16 साल बाद शहीद के परिजनों को नहीं मिली भूमि

देहरादून। शहीद स्मारक के नाम आवंटित भूमि व्यक्ति विशेष संस्था विशेष के नाम दर्ज होना व 16 साल बाद भी ग्राम सभा द्वारा शहीद स्मारक को दी गई भूमि पर शहीद की मूर्ति न लगाना और शहीद स्मारक की भूमि एक सरकारी अधिकारी के नाम दर्ज होना, शहीद का अपमान है।

 

परेड ग्राउंड स्थित उत्तरांचल प्रेस क्लब में कारगिल शहीद स्वगीय कैलाश भट्ट के पिता राम किशोर भट्ट ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि मेरा बेटा आंतकवादियों से लोहा लेते हुए, देश की रक्षा करते हुए सन 1998 में कारगिल युद्ध में शहीद हुआ।

 

ग्राम सभा डांडी द्वारा वर्ष 2002 में एक प्रस्ताव पास कर शहीद स्मारक हेतु, ग्राम सभा में खसरा संख्या 1206 ग 0.0770 है आवंटित की गयी। लेकिन, दु:ख के साथ कहना पड़ रहा है कि उक्त भूमि पर 16 साल बीत जाने के बाद भी शहीद की मूर्ति नहीं लगायी गयी।

 

भट्ट ने कहा कि पूरी न्याय पंचायत में कारगिल युद्ध में स्व. कैलाश ही शहीद हुए, जिनकी शहादद पर मुझे गर्व है। परंतु, इस बात का दु:ख है कि कई बार शिकायतें करने के बाद भी शहीद परिवार की कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है

 

इस अवसर पर शहीद स्व. कैलाश के भाई राधेश्याम भट्ट ने कहा की जब इस भूमि के संबंध में पता किया गया, तो ज्ञात हुआ कि यह श्री शिरडी साई बाबा मनोकामना सेवाश्रम, एन. के. शर्मा के नाम दर्ज है। बड़ा दु:ख हुआ, यह अपने आप मे गंभीर ही नहीं शहीदों का अपमान भी है।

 

आखिर कैसे, शहीद स्मारक की भूमि समाज कल्याण अफसर के नाम दर्ज हो गयी। इस मामले की जांच की जानी चाहिए। राधे श्याम भट्ट ने कहा कि सरकारी आदेश है कि सरकारी संपत्ति पर निजी स्मारक नहीं बनाया जा सकता है एवं उसका स्वरूप भी परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। फिर सवाल यह है कि ग्राम से सभा से आवंटित भूमि निजी हाथों में कैसे पहुंची।

 

उनका कहना है कि शहीद स्मारक को ग्राम सभा से आवंटित भूमि पर गांव के शहीद सैनिक स्व. कैलाश की मूर्ति लगाने एवं निजी हाथों में गई इस भूमि को मुक्त कर, शहीद स्मारक को आवंटित भूमि को अपने नाम दर्ज करने और करवाने वालो के खिलाफ वैधानिक कार्यवाही कर शहीद स्व. कैलाश को सम्मान देंगे। पत्रकार वार्ता के दौरान पूर्व सैनिक प्यार सिंह पुंडीर, राजेन्द्र पंवार , विजय भंडारी आदि मौजूद रहे।