udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news 30 सेकंड के फर्क ने मिटा दिया था डायनसोर युग का वजूद,डॉक्यूमेंट्री में खुलासा

30 सेकंड के फर्क ने मिटा दिया था डायनसोर युग का वजूद,डॉक्यूमेंट्री में खुलासा

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नई दिल्ली। डायनासोर युग के अंत के लिए कहा जाता है कि एक बहुत बड़ा ऐस्टरॉइड धरती से टकराया था जिससे पैदा हुए विस्फोट ने इन विशालकाय जानवरों का वजूद खत्म कर दिया।

 

लेकिन इस विस्फोट की टाइमिंग को लेकर बीबीसी की एक डॉक्युमेंट्री में बहुत दिलचस्प तथ्य सामने आया है। द डे डायनासोर डाइड नाम की इस डॉक्युमेंट्री में बताया गया है कि जिस ऐस्टरॉइड ने डायनासोरों का अंत किया, अगर वह धरती से 30 सेकंड जल्दी (पहले) या 30 सेकंड देर (बाद) से टकराता तो उसका असर जमीनी भूभाग पर इतना कम होता कि डायनासोर खत्म नहीं होते। ऐसा इसलिए क्योंकि 30 सेकंड की देरी या जल्दी गिरने की स्थिति में वह जमीन की बजाय समुद्र में गिरता।

 
यह ऐस्टरॉइड 6.6 करोड़ साल पहले मेक्सिको के युकटॉन प्रायद्वीप से टकराया था जिससे वहां 111 मील चौड़ा और 20 मील गहरा गड्ढा बन गया था। वैज्ञानिकों ने इस गड्ढे की जांच की तो वहां की चट्टान में सल्फर कम्पाउन्ड पाया गया। ऐस्टरॉइट की टक्कर से यह चट्टान वाष्प में बदल गई थी जिसने हवा में धूल का बादल बना दिया था।

 

इसके परिणामस्वरूप पूरी धरती नाटकीय रूप से ठंडी हो गई और पूरे एक दशक तक इसी स्थिति में रही। उन हालात में अधिकतर जीवों की मौत हो गई। उनमें डायनसोरों की मौत विस्फोटक के चलते पैदा हुई सुनामी के कारण खाने की चीजों के अंत होने या आसामान से गिरीं पिघली चट्टानों की वजह से नहीं हुई थी।

 
अनुमान के मुताबिक, नौ मील के आकार और 40 हजार मील प्रति घंटे की रफ्तार वाला वह विनाशक ऐस्टरॉइड कुछ सेकंड जल्दी या देर से गिरा होता तो वह जमीन की बजाय अटलांटिक या प्रशांत महासागर के गहरे पानी में गिरता। यदि ऐसा होता तो शायद समुद्र का पानी भाप बन कर उड़ गया होता, लेकिन इसके फलस्वरूप डायनासोरों को कम नुकसान पहुंचता।

 

यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सस में जियोफिजिक्स के प्रफेसर सीन गुलिक ने प्रफेसर जोआना मॉरगन के साथ उस जगह की ड्रिलिंग का काम आयोजित किया था जहां वह ऐस्टरॉइड टकराया था। वह कहते हैं, वह ऐस्टरॉइड बहुत दुर्भाग्यपूर्ण जगह पर गिरा।

 

प्रफेसर ने बताया, (टक्कर से) सौ बिलियन टन (907 खरब से भी ज्यादा) सल्फेट वातावरण में फैल गया। उन्होंने बताया, यह धरती को एक दशक तक ठंडा करने और उस वक्त के जीवन को काफी हद तक खत्म करने के लिए काफी था।

 
ऐस्टरॉइड की टक्कर इतनी जबर्दस्त थी कि इससे धरती पर जीवन को तीन बार खत्म किया जा सकता था, इसमें अधिकतर डायनासोर भी शामिल होते। लेकिन बाद में इस घटना से छोटे स्तनपायी पैदा हुए है और आखिरकार इंसान वजूद में आए।

 

अब वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर उस ऐस्टरॉइड के टकराने में कुछ सेकंड की जल्दी या देरी होती तो वह समुद्र में गिरता तो इतनी बड़ी तबाही नहीं होती और डायनासोर जिंदा रह पाते।

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