अनोखी शादी: रीति-रिवाजों के साथ होगा बकरियों का स्वयंवर !

देहरादून। अनोखी शादी: रीति-रिवाजों के साथ होगा बकरियों का स्वयंवर ! बकरियों की शादी, भले ही यह बात सुनने में थोड़ी अटपटी लगे, लेकिन उत्तराखंड में यह सच में होने वाला है। मसूरी के समीप धनोल्टी में बकायदा बकरी स्वयंवर का आयोजन रखा गया है।

24 फरवरी को धनोल्टी में बकरी स्वयंवर रखा है। इसमें पूरे विघ्धि विधान और रीति रिवाजों के साथ बकरियों का स्वयंवर होगा, लेकिन इस अनोखे आयोजन को लेकर सरकार के दो मंत्रियों के बीच तकरार से अड़चन खड़ी हो गई है। महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास और पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्य इन दिनों अपने नए फैसले से चर्चा में हैं।

यह मामला है धनोल्टी के ‘बकरी स्वयंवर’ में सरकारी भागीदारी का। रेखा के इस फैसले को लेकर कैबिनेट में उनके सीनियर सहयोगी पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के साथ मतभेद पैदा हो गए हैं। हालांकि, रेखा किसी भी स्तर से आपत्ति या विरोध की बात से इनकार कर रही हैं।

लेकिन, महाराज की आपत्ति सामने आने पर उन्होंने जिस तरह प्रेस कॉन्फेंस रद्द कर दी, उससे मतभेद की बात से इनकार नहीं किया जा सकता।धनोल्टी में गोट विलेज संस्था पर्यटन और पशुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए कुछ साल से ‘बकरी स्वयंवर’ का आयोजन करता आ रहा है।

इसे पशुपालन के लिहाज से अहम मानते हुए रेखा ने पशुपालन विभाग को भी इससे जोड़ने का निर्णय किया। इस बार 24 फरवरी को यह आयोजन होना है। इसमें देशभर के अध्किारी शामिल होंगे और बेहतर नस्ल वाले पशुओं की प्रदर्शनी भी होगी। इसकी तैयारियों को लेकर सोमवार को रेखा मीडिया से मुखातिब होने वाली थीं।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज का कहना है कि पशुपालन प्रोत्साहन के लिए प्रयास किए जाएं, अच्छा है। लेकिन, वहां मंत्रोच्चार के बीच बकरियों के ब्याह कराए जाएं, यह ठीक नहीं है। यह एक तरह से हमारी संस्कृति का उपहास होगा। मेरी आपत्ति बस इसी बात को लेकर है।

महिला सशक्तिकरण एवं पशुपालन राज्यमंत्री रेखा आर्य का कहना है कि बकरी स्वयंवर सरकार नहीं, बल्कि स्थानीय संस्था करवा रही है। कृषि मंत्री से मुख्य अतिथि का अनुरोध किया गया है। उनकी मंजूरी के बाद कार्यक्रम होगा। रही बात महाराज की आपत्ति की, तो मुझे इसकी जानकारी नहीं। यह आयोजन कोई नया नहीं है।

गोट विलेज संस्था के सुभाष रमोला ने कहा कि बकरी स्वयंवर संस्कृति का उपहास नहीं, बल्कि पर्यटन और पशुपालन को बढ़ावा देने का प्रयास भर है। इसके आयोजन के दौरान बकरीपालन की जानकारियां दी जाती हैं। इस तरह के आयोजनों से पिछले कुछ साल में पर्यटकों की संख्या में भी इजाफा हुआ है।

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