा रहे कामों ने कुदरत के नियमों का वॉयलेशन किया है, जिसका भुगतान भारत को उत्तराखंड में हजारों जानें देकर चुकाना पड़ा।

 

 

एनवायर्नमेंटलिस्ट्स का ये भी कहना है कि चीन की सुरंग से हिमालयी क्षेत्र को गंभीर नुकसान होगा। भारत-चीन के बीच कोई वाटर ट्रीटी नहीं है। हालांकि दोनों देशों ने बॉर्डर के दोनों ओर बहने वाली नदियों को लेकर एक एक्सपर्ट लेवल मैकेनिज्म (ELM) बना रखा है। अक्टूबर 2013 में दोनों देशों की सरकारों ने नदियों पर को ऑपरेशन को मजबूती देने के लिए एक एमओयू पर साइन भी किए थे।

Loading...

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •