बैंकरप्सी कोर्ट : 2 लाख करोड़ रुपये के फंसे हुए लोन के मामले जाएंगे!

मुंबई। दो लाख करोड़ से ज्यादा के फंसे हुए लोन के मामले बैंकरप्सी कोर्ट में जा सकते हैं। ऐसा आरबीआई के सोमवार को किए गए एक निर्णय के चलते होगा। आरबीआई ने कई रीस्ट्रक्चरिंग स्कीमों को खत्म कर दिया था और कहा था कि डिफॉल्ट करने वाली कंपनी के बारे में आखिरी फैसला बैंकरप्सी अदालतें ही करेंगी।

 

ये लोन मुख्य रूप से पावर, टेलिकॉम, रोड और पोर्ट जैसे इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर की कंपनियों को दिए गए हैं। ये लोन स्ट्रैटिजिक डेट रीस्ट्रक्चरिंग या कथित सस्टेनेबल स्ट्रक्चरिंग ऑफ स्ट्रेस्ड असेट्स यानी एस4ए जैसे प्लान के तहत रीस्ट्रक्चरिंग के अलग-अलग चरणों में हैं। इन प्रोग्राम्स के दायरे में लाए जाने के महीनों बाद भी बैंक और कंपनियां अभी तक मामला सुलझाने का कोई खाका बना सके हैं।

 

पिछले पांच वर्षों में कई सरकारी बैंकों पर नॉन-परफॉर्मिंग असेट्स (एनपीए) का बोझ बढ़ चुका है और अब ये एक और मुश्किल में घिर गए हैं क्योंकि इन रीस्ट्रक्चर्ड लोन का मामला अगर नहीं सुलझाया जा सका तो प्रोविजनिंग में बड़ा उछाल आएगा, जिससे बैंकों की प्रॉफिटेबिलिटी घटेगी और पहले से कम दिख रही पूंजी में और कमी आएगी। इन बैंकों को सरकार से और पूंजी मांगनी पड़ सकती है।

 

रेटिंग कंपनी क्रिसिल के सीनियर डायरेक्टर कृष्णन सीतारमण ने कहा, हमारा अनुमान है कि एनपीए में 50 पर्सेंट से ज्यादा हिस्सेदारी रखने वाले टॉप 50 अकाउंट्स के लिए 45 पर्सेंट की दर से प्रोविजनिंग की गई है, लेकिन अगले वित्त वर्ष में इनके लिए प्रोविजनिंग बढक़र 60 पर्सेंट हो सकती है। उन्होंने कहा, हमारा अनुमान अब भी यही है कि एनपीए में मार्च 2019 तक बढ़ोतरी होती रहेगी और उसके बाद ही इसमें कमी आनी शुरू होगी।

 

पिछले कुछ वर्षों में स्ट्रेस्ड असेट्स में बढ़ोतरी हुई है और चार टॉप सरकारी बैंकों की करीब 1.37 करोड़ रुपये की ऐसी असेट्स फंसी हुई हैं। एसबीआई के 50482 करोड़ रुपये, पंजाब नैशनल बैंक के 67129 करोड़, बैंक आफॅ इंडिया के 10633 करोड़ और बैंक ऑफ बड़ौदा के 9021 करोड़ रुपये के लोन फंसे हुए हैं। इनमें से कुछ एनपीए भी हो सकते हैं।

 

एक असेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी के लिए अब एनपीए पर नजर रखने वाले एक पूर्व बैंकर ने कहा, सीडीआर में 600 लाए गए थे, जिनमें से 200 में कुछ हुआ ही नहीं। लगभग 90 मामलों में ही सफलतापूर्वक निपटारा हुआ, वह भी कई साल पहले। कुल 1.25 लाख करोड़ रुपये के लगभग 130 मामले फेल हो गए।

 

मेरा मानना है कि जेपी, जीएमआर, जिंदल थर्मल जैसे ग्रुप्स के कई ऐसे प्रॉजेक्ट्स जो पावर परचेज अग्रीमेंट्स नहीं होने या पावर टैरिफ में बड़ी गिरावट के कारण फंस गए हैं, वे अब एनपीए कैटिगरी में जा सकते हैं।

 

बैंकरप्सी अदालतों में मामला जाने का मतलब यह है कि इनके लिए 50 पर्सेंट प्रोविजनिंग करनी होगी जबकि रिस्ट्रक्चर्ड लोन के लिए 15 पर्सेंट प्रोविजनिंग होती है। बुधवार को शेयर बाजार में सरकारी बैंकों के शेयरों में गिरावट आ सकती है क्योंकि निवेशकों को आरबीआई के ताजाकदम से रिकवरी में देरी का डर सता सकता है।

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