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70 साल बाद पहुंची बिजली की रोशनी, मिला मत का अधिकार !

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गोरखपुर जिले के 5 गांव हुए राजस्व ग्राम घोषित, मिलेगी बुनियादी सरकारी सुविधाएं

उदय दिनमान डेस्कः 70 साल बाद पहुंची बिजली की रोशनी, मिला मत का अधिकार ! आपको यह खबर पढकर अजीब लग रहा होगा कि देश को आजाद हुए इतने साल हो गए और ऐसी खबर। लेकिन यह सत्य है आज भी देश के कई हिस्से ऐसे हैं जहां मूलभूत सुविधातोंओं का अभाव है ही साथ ही कई क्षेत्र आज भी खुद को देश से अलग मानते हैं।

 

आपको बता दें कि अपनी जाति-जमीन से जुदा होकर वनटांगिया कहलाने वाले लोगों को शोषण और प्रताड़ना से राहत 1947 में देश के आजादी के बाद भी नहीं मिली। वन विभाग की जमीन से उजड़ने की पीड़ा लिए सभी सरकारी सुविधाओं से वंचित इस समाज को असल आजादी मिली।इसके बाद यहां के लोगों ने दीपावली, होली के साथ सभी त्यौहार एक साथ मनाएं। लेकिन प्रश्न यह है कि आखिर आजादी के 70 साल तक यहां हमारी प्रशासनिक व्यवस्था क्यों सुस्त रहीं।

 

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखपुर जिले के पांच वन ग्राम जंगल तिनकोनिया नम्बर 3, रजही खाले टोला, रामगढ़ सरकार आजाद नगर, आमबाग एवं चिलबिला को राजस्व ग्राम का प्रमाण पत्र सौंपा। इसके पूर्व तिनकोनिया नम्बर 3 में आजादी के 70 साल बाद बिजली का बल्ब जला था।

 

अंग्रेजों ने 1918-20 में महराजगंज और गोरखपुर के आसपास नेपाल की तराई में जंगल लगाने के लिए पेड़ लगाने लिए विभिन्न क्षेत्रों से लोगों को जबरन लगाया। रजही आजाद नगर के रामनयन निषाद कहते है कि हमारी जातियां खत्म हो गई और पहचान वनटांगिया मजदूर बन गया।’

 

फिलहाल इनके द्वारा लगाए गए जंगल के पेड़ तो आसमान की ओर बढ़ते गए इनकी पीड़ा खत्म नहीं हुई। अपने ही मुल्क में इन्हें मताधिकार भी नहीं मिला। लोकतांत्रिक देश में जहां वोट से ही सरकार चुनी जाती है, इनकी चिंता किसी को नहीं थी।

 

इस संघर्ष में कुछ ने शहादत भी दी। फिलहाल महराजगंज जिले में भी 18 वन ग्राम है जिन्हें राजस्व ग्राम बनाने की अधिसूचना प्रकाशित की जा चुकी है। जल्द ही एक औपचारिक कार्यक्रम कर मुख्यमंत्री उन्हें भी राजस्व ग्राम घोषित कर देंगे।

 

2009 में ये गांव गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र के संसदीय क्षेत्र में आए तो स्थानीय सांसद योगी आदित्यनाथ ने इनका संज्ञान लिया। इनके साथ हर संघर्ष में कंधे से कंधा मिला खड़े नजर आए। उन्हीं के प्रयासों से 2015 में आसपास के राजस्व गांव से जोड़ इन वनग्राम में रहने वाले ग्रामीणों को पहली बार मताधिकार मिला।

 

ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत एवं जिला पंचायत का इन्होंने चुनाव भी लड़ा। जंगल तिनकोनिया तीन के रामनरेश गौड़ कहते हैं कि अब उनका गांव राजस्व गांव बन चुका है। अब उनका मतदाता पहचानपत्र गांव के पते से बनेगा, अपना ग्राम प्रधान भी स्वयं चुन सकेंगे।

 

राशनकार्ड, बिजली, सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, चिकित्सा, घर के लिए पक्का निर्माण, खेल के मैदान, स्कूल समेत अन्य सामुदायिक सुविधाएं अब मिल सकेगी। इसके साथ ही मतदान का अधिकार, सामाजिक सुरक्षा पेंशन समेत सरकारी की सभी सुविधाएं हासिल कर सकेंगे।

 

गोरखपुर डीएम आवास से तकरीबन 9 किलोमीटर दूर तिकोनिया जंगल में बिजली पहुंचने में 70 बरस लग गए। बुधवार की रात जब गांव में बिजली निगम के अधिकारी ने एक घर में पहला एलईडी बल्ब जलाया तो गांव वालों की खुशी का ठिकाना नहीं था। मुख्यमंत्री के आगमन के मद्देनजर एक सप्ताह में अधिकारियों ने रात रात भर जाग कर बिजली की लाइन बिछाई और ट्रांसफार्मर लगाया।

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