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देश के 25 बच्चों को वीरता पुरस्कार , प्रधानमंत्री ने जांबाज कारनामों के लिए दिये पुरस्कार

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नई दिल्ली। अपनी बहादुरी से दूसरों के लिए उदाहरण बने 25 बच्चों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय बाल वीरता पुरस्कार प्रदान किये, इनमें 12 लड़कियां और 13 लड़के शामिल हैं। यह बच्चे गणतंत्र दिवस परेड में भी शामिल होंगे।
देश में अपनी जान पर खेलकर किसी की जिंदगी बचाने वाले बच्चों को हर साल पुरस्कार दिये जाते हैं।यह पुरस्कार हर साल छह से अठारह साल के बच्चों को दिया जाता है। इन बच्चों के साहसिक कारनामे किसी को भी दांतों तले उंगलियां दबाने पर मजबूर कर सकते हैं। इस साल इन 25 बच्चों में चार बच्चों को बहादुरी अवार्ड मरणोपरांत दिया जा रहा है। इन बच्चों ने अपने साहस, संयम, सूझ-बूझ और हिम्मत के बल पर दूसरों की जिंदगियां बचाई हैं। बहादुर बच्चों को राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से सम्मानित करने की शुरुआत 1957 में हुई थी।
शिवानी और तेजस्विता ने पकड़वाया सेक्स रैकेट
पश्चिम बंगाल की रहने वाली शिवानी गोंद (16) और तेजस्विता प्रधान (17) ने बताया कि हमें स्कूल में ह्यूमन ट्रैफिकिंग के बारे में बताया गया था और इसके खिलाफ हमने क्लब बना रखा है। ट्रैफिकर्स को पकडऩे के लिए हमने फेसबुक पर एक लड़की के नाम से फेक आईडी बनाई।
नेपाल से भागकर आई एक लड़की फेसबुक के जरिए बहला-फुसलाकर दूसरी लड़कियों को उनके घरों से भगाकर ले जाती थी। हमने उससे चौटिंग शुरू की। शिवानी ने बताया कि हमने उसे बताया कि हम भी घर से भाग कर जॉब करना चाहते है। इसके बाद वो हमारे जाल में फंस गई और हमने इसकी सूचना पुलिस को दे दी। सब बातें हमारे घरवालों को पता थीं। उनके सपोर्ट की वजह से ही हम इतने बड़े रैकेट का पर्दाफाश करने में सफल हो पाए।
ऐसा न होता को अंशिका का होता अपहरण
लखनऊ की रहने वाली अंशिका पांडेय (14) 14 सितंबर 2015 को साइकिल से स्कूल जा रही थी। रास्ते में पहले से ही एसयूवी खड़ी थी। ड्राइवर ने मुझसे एक पता पूछा तो मैंने उसे रास्ता बता दिया। इसके बाद उसने कहा कि पीछे बैठे साहब को बता दो। मैं पीछे वाले व्यक्ति को जब पता बताने लगी, तो उसने मुझे बाल पकड़ कर अंदर खींचना शुरू कर दिया। मगर, मैंने अपने पैर गाड़ी के दरवाजे में फंसा लिए क्योंकि अगर दरवाजा बंद हो जाता, तो मेरे बचने का चांस कम हो जाता। पीछे बैठे दूसरे बदमाश ने एसिड डालने की कोशिश भी की, लेकिन बोतल नहीं खुली तो उसने चाकू से हमला किया। मगर, मैंने चाकू को हाथ से पकड़ लिया। इस बीच पीछे से मेरी एक सहेली भी आ गई और बदमाश मुझे छोड़ कर भाग गए। अंशिका मानती हैं कि हर लड़की को सेल्फ डिफेंस आना चाहिए ताकि उसे अपनी रक्षा के लिए किसी की जरूरत न पड़े।
सुमित ने तेंदुए से भिडकर भाई की जान बचाई
उत्तराखंड के लाल दून के सुमित ममगाईं को अदम्य साहस के लिए गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रीय वीरता पुरस्कार से नवाजा जाएगा। दून के इस वीर बालक ने पिछले साल अपने चचेरे भाई को तेंदुए के जबड़े से छुड़ाकर वीरता का परिचय दिया था। देहरादून जिले के रायपुर विकासखंड के ग्राम फुलेथ निवासी सुरेश दत्त ममगाईं का 16 वर्षीय पुत्र सुमित वर्तमान में इंटर कॉलेज भगद्वारीखाल में 11वीं का छात्र है। आठ नवंबर 2015 को जब सुमित ममगाईं अपने चचेरे भाई रितेश के साथ गांव के पास पशुओं के लिए घास लेने जा रहा था। इसी दौरान अचानक आ धमके तेंदुए ने रितेश को झपटा मारकर गिरा दिया। इस पर सुमित ने हिम्मत दिखाई और तेंदुए की पूंछ खींचकर उस पर पाटल से वार किया। साथ ही गुलदार पर पत्थर फेंके और अपने भाई को मौत के चंगुल से बचाया।
सात साल के बच्चें को डूबने से बचाया
नमन ने 12 फीट गहरे पानी में कूदकर 2 जुलाई 2015 को सात साल के बच्चे की जान बचाई थी। 16 साल का नमन हरियाणा के सोनीपत में अपने एक रिश्तेदार के यहां गया था। नमन ने बताया कि उस दिन काफी गर्मी थी। वह अपने भाई के साथ नहर में नहाने जा रहा था। तभी 7 साल के बच्चे को पानी में डूबते हुए देखा। उसके मुंह में पानी भर गया था। मुझे बचपन से ही तैरना आता है। मैं तुरंत करीब 12 फीट गहरे पानी में कूद गया। मैंने बच्चे को पकड़ा और किसी तरह से किनारे पर लाया और उसके अंदर से पानी निकाला। भगवान का शुक्र था कि वह बच गया।
सोनू ने कोबरा सांप का सामना किया
राजस्थान के करौली में केलादेवी गावं के एक निजी स्कूल में 11 साल का सोनू माली कक्षा तीन में पढ़ता है। सोनू के स्कूल सरस्वती आदर्श उच्च माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक क्लास में एक जहरीले कोबरा सांप के घुस आने पर भगदड़ मच गई।
अध्यापक सहित कक्षा एक के सभी मासूम कक्षा को छोड़ भाग खड़े हुए। मगर, एक मासूम बच्चा धर्मेंद्र माली डर के मारे कक्षा से बाहर नहीं आ सका। सोनू ने अपनी जान की परवाह किए बिना धर्मेंद्र की जान बचाई।
इन बच्चों को मिलेगा पुरस्कार
-पश्चिम बंगाल की शिवानी गोद (16) और तेजस्विता प्रधान (17) ने इंटरनेशनल सेक्स रैकेट का पर्दाफाश किया। इन्हें गीता चोपड़ा अवॉर्ड से सम्मानित किया जाएगा।
-उत्तराखंड के सुमित ममगई (15) ने अपने चचेरे भाई पर हमला कर रहे तेंदुए पर पूंछ पकड़कर दरांती से वार किया। इससे तेंदुआ भाग गया। इस बहादुरी के लिए उन्हें संजय चोपड़ा अवॉर्ड दिया जाएगा।
-छत्तीसगढ़ के तुषार (15) को बापू गेढानी अवॉर्ड दिया जाएगा।
-छत्तीसगढ की नीलम (8), राजस्थान के सोनू माली (9) और ओडिशा के मोहन सेठी (11), कर्नाटक की सिया वामनसा खोड़े (10), नगालैंड के थंगिलमंग लंकिम (10), हिमाचल प्रदेश के प्रफुल्ल शर्मा (11), असम के टंकेस्वर पीगू (16), मणिपुर के मोइरंगथम सदानंदा सिंह (14), केरल के आदित्यन एमपी पिल्लई (14), उत्तर प्रदेश की अंशिका पांडेय (14), केरल की बिनिल मंजली (15), अखिल के शिबु (16), महाराष्ट्र की निशा दिलीप पाटिल (16) और केरल की बदरूनिसा केपी (15)

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