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आवाज सुनो पहाड़ों की : प्रकृति की अनुपम देन हिमालय की गोद में बसा उत्तराखण्ड

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देहरादून । शारदा स्वर संगम द्वारा उत्तराखण्ड के पर्वतीय क्षेत्र की सांस्कृतिक व धार्मिक परंपराओं पर आधारित एवं यहां के रीति-रिवाज, पर्यटन व पलायन इत्यादि पर केन्द्रित आवाज सुनो पहाड़ों की टेलेंट शो (गीत एवं संगीत-आयु वर्ग- 10 से 30 वर्ष) का कार्यक्रम डीडी इण्डिया चैनल पर रविवार को प्रात: 9 बजेे प्रसारित किया।

 

यह कार्यक्रम निरन्तर हर रविवार प्रात: 9 बजे से डी0डी0 इण्डिया से प्रसारित किया जायेगा। हिमालय की पवित्र गोद में बसा उत्तराखण्ड प्रकृति की अनुपम देन है। इसकी प्राकृतिक छटा एवं अलौकिक स्वरूप मन को मोह लेता है। यहां का रहन-सहन, रीति-रिवाज, परंपराएं, लोकगीत व लोकनृत्यों की अपनी एक विशिष्ट पहचान है।

 

इस भू-भाग के मेलों, पर्वों, त्योहारों और उत्सवों में विशेष उल्लास देखने को मिलता रहा है। लेकिन इन सबमें अब बेहद कमी आई है। यहां की लोकसंस्कृति एवं लोक परंपराओं के साथ-साथ यहां के खाद्य पदार्थ व जडी-बूटियां भी अपना अस्तित्व खोती नजर आ रही हैं। पलायन नहीं रूक पाया है। यद्यपि देश में उत्तराखण्ड की प्रतिभाओं की कमी नहीं है। फिर भी कई प्रतिभाएं ऐसी हैं, जो इस प्रदेश के दूरदराज के दुर्गम क्षेत्रों से बाहर नहीं निकल पायी हैं।

 

शारदा स्वर संगम ने इस दिशा में जागरूकता लाने का एक बीडा उठाया है। ‘आवाज सुनो पहाड़ों की’ कार्यक्रम जहां पलायित व्यक्ति को पहाड़ों की सुध लेने के लिए प्रेरित करता है, वहीं इस देवभूमि की धार्मिक व सांस्कृतिक विरासत के साथ-साथ नदी-नालों, तीज-त्योहारों की याद ताजा कराता है। साथ ही उत्तराखण्ड में निवास कर रहे व्यक्तियों को वहीं रहकर जीविकोपार्जन की प्रेरणा देता है।

 

डीडी इण्डिया चैनल पर प्रसारित हो रहे ‘आवाज सुनो पहाडों की’ के इस गीत एवं नृत्य कार्यक्रम में उत्तराखण्ड मे एवं उत्तराखण्ड से बाहर देश विदेशो के करोड़ो लोगों के लिए एक ऐसा संदेश देने की कोशिश की गई है, जिससे हर वर्ग का व्यक्ति प्रभावित हुए बगैर नहीं रहेगा। डीडी इंडिया से हुए समझौते के अनुसार अभी इसके 26 एपीसोड प्रसारित होंगे।

 

पहला ऑडिशन दिल्ली के मधुबन चौक स्थित टैक््िरया ऑडिटोरियम में किया गया, जिसमें विभिन्न वर्ग की प्रतिभाओं ने हिस्सा लिया। अगले ऑडिशन उत्तराखण्ड के विभिन्न पर्वतीय जिलो सहित देश के विभिन्न नगर-महानगरों में करने की योजना है। डीडी इण्डिया एक ऐसा चैनल है जो कि समस्त भारत एवं विदेशों में देखा-सुना जाता है।

 

उम्मीद की जानी चाहिए कि इससे उत्तराखण्ड की धार्मिक एवं लोकसंस्कृति व लोकपरंपराओं का प्रचार-प्रसार समस्त भारतवर्ष एवं विदेशो मे तो होगा ही, यहां की प्रतिभाओं को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। शारदा स्वर संगम का प्रयास जहां उत्तराखण्ड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक धरोहर के प्रति लोगों को जागरूक करना है, वहीं यहां के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों से ऐसी प्रतिभाओं को ढूढकर गीत व नृत्य प्रतियोगिता के माध्यम से उन्हें एक प्लेटफार्म देकर उनकी प्रतिभा जनता के सामने लाना है जो उन्हें आत्मनिर्भर बनाने मदद करेगा। इस कार्यक्रम में चयनित पिछडे, गरीब व बीपीएल श्रेणी के बच्चों को विशेष प्राथमिकता दी गर्ई है।

 

शारदा स्वर संगम मंच विगत कई वर्षों से उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति और लोक परम्पराओं पर आधारित अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक ऑडियो कार्यक्रमों का आयोजन करता आ रहा है।

 

इसके अलावा यहां की संस्कृति पर केन्द्रित कई वीडियो फिल्म, एल्बम व ऑडियो कैसेट्स भी बना चुके हैं, जिन्हें यहां की जनता द्वारा खूब सराहा गया है। लेकिन किसी राष्टीय चैनल पर प्रदर्शित किया जाना वाला यह हमारा प्रथम प्रयास है।

 

इस शो के लिए उत्तराखण्ड के दुर्गम पर्वतीय क्षेत्र से लेकर नगर-महानगरों में रह रही प्रतिभाओं को खोजकर एक मंच पर लाकर उनकी प्रतिभा को निखारने का प्रयास किया गया है। इस श्रृंखला में टॉप 10 बच्चों के लिए क्रमबद्घ आकर्षक ईनाम भी रखे गये हैं।

 

शारदा स्वर संगम का एक प्रतिनिधि मंडल जिसमे के0सी0पाण्डे, नरेन्द्र रौथाण, वीरेन्द्र नेगी राही, रमेश सुन्दरियाल, डी0एन थपलियाल, एवं अन्य, माननीय मुख्यमंत्री ने उत्तराखण्ड से 27 अक्टूबर को अनके आवास देहरादून पर मिले। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम की सफलता की शुभ कामनाए देते हुए सरकार की तरफ से सहयोग का आश्वासन दिया है।

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