udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news आबकारी विभाग बेलगाम, प्रदेश में खुलेआम हो रही है ओवररेटिंग !

आबकारी विभाग बेलगाम, प्रदेश में खुलेआम हो रही है ओवररेटिंग !

Spread the love
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
देहरादून । उत्तराखंड के दूसरे सबसे शक्तिशाली मंत्री प्रकाश पंत को संभवतः उनके दस विभागों में से आबकारी विभाग ही बेलगाम होता दिख रहा है। मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के बाद सबसे अधिक विभागों की डोर प्रकाश पंत के ही पास हैं। कबीना मंत्री प्रकाश पंत के पास वित्त और संसदीय कार्य जैसे महत्वपूर्ण विभाग भी हैं लेकिन आबकारी विभाग में वह व्यक्तिगत प्रयास के बाद भी ओवर रेटिंग नहीं रोक पा रहे हैं।
हर दूसरे दिन शराब की ओवररेटिंग को लेकर शिकायतें आती हैं, जिनके समाधान में मंत्री पंत जुटे रहते हैं। पिछले दिनों उन्होंने ओवर रेटिंग रोकने के लिए अभियान भी चलाया था, मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात रहा। आबकारी विभाग के अफसरों की कार्रवाई ओवर रेटिंग पर भारी पड़ रही है। महानगर में खुलेआम ओवर रेटिंग हो रही है, मगर उसे रोकने के कोई प्रयास नहीं हो रहे हैं।
यूं तो पूरे जिले में ही शराब की ओवर रेटिंग हो रही है। खुद आबकारी मंत्री प्रकाश पंत ने रुद्रपुर में अपने पीए को भेज कर शराब मंगाई तो ओवर रेटिंग मिली, लेकिन ओवर रेटिंग पर प्रभावी नियंत्रण करने में आबकारी विभाग के अधिकारी विफल साबित हो रहे हैं। आज भी जिला मुख्यालय पर शराब की दुकानों पर ओवर रेटिंग खुलेआम हो रही है। अनुज्ञापी विक्रम सिंह आनन्द के नाम पर चल रही रुद्रपुर की शराब की दुकान नंबर एक पर नजर डालें तो यहां रात्रि नौ बजे के बाद से सेल्समैनों द्वारा बनाया गया ओवर रेटिंग का कानून लागू हो जाता है।
सेल्समैन धड़ल्ले से ओवर रेटिंग करते हैं और  प्रशासन मूकदर्शक बना रहता है। ऐसा नहीं है कि आबकारी विभाग इन सब गतिविधियों से अनभिज्ञ है, मगर वह जानबूझ कर आंखें मूंदे रहता है। ऐसा लगता है कि फंडा सांठगांठ का है। लाखों रुपये की ओवर रेटिंग की बंदरबांट में सब शामिल रहते हैं। यदि कोई जागरूक व्यक्ति ओवर रेटिंग का विरोध करे तो शराब ठेकेदार के गुर्गे उसके साथ अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। वह शराब खरीदने वाले पर ही गलत आरोप लगाकर उनके साथ हाथापाई पर आमादा रहते हैं।
आबकारी विभाग के इंस्पेक्टर से लेकर आबकारी अधिकारी तक का रटा रटाया बयान रहता है कि शिकायत मिलती है तो वह कार्रवाई करते हैं। साथ ही अपनी कार्रवाई की गाथा सुनाने लगते हैं। आखिर शराब की दुकानों पर हो रही ओवर रेटिंग की मानीटरिंग आबकारी विभाग के अधिकारी क्यों नहीं करते। आबकारी विभाग ने चरणबद्ध कार्रवाई का क्रम बनाया है, लेकिन आज तक किसी का लाइसेंस निलंबित नहीं हुआ, जबकि ओवर रेटिंग रोज होती है। आखिर ऐसी कार्रवाई का क्या फायदा? जिससे ओवर रेटिंग न रुक सके।
शराब की दुकान खुलने का वक्त सुबह 11 बजे से रात्रि 11 बजे तक तय है, लेकिन रात्रि साढ़े दस बजे के बाद से बैकडोर से शराब की कालाबाजारी की जाती है। रात्रि 11 बजे के बाद शराब की दुकान का शटर बंद किया जाता है, लेकिन शराब के सेल्समैन वहीं आस पास मंडराते हैं। वह जरूरतमंदों को महंगे दामों पर शराब बेचते हैं। यह सेल्समैन पहले ही शराब के क्वार्टर, हाफ व बोतलें निकाल कर इधर उधर छिपा लेते हैं, जिसकी बिक्री दुकान बंद होने के समय के बाद की जाती है। यदि कभी भी रात को विभागीय अधिकारी किसी को ग्राहक बना कर भेजे तो शराब की अवैध बिक्री का खुलासा हो सकता है।
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में आबकारी नीति के तहत 2310 करोड़ आय का लक्ष्य  निर्धारित किया गया था। साथ ही यह भी तय किया गया था कि शराब पर दो फीसदी सरचार्ज अतिरिक्त लगाया जाएगा। जो कि सामाजिक सुरक्षा और सड़क सुरक्षा पर खर्च होगा। यह नीति जून की पहली तारीख से लागू कर दी गई थी। बैठक में शराब की दुकानों पर होने वाली ओवर रेटिंग की शिकायत, कंप्यूटर बिलिंग की व्यवस्था न होना आदि पर भी गौर किया गया था और प्रावधान था कि यदि कोई नियमों के विरुद्ध जाता पाया गया तो उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वैसे तो सरकार अपनी और से पूरी कोशिश में है कि शराब की ओवर रेटिंग रुक सके पर इसमें आबकारी विभाग ही पलीता लगा रहा है।
Loading...

  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •  
  •