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भूख और अंधेरे से लडऩे के लिए फुटबॉलर बने रोमेलू लुकाकु

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नई दिल्ली। बेल्जियम के स्ट्राइकर रोमेलू लुकाकू ने पनामा के खिलाफ दो गोल दागकर वल्र्ड कप में टीम को शानदार शुरुआत दिलाई। पर, बहुत कम लोग जानते हैं कि इस स्टार खिलाड़ी का बचपन काफी गरीबी में बीता।

सिर्फ आर्थिक स्थिति और जिंदगी का ढंग सुधारने के लिए उन्होंने फुटबॉलर बनने का फैसला लिया था। लुकाकू ने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में पुराने दिनों को याद करते हुए कहा कि जब वो छोटे थे तो उनके घर में खाने की कमी रहती थी। यही नहीं, उन्हें कभी-कभी अंधेरे में भी रहना पड़ता था क्योंकि उनके पास बिजली का बिल भरने के लिए पैसे नहीं होते थे।

25 वर्षीय लुकाकू ने कहा, ‘हमारे पास इतना पैसा नहीं होता था कि हम पूरे हफ्ते के अंत तक की जरूरतों को पूरा कर सकें। हम सिर्फ गरीब ही नहीं थे बल्कि बहुत गरीब थे। हालांकि मेरे पिता पेशेवर फुटबॉलर थे लेकिन वो करियर के अंतिम पड़ाव में थे और सारा पैसा खत्म हो चुका था।’

इस फॉरवर्ड ने याद करते हुए कहा कि वह सिर्फ छह साल के थे जब उन्हें अपने परिवार की गरीबी का अहसास हुआ था। उन्होंने अपनी मां को दूध में पानी मिलाते हुए देखा था ताकि ये सभी के लिए पर्याप्त हो सके। इसके बाद ही उन्होंने फैसला किया था कि पेशेवर फुटबॉलर बनकर अपने परिवार को गरीबी से बाहर निकालेंगे।

उन्होंने अपनी प्रतिभा के बूते यह कर भी दिखाया। अब वो मैनचेस्टर युनाइटेड जैसे क्लब के साथ खेलते हैं। इससे पहले वो चेल्सी, वेस्ट ब्रोमविच एलबियोन और एवर्टन जैसे क्लबों में भी अपना हुनर दिखा चुके हैं। लुकाकु बेल्जियम के लिए रिकॉर्ड स्कोरर रहे हैं। उन्होंने 70 मैचों में 38 गोल दागे हैं।

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