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चारधामः तीर्थयात्री देवदर्शनों के लिए उमड़ रहे

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उत्तरकाशी। 18 अप्रैल से जिले में यमुनोत्री और गंगोत्रीधाम के कपाट खुल गए हैं। विभिन्न देशों और प्रदेशों से तीर्थयात्री देवदर्शनों के लिए यहां उमड़ रहे हैं। बीते चार दिनों में गंगोत्री धाम में करीब चार हजार और यमुनोत्री धाम में लगभग दो हजार से अधिक श्रद्धालु देव दर्शन को पहुंचे हैं।

 

29 अप्रैल को केदारनाथ और 30 अप्रैल को बदरीनाथ धाम के कपाट खुलने जा रहे हैं, लेकिन जिला प्रशासन की ओर से यात्रियों की सुरक्षा और व्यवस्थाओं के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। चारधाम के कपाट खुलते ही मई महीने के दूसरे सप्ताह में चारधाम यात्रा पीक पर होगी।

 

चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्रियों को मनमानी शुल्क देकर होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, धर्मशालाओं में रहना और खाना पड़ेगा। चारधाम के कपाट खुलते ही धामों में रह रहे होटल, ढाबा, धर्मशाला व्यवसायी भी चौकस हो गए हैं।

 

यमुनोत्री धाम रूट पर नौगांव, बडक़ोट, जानकी चट्टी, यमुनोत्री धाम और गंगोत्री धाम रूट में ज्ञानसू, मातली, जोशियाड़ा, उत्तरकाशी मुख्य बाजार, नेताला, गंगनानी, भटवाड़ी, झाला, हर्षिल और गंगोत्री मंदिर परिसर में बने होटल, ढाबा, रेस्टोरेंट और धर्मशालाओं में रेट लिस्ट चस्पा नहीं किया गया है।

 

और न ही इनमें यात्रियों के सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। गिने चुने होटल और ढाबों को छोडक़र अन्य होटल, ढाबा संचालक मनमानी तरीके से तीर्थयात्रियों की जेबों पर ढाका डालना शुरू कर दिया है। यात्रियों को रात्रि विश्राम के लिए न्यूनतम एक हजार और अधिकतम तीन-चार हजार रुपये से अधिक शुल्क देना पड़ रहा है।

 

जिला प्रशासन की ओर से यदि धामों में यात्रियों के रहने और खाने के लिए निर्धारित शुल्क बोर्ड चस्पा हो जाए तो इससे यात्रियों को सहूलियत के साथ ही झड़प होने से निजात मिलेगी।

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