एएसआई की नाक के नीचे विश्व धरोहर से खिलवाड़

 

बेंगलुरु। नई इमारतों का निर्माण होते हुए आपने देखा होगा और पुरानी ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण होते हुए भी जरूर देखा होगा। लेकिन शायद ही किसी ने कभी एक ऐतिहासिक इमारत को दूसरी जगह शिफ्ट करते हुए देखा हो! ऐतिहासिक इमारत को नुकसान पहुंचाने का ऐसा ही एक अजबी मामला बेंगलुरु में सामने आया है।
कर्नाटक राज्य में स्थित हम्पी नगर यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर में शामिल किया जा चुका है। बावजूद इसके अपने आप में एक सभ्यता के साक्षी और 500 साल पुराने यहां के महल के पत्थरों को 4 किलोमीटर दूर एक दीवार पूरा करने के लिए ले जाया जा रहा है।
दीवार के इन पत्थरों में कुछ ही पूरी तरह सलामत हैं और जिनके ब्लॉक्स ठीक हैं। यूनेस्को द्वारा संरक्षित इस इमारत के लोटस महल की दीवार के पत्थर यहां से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित दूसरे महल को संरक्षित करने के लिए ले जाए जा रहे हैं। जबकि वह महल आर्किटेक्चर में लोटस महल से एक-दम अलग बताया जा रहा है।
पीएचडी स्कॉलर और एक एनजीओ की विजयनगर मॉन्युमेंट कल्चर कॉन्सर्वेशन विंग के प्रेजिडेंट विश्वनाथ मलगी का कहना है कि यह एक शर्मनाक घटना है। अगर अफसर खुद ही नियमों का उलंघन करेंगे तो वह गलत उदाहरण पेश कर रहे हैं। हम्पी की हर इमारत अपने आप में इतिहास को समेटे हुए है। अब लोटस टेम्पल की दीवार का उदाहरण ही ले लीजिए। इसके कई ब्लॉक्स और पत्थरों पर नाम और इस दीवार को बनाए जाने का सन् लिखा हुआ है। अब अगर इन पत्थरों को दूसरे स्थान पर ले जाकर किसी दूसरी इमारत में लगाया जाएगा, तो यह न केवल उस जगह के आर्किटेक्चर को खराब करेगा बल्कि दोनों ही जगह के इतिहास के साथ भी खिलवाड़ होगा।
हम्पी में किले की दिवारें इसलिए भी खास हैं क्योंकि इन पर इनके बनाए जाने का वक्त और कई जगहों पर राजा का नाम भी अंकित है। साथ ही इसकी दीवारों के पत्थरों में इस्तेमाल किए गए गोलाकार शिलाखंड इसकी स्थानीय विशेषता की पहचान हैं।
इन पत्थरों के साइज इतने बड़े हैं कि कोई व्यक्ति इन्हें उठाकर एक जगह से दूसरी जगह नहीं ले जा सकता। साथ ही जिस जमाने में इन इमारतों का निर्माण किया गया है, तब मशीन्स भी नहीं हुआ करती थीं। हाथियों की मदद से उस वक्त बनाई गई इस इमारत को बनाने में कई वर्ष लगे। खास बात यह है कि इस विश्व धरोहर के साथ खिलवाड़ आर्कियॉलोजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (एएसआई) की नाम के नीचे किया जा रहा है।
इस बारे में पूछने पर एएसआई के एक सीनियर ऑफिसर ने इस तरह की घटना से इनकार कर दिया। इनका कहना है कि एक इमारत के पत्थर दूसरी में नहीं लगाए जा सकते। पत्थर अगर शिफ्ट हुए हैं तो इसका अर्थ है कि उसी इमारत में कहीं लगाए जा रहे हैं।