अमीर किसानों को टैक्स के दायरे में लाकर 25000 करोड़ रुपये कमा सकती है सरकार

नई दिल्ली । सरकार अधिक से अधिक लोगों को टैक्स के दायरे में लाने की कोशिशों में जुटी हुई है। टैक्स चोरी पर भी लगाम लगाने के लिए गंभीर प्रयास हो रहे हैं। ऐसे में ऐग्रिकल्चर एक ऐसा सेक्टर हैं जहां अगर सरकार अमीर किसानों को टैक्स के दायरे में लाए तो काफी रेवेन्यू आ सकता है। छोटे और मझोले किसानों पर बिना भार डाले ऐसा करना संभव भी है।

देश के सारे किसान गरीब नहीं हैं। लैंड होल्डिंग और इनकम की बात करें, तो फार्मिंग सेक्टर में काफी विविधता दिखाई देती है। नैशनल सैंपल सर्वे के मुताबिक कृषि पर आधारित 70 फीसदी हाउसहोल्ड्स के पास 1 हेक्टेयर से भी कम जमीन है। केवली 0.4 फीसदी के पास 10 हेक्टेयर या अधिक की लैंड होल्डिंग है। 3.7 फीसदी के पास लैंड होल्डिंग 4-10 हेक्टेयर के बीच है।

वर्ल्ड बैंक की ग्लोबल टैक्स टीम के प्रमुख राजुल अवस्थी इन टॉप 4.1 फीसदी ऐग्रिकल्चरल हाउसहोल्ड्स की इनकम पर टैक्स लगाने का तर्क दे रहे हैं। उनके मुताबिक अगर इनपर औसतन 30 फीसदी का टैक्स लगाया जाए तो 25000 करोड़ रुपये का कलेक्शन होगा। पिछले साल चीफ इकनॉमिक अडवाइजर अरविंद सुब्रमण्यन ने भी अमीर किसानों पर टैक्स लगाने की बात कही थी।

उन्होंने कहा था कि गरीब और अमीर किसानों के बीच अंतर करने में कठिनाई क्या है। जब भी आप किसानों की बात करते हैं लोगों को लगता है कि आप गरीब किसान की बात कर रहे हैं। उन्होंने सवाल किया था कि क्या राजनीति की वजह से यह फर्क नहीं किया जा पा रहा। सुब्रमण्यन ने कहा था कि हम ऐसा क्यों नहीं कह सकते कि हर अमीर, चाहे वह कहीं से पैसा कमाता हो, टैक्स के दायरे में आना चाहिए।

मोदी सरकार की थिंकटैंक नीति आयोग ने भी में कृषि आय पर टैक्स का प्रस्ताव दिया था। नीति आयोग के सदस्य बिबेक देबरॉय ने कहा था कि कृष आय को भी इनकम टैक्स के दायरे में लाने की जरूरत है। हालांकि वित्त मंत्री जेटली ऐसी किसी योजना की बात को खारिज कर चुके हैं। वित्त मंत्री ने साफ कर दिया था कि कृषि की आय पर टैक्स लगाने का कोई इरादा नहीं है। जेटली ने कहा था कि संविधान प्रदत्त शक्तियों के मुताबिक केंद्र सरकार के पास कृषि की आय पर टैक्स लगाने का अधिकार नहीं है।

हालांकि सुब्रमण्यन का कहना है कि ऐसी स्थिति में भी राज्य चाहें तो कृषि आय पर टैक्स लगा सकते हैं। सरकार पहले ही इस बात को स्वीकार कर चुकी है कि टैक्स चोरी के लिए दूसरे मदों से होने वाली आय को कृषि आधारित आय दिखाने के मामले सामने आ रहे हैं। अब ऐसे में सवाल यह है कि इस तरह की टैक्स चोरी को रोकने के प्रयास के तहत क्या सरकार अमीर किसानों को टैक्स के दायरे में लाएगी?

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