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भाजपा और कांग्रेस में चल रहा टिकट-टिकट का खेल

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लैसडॉन से हरक आये तो पुराने साथी से होगा मुकाबला
देहरादून। विधानसभा चुनाव के नजदीक आते जाने के साथ ही भाजपा में कांग्रेस से आये बागियों को लेकर बगावत की सुगबुगाहट शुरू हो गयी है। बगावत की शुरुआत पौड़ी गढ़वाल की लैंसडौन सीट से शुरू होने जा रही है जहां भाजपा के सिटिंग विधायक दलीप सिंह रावत अपना टिकट कटने की पूरी संभावना को भांपते हुये किसी भी क्षण कांग्रेस का हाथ थाम सकते हैं। इस सीट पर भाजपा की ओर से कांग्रेस के बागी हरक सिंह रावत को मैदान में उतारे जाने की पूरी संभावना है।
विश्वस्त सूत्रों के अनुसार पौड़ी गढ़वाल की लैंसडौन सीट पर भाजपा की ओर से हरक सिंह रावत को टिकट मिलने की पूरी संभावना को भांपते हुये इस क्षेत्र के वर्तमान विधायक दलीप सिंह रावत मुख्यमंत्री हरीश रावत के सम्पर्क में हैं। कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार कांग्रेस प्रत्याशियों के चयन के सिलसिले में दिल्ली में डटे मुख्यमंत्री हरीश रावत और दलीप सिंह रावत की शुक्रवार सांय को मुलाकात की संभावना है। दलीप सिंह रावत शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथाणी के करीबी माने जाते हैं और उनका मुख्यमंत्री हरीश रावत के प्रति साफ्ट कॉर्नर भी जग जाहिर है। मंत्री प्रसाद नैथाणी का भी कांग्रेस से टिकट पक्का माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार नैथाणी अपना टिकट पक्का कराने के बाद दलीप सिंह रावत का टिकट भी पक्का कराने के लिये पूरा जोर लगा रहे हैं।
हरक सिंह रावत का गांव श्रीनगर गढ़वाल के निकट होने के कारण उनका स्वाभाविक निर्वाचन क्षेत्र श्रीनगर गढ़वाल रहा मगर वह लैंसडौन से चुनाव लड़ते रहे हैं। वह सन् २००२ और २००७ के चुनाव में लैंसडौन से चुनाव जीते थे। सन् २००७ के चुनाव में हरक सिंह रावत का मुकाबला भाजपा प्रत्याशी और दलीप सिंह रावत के पिता भारत सिंह रावत से हुआ था। लेकिन सन् २०१२ के चुनाव में वह चुनाव लडऩे के लिये रुद्रप्रयाग चले गये थे। इस बार असाधारण परिस्थितियों को देख कर वह अपने पुराने निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर लडऩे जा रहे हैं। इस निर्वाचन क्षेत्र में अब पुराना धूमाकोट क्षेत्र आ गया है जिसमें रिखणीखाल ब्लाक के २७ बूथ और लैंसडौन के २७ और बीरोंखाल के भी १० पोलिंग बूथ शामिल किये गये हैं।

२०१२ के चुनाव में इस सीट पर दलीप सिंह रावत रक्षा मोर्चा के जनरल टीपीएस रावत को ६ हजार से अधिक मतो से पराजित कर विधानसभा पहुंचे थे। उस समय वहां कांग्रेस प्रत्याशी ज्योति रौतेला तीसरे नम्बर पर रहीं थी।सूत्र बताते हैं कि जिस तरह भाजपा ने कांग्रेस में विद्रोह करा कर हरीश रावत सरकार को संकट में डाला उसका बदला कांग्रेस अब विधानसभा चुनाव में लेने जा रही है और इसके लिये कांग्रेस ने भाजपा के बागियों के लिये अपने दरवाजे खोल दिये हैं। भाजपा में विद्रोह कराने के लिये कांग्रेस की नजर दलीप सिंह रावत के अलावा भी कई अन्य नेताओं पर है जिन्हें टिकट का आश्वासन दिया जा सकता है।

सूत्र बताते हैं हैं कि जितने कांग्रेस विधायकों ने गत वर्ष १८ मार्च को बगावत की थी उन सभी को भाजपा का टिकट मिलने पर टिकट से वंचित होने वाले भाजपाइयों के लिये कांग्रेस ने सीटें आरक्षित कर ली हैं। लैंसडौन सीट पर पूर्व कैबिनेट मंत्री एवं पूर्व सांसद जनरल तेजपाल सिंह रावत और कांग्रेस के प्रदेश महामंत्रेी राजेन्द्र सिंह भण्डारी भी कांग्रेस के टिकट के लिये जोर लगा रहे हैं। लेकिन अब टिकट दलीप सिंह रावत की झोली में जाता हुआ नजर आ रहा है।

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