बुलेट ट्रेन : 7 किलोमीटर समंदर के नीचे से गुजरेगी 

नई दिल्ली । बुलेट ट्रेन के लिए समंदर के नीचे सुरंग बनाने की पहली कवायद कामयाब होती नजर आ रही है। टनल बनाने के इरादे से समुद्र की तलहटी के नीचे की स्थिति के आकलन के लिए जो सर्वे किया गया है, उससे यह पता चला है कि महज 10 से 15 मीटर के हिस्से को छोडक़र बाकी पूरे समुद्री क्षेत्र में सुरंग बनाने का रास्ता लगभग साफ है। इस सुरंग को बोरिंग मशीन के जरिए बनाया जाएगा।

 

सीसमिक वेलोसिटी टेस्ट
नैशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक अचल खरे के मुताबिक, दरअसल 508 किलोमीटर के मुंबई-अहमदाबाद कॉरिडोर के 21 किमी के हिस्से में सुरंग बनाई जानी है। इस 21 किमी में 7 किमी का हिस्सा समुद्र के नीचे होगा। यहां सुरंग बनाने के लिए सीसमिक वेलोसिटी टेस्ट कराया गया था,

 

ताकि पता लगाया जा सके कि समुद्र के इस हिस्से में जमीन के नीचे किस तरह की भूमि है। इसका मकसद यह था कि सुरंग बनाने से पहले ही पता चल सके कि सुरंग की राह में कोई अड़चन तो नहीं है। इस टेस्ट को जापान के विशेषज्ञों की मदद से अंजाम दिया गया। टेस्ट रिपोर्ट हाल ही में कॉर्पोरेशन को मिली है।

 

पर्यावरण की मंजूरी जरूरी नहीं
रिपोर्ट में कहा गया है कि 10 से 15 मीटर के हिस्से को छोडक़र बाकी पूरे हिस्से में सुरंग बनाने का रास्ता साफ है। इस छोटे से हिस्से के लिए भी अब सुरंग बनाने से पहले ही समाधान खोज लिया जाएगा। इस सुरंग के लिए पर्यावरण की मंजूरी लेना भी जरूरी नहीं है। खरे के मुताबिक, इस प्रोजेक्ट के लिए बाकी हिस्से में एलिवेटेड ट्रैक बनाया जाएगा।

 

औसत रफ्तार 250 किमी
खरे ने बताया कि बुलेट ट्रेन का प्रोजेक्ट इस तरह से डिजाइन किया गया है कि उस पर 320 किमी की रफ्तार से ट्रेन दौड़ सकेगी। हालांकि, अगर स्टेशनों पर रुकने और अन्य समय की गणना की जाए तो इस कॉरिडोर पर बुलेट ट्रेन की औसत स्पीड 250 किमी प्रति घंटे की होगी। उन्होंने बताया कि इस कॉरिडोर के लिए फिलहाल भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई है।

 

 

अब तक का आकलन है कि इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए 1,415 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी। इस प्रोजेक्ट पर 10,000 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह पूरी राशि इंडियन रेलवे देगा। उम्मीद की जा रही है कि इस साल दिसंबर तक इस प्रोजेक्ट के लिए जमीन अधिग्रहण पूरा हो जाएगा।

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