अनोखा मन्दिर: पति -पत्नी यहां  नहीं कर सकते एक साथ माँ के दर्शन!

श्राई कोटि माता  मंदिर में एक साथ दर्शन करते है तो उन्हें सजा भुगतनी पड़ती है

उदय दिनमान डेस्कः अनोखा मन्दिर: पति -पत्नी यहां  नहीं कर सकते एक साथ माँ के दर्शन!यह अनोखा मंदिर है हिमाचंल प्रदेश में। जैसा कि आप जानते हैं कि हिंदू धर्म में विवाह के बाद पती और पत्नी को पूजा में एक साथ बैठने और मंदिरों में एक साथ दर्शन करने से ऐसी मान्यता है कि फल मिलता है। लेकिन हिमाचल प्रदेश के इस मंदिर की कहानी कुछ ओर ही है।

आपको बता दें कि  हिमाचल प्रदेश के एक ऐसे मंदिर की बात करेंगे जहाँ पति-पत्नी एक साथ माँ के दर्शन नहीं कर सकते है।अगर वह एक साथ दर्शन करते है तो उन्हें सजा भुगतनी पड़ती है। शिमला के रामपुर में समुद्र तल से 11000 फुट की ऊंचाई पर मां दुर्गा का एक स्वरुप विराजमान है जो कि श्राई कोटि माता के नाम से बहुत प्रसिद्ध है।

इस मंदिर में दोनों पति-पत्नी जाते तो हैं मगर एक बाहर रह कर एक-दूसरे का इंतज़ार करते है यदि वह ऐसा नहीं करते तो वह उनका अलग होना निश्चित होता है।यह प्रथा सदियों से चली आ रही है और लोग इसका निर्वहन कर रहे हैं। इस सबके बाद भी यहां श्रद्धालुओं का सदा जमावडा लगा रहता है।

जनश्रुति के अनुसार भगवान शिव ने अपने दोनों पुत्रों गणेश जी तथा कार्तिकेय जी को समग्र ब्रह्माण्ड का चक्कर काटने को कहा था उस समय कार्तिकेय जी तो भ्रमण पर चले गए थे किन्तु गणपति जी महाराज ने माता-पिता के चक्कर लगा कर ही यह कह दिया था कि माता-पिता के चरणों में ही ब्रह्माण्ड है।

जब कार्तिकेय जी वापिस पहुंचे तब तक गणपति जी का विवाह हो चुका था यह देख कर कार्तिकेय जी महाराज ने कभी विवाह न करने का निश्चय किया था। श्राईकोटी में आज भी द्वार पर गणपति जी महाराज अपनी पत्नी सहित विराजमान हैं। माना जाता है कि कार्तिकेय जी के विवाह न करने के प्रण से माता बहुत दुःखी हुई थी,

साथ में इन्होंने यह कहा कि जो भी पति-पत्नी यहां उनके दर्शन करेंगे उस दम्पति का अलग होना तय होगा।इस कारण आज भी यहां पति-पत्नी एक साथ पूजा नहीं करते। अगर फिर भी कोई ऐसा करता है मां के श्राप अनुसार उसे ताउम्र एक-दूसरे का वियोग सहना पड़ता है। यह मंदिर सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है तथा मंदिर की देख-रेख माता भीमकाली ट्रस्ट के पास है।

Sachchida Nand Semwal की फेसवुक वाल से साभार