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65 लाख टैक्स चोर सरकार के निशाने पर, यूं कसेगा शिकंजा

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नई दिल्ली । ज्यादा से ज्यादा लोगों को टैक्स देने के लिए प्रेरित करने की केंद्र सरकार की मुहिम रंग लाने लगी है। वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान सरकार को डायरेक्ट टैक्सेज के रूप में 1. 5 लाख करोड़ रुपये अतिरिक्त टैक्स मिले हैं। साथ ही टैक्स फाइल करने वाले नए लोगों की संख्या में भी रेकॉर्ड इजाफा हुआ है। सरकार अभी इस टैक्सपेयर बेस को और बढ़ाने की कोशिश कर रही है और 65 लाख लोग रेडार पर हैं जिस पर संदेह है कि उनलोगों ने पिछले साल रिटर्न नहीं फाइल किया है। सरकार को उम्मीद है कि टैक्सपेयर बेस बढक़र 9.3 करोड़ से ज्यादा होगा।

 

नोटबंदी और अन्य कदमों का असर
सरकार का मानना है कि 2016 में नोटबंदी के नतीजे में टैक्स फाइल करने वालों की संख्या बढ़ी है। नोटबंदी के अलावा लक्षित लोगों को टेक्स्ट मेसेज और ईमेल्स के जरिए रिमाइंडर भेजने से भी टैक्सपेयर बेस को बढ़ाने में मदद मिली है। अधिकारियों का कहना है कि करीब 1.75 करोड़ संभावित करदाताओं को टेक्स्ट मेसेज और ईमेल्स के माध्यम से रिमाइंडर भेजे गए थे जिनमें से 1.07 करोड़ ने स्वेच्छा से अब तक रिटर्न फाइल किया है। इन उपायों का सहारा लेकर यह संख्या और बढऩे की उम्मीद है।

 

एनएमएस की मदद से कसेगा शिकंजा
कुछ संभावित करदाताओं को नॉन-फाइलर्स मैनेजमेंट सिस्टम (एनएमएस) के माध्यम से टारगेट किया जाएगा। एनएमएस के इस्तेमाल से टैक्स डिपार्टमेंट को टैक्सपेयर बेस बढ़ाने में पिछले कुछ सालों में सफलता मिली है। खासतौर पर इसकी मदद से उनलोगों को टारगेट किया जाएगा जिनलोगों ने पुराने 500 या 1,000 रुपये के 10 लाख रुपये या ज्यादा मूल्य के पैसे जमा किए हैं लेकिन अपना रिटर्न फाइल नहीं किया है। इस कैटिगरी के 3 लाख से ज्यादा लोग हैं जिनमें से 2.1 लाख ने अपना रिटर्न फाइल किया है और सेल्फ असेसमेंट टैक्स के रूप में करीब 6,5000 करोड़ रुपये का भुगतान किया है।

 

एनएमएस क्या है
एनएमएस के तहत उनलोगों का पता लगाने के लिए कई डेटा सोर्सेज का सहारा लिया जाता है जिनकी आमदनी टैक्स योग्य है लेकिन टैक्स नहीं देते हैं। इसमें खासतौर पर उनलोगों पर नजर रखी जाती है जो लोग हाई वैल्यू ट्रांजैक्शन करते हैं लेकिन रिटर्न फाइल नहीं करते हैं या फिर अपनी पूरी आमदनी का खुलासा नहीं करते हैं। अकसर इस वर्ग के लोगों के खर्च का पैटर्न उनके टैक्स रिटर्न में बताई गई आमदनी से मेल नहीं खाता है।

 

टैक्सपेयर बेस का क्या मतलब है
टैक्सपेयर बेस में वे लोग तो शामिल होते ही हैं जो सीधे रिटर्न फाइल करते हैं। इसके अलावा टैक्स डिडक्टेड एट सोर्स (टीडीएस), टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स (टीसीएस), अडवांस टैक्स पेमेंट्स, सेल्फ असेसमेंट टैक्स और पिछले तीन वित्त वर्षों के दौरान डिविडेंट डिस्ट्रिब्यूशन टैक्स देने वाले लोग भी शामिल हैं।

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