udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news अतृप्त आत्माएं हैं अब तृप्त और लौट रही है अपने मोक्षधाम !

अतृप्त आत्माएं हैं अब तृप्त और लौट रही है अपने मोक्षधाम !

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संतोष सप्तांशु
केदारनाथ। वर्ष २०१३ की हिमालयी सुनामी में केदारघाटी में काल के ग्रास बने लोगों की अतृप्त आत्माएं अब संतुष्ठ होकर अपने मोक्षधाम को लौटने लगी हैं। आप इस पर विश्वास करें या ना करें, लेकिन यह सत्य है। आत्माओं से साक्षात्कार के बाद उन अतृप्त आत्माओं का यह कहना है। आप मानो या ना मानो लेकिन आत्माएं होती है और वह तब तक अपने लोक को प्रस्थान नहीं करती जब तक वह तृप्त नहीं होती। इस बार युग पुरूष के केदारनाथ धाम में विशेष पूजा करने के बाद सभी आत्माएं संतुष्ठ होकर अपने धाम लौटने लगी हैं।

 

आपको मेरी बात पर विश्वास नहीं होगा, चलो आपको पूरा कहानी विस्तार से बताता हूॅ।वर्ष २०१४ में मैं जब केदारनाथ धाम के कपाट खुलते वक्त यात्रा पर गया था तो उस वक्त गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग पर चलने वाले घोडे-खच्चर, डोली-पालकी और विभिन्न स्थानों पर स्वरोजगार के लिए दुकानें चलाने वालों ने बातचीत में वर्ष २०१३ की आपदा में काल के ग्रास बने सैकडों लोगों की आत्माओं के अभी भी भटकने की बात कही थी।

 

उस समय मैंने सैकड़ों अतुप्त आत्माएं खड़ी हैं मार्ग पर अपनों के इंतजार में यह आलेख लिखा था और उसके बाद प्रतिवर्ष कपाट खुलते समय इन आत्माओं के दर्शनों के लिए जा रहा हूं। पिछली तीन यात्राओं में तो अमृत समान उन आत्माओं ने दर्शन नहीं दिए, लेकिन इस बार आत्माओं से साक्षात्कार हो ही गया और अब वह संतुष्ठ है। अब पुन: केदारनाथ धाम में भगवान शंकर के दर्शन के बाद अपने धाम को प्रस्थान कर रहे हैं।

आप इसे मेरा भ्रम माने या इसे सत्य यह आप पर निर्भर करता है। आपको बता दूॅ कि देहरादून से एक मित्र के सहयोग से केदारनाथ धाम के लिए हेलीकाप्टर सेवा का लाभ लिया। भगवान केदानाथ के दर्शन करने के बाद वापसी का वक्त था, लेकिन हेलीकाप्टर सेवा बाधित होने के कारण पैदल ही सोनप्रयाग तक आना पड़ा। इस दौरान अपनी उस छूटी कहानी को पूरा करने और उन अतृप्त आत्माओं के बारे में जानने के लिए समय भी मिल गया। करीब तीन बजे केदारनाथ से वापसी की और मान उन अतृप्त आत्माओं की खोज में था।

 

आप इसे मेरे मन का भ्रम कहें या सत्य लेकिन जब मेरी उन अतृप्त आत्माओं से वार्तालाप हुई तो वे संतुष्ठ दिखी। उनका कहना था कि अब वे अपने धाम को लौटने के लिए पहले बाबा के दर्शन करेंगी और फिर जिस स्थान पर उनकी मौत हुई उसी स्थान से अपने धाम को लौटेंगी। ऐसी कई आत्माएं पूरे रास्ते मिली और उनसे बातचीत हुई। उनका कहना था कि उनके अपनों ने अपने-अपने घरों में उनके पिंड दान तो किए लेकिन उनके साथ जो अन्य लोग काल के शिकार हुए उनका साथ छोडऩे का मन नहीं कर रहा था। क्योंकि कई ऐसे लोग भी यहां काल के शिकार हुए जिनका अब कोई इस दुनिया में नहीं है। अब क्योंकि देश के प्रधानमंत्री ने केदारनाथ धाम में आकर पूजा अर्चना की है तो वे अब अपने धाम को लौटने को तैयार है। उनका कहना है कि जब कोई दिब्य पुरूष उनके लिए प्रार्थना कर रहा है तो उन्हें संतुष्ठ होना चाहिए।

 

आत्माओं के अनुसार उनका भी एक अलग संसार है और उस संसार के भी अलग नियम है। वहां भी सभी लोगों के विचार मेल नहीं खाते और निर्णय सामुहिक होते हैं। आपको मेरी बात पर यकीन हो या ना हो लेकिन यह सत्य है। अब आप मुझे जो भी समझे लेकिन हकीकत को मैने यहां लिपिबद्ध किया है। मैंने गीता में पढ़ा था कि अगर आप सच्चे मन से किसी चीज को पाने की अभिलाषा रखते हैं और उसमें खो जाते हैं तो आप उसे पा सकते है। शायद मेरी आत्माओं से मुलाकात की चाह मुझे उनसे साक्षात्कार करवा गयी।

 

मैंने जो पूर्व में सैकड़ों अतुप्त आत्माएं खड़ी हैं मार्ग पर अपनों के इंतजार में लेख लिखा था उसे भी यहां मूल रूप में प्रस्तुत कर रहा हूॅ। आपको बता दूॅ कि उल्लेखनीय है कि वर्ष 2013 की हिमालयी सुनामी ने केदार घाटी में देश.विदेश के सैकड़ों लोगों को काल ने अपना ग्रास बनाया। हिन्दू ध्र्म के अनुसार जो लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त होते हैं उनकी आत्मा तब तक इस ध्रा पर भटकती रहती है जब तक उनके अपने तीर्थ स्थल पर उनका पिण्डदान नहीं करते हैं। इस बात को कोई माने या न माने लेकिन यह सत्य है कि केदार घाटी में वर्ष 2013 की सुनामी में भी देश-विदेश के सैकड़ों लोग अकाल मृत्यु को प्राप्त हुए।

 

अकाल मृत्यु को प्राप्त लोगों के परिजनों ने हालांकि अपने-अपने तरीके से अकाल मृत्यु को प्राप्त अपनों के लिए वह सब किया जो हिन्दू धर्म के अनुसार किया जाता है। इसके बाद भी केदारघाटी में काल के ग्रास बने उन लोगों की आत्मा अभी तक तृप्त नहीं हुई। ऐसा मानना मेरा नहीं बल्कि यात्रा शुरू होने के बाद गौरीकुंड से केदारनाथ मार्ग पर चलने वाले लोगों का है। खासकर जो लोग वहां डंडी, कंडी, घोड़ा.खच्चर और अन्य कार्य कर रहे हैं उनका कहना है कि इस मार्ग पर चलते हुए ऐसा आभास हो रहा है कि जैसे कोई उन्हें देख रहा है। हालांकि इस हलचल के बाद डर तो नहीं लग रहा हैं, लेकिन यह महसूस हो रहा है कि इस स्थान पर मरे लोगों की अतृप्त आत्माएं आने.जाने वालों में अपनों की तलाश कर रहे हैं। ताकी वे केदारनाथ में उनका पिण्डदान करें और वे मोक्षधाम की और आगे बढ़े।

 


उल्लेखनीय है कि आपदा में अकेले केदारघाटी में दस हजार से अधिक लोग अकाल मौत को प्राप्त हुए थे। उस समय स्थिति ऐसी थी कि यहां शवों को खोजने में भारी परेशानियां हुई। जो शव मिले उनका अंतिम संस्कार तो किया गया, लेकिन शायद विधि- विधान से नहीं। यही कारण है कि वह आत्माएं आज भी अतृप्त हैं और अपने का इंतजार कर रही हैं कि उनके अपने आये और उनका केदारनाथ में पिण्डदान कर उन्हें मोक्ष धाम जाने के लिए रास्ता दें। हालांकि केदानाथ घाटी में अलग-अलग स्थानों पर आपदा के शिकार हुए लोगों का अंतिम संस्कार उत्तराखंड सरकार द्वारा किया तो गया, लेकिन उस समय विकट परिस्थितियों के चलते शायद मृतकों का अंतिम संस्कार सही नहीं हो पाया।

 

इसके बाद सरकार ने सभी मृतकों की आत्मा की शांति और बाबा केदार की शुद्धिकरण के लिए एक सामुहिक यक्ष और अनुष्ठान भी करवाया। लेकिन देश.विदेश के उन सैकड़ों मृत लोगों की आत्मा को तो उनके अपने ही मुक्ति दे सकते हैं। शायद इसी वजह से उनकी अतृप्त आत्माएं अपनों का इंतजार में हैं और वह हर आने.जाने वाले में अपनों की खोज कर रहे हैं। पौराणिक मान्यता है कि मरने के बाद केदारनाथ में पिण्डदान करने से मृतक की आत्मा मोक्षधाम की ओर चली जाती है।

 

मोक्षधाम में उसी आत्मा को प्रवेश मिलता है जिनके अपनों ने पिण्डदान किया हो और उसके बाद वह दूसरा जन्म लेने के हकदार होते हैं। यह मैं नहीं हमारे शास्त्रों में इसका उल्लेख है जो सदियों से चला आ रहा है। वर्ष 2013,14,१५और १६ में केदारनाथ धाम में तीर्थयात्रियों को आना बहुत कम रहा, लेकिन इस साल कपाट खुलते ही तीर्थयात्रियों की आमद और देश के प्रधानमंत्री जिन्हें पूरे विश्व ने दिब्य पुरूष माना है के बाद उन अतृप्त आत्माओं को तृप्त होने का मौका मिला और अब वे अपने-अपने धाम को लौटने लगी हैं।

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