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लोकभाषा कु साहित्य पढण चांदा त

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aswani

क्या आप वास्तव मा लोकभाषा कु साहित्य पढण चांदा त संपर्क करा—-
लोकभाषा कु साहित्य भौत रचये जाणू च छप्ये जाणू च, पढदरा बि पढण चाणा छिन लोकसाहित्य, पर सचि अर कडि बात य चि, कि लोग खरीदण नी चाणा छिन अपडि लोकभाषा कु साहित्य। हाँ अगर पढणौ तै हाथ तक साहित्य पौछाये जो त बड़ा इतमिनान से पढणा छिन लोग।
आज गढभाषा मा वाकई भौत कुछ बकि-बात कु लिखेंणू च। कुछ बजार तक ए भि जांदू त जन्यो तन पड्यू रोंदू। जबकि लोग मंचीय प्रोग्रामों मा खूब ताली पीटणा छिन अपडा लोकभाषा कु दमखम देखी मुल-मुल हैंसणा छिन।
गर्व मैसूस कना छिन अपडि लोकभाषा की सक्या पर।

ईं बात तै भौत गैरे से सोचि तोलि अर मन मा एक विश्वास रखी कि न जरूर कुछ कना पोडुलू त कै बड़ा बड़ा गुरुजी तुल्य लोकभाषा लिख्वारू कि किताब मिलिन त सोचि चला अब पढदरौ तळक पौछाये जौन यि किताब साहित्य।
“कलश” दगडि जुडण से लोकभाषा का परति यनु पिरेम उठी कि अच्छी खासी मिनी लाइब्रेरी भी बणी जो घर मा, पर किताब कू धूल चाटण से बढिया पढदरो तक पौछौण जरूरी च।
आप भी अगर लोकभाषा कु साहित्य पढण चांदा त निःशुल्क मिलिलि आपतै पढण का खातिर
आप मेरा नंबर पर संपर्क करि सकदन।
बाकि पढण का बाद किताब ज्यो कि त्यो लोटौंण होलि यनि द्वी चार नार्मल शर्त होलि पर मकसद लोकभाषा कु साहित्य पढदरो का हाथ।
कुछ उपलब्ध लोकभाषा साहित्य पेंद देखा। कुछेक नौ छुटिगिन, अभि बस मेरि या छोटि सि शुरुआत च।

यौका अलावा भि होर लोकभाषा साहित्य उपलब्ध च-
द्वी आखर- श्रीमती उमा भट्ट जी।
कमेडा आखर- श्रीमती बीना बेंजवाल जी।
नंदा राजजात- श्री रमाकांत बेंजवाल जी।
पत्रिका – दस्तक, उदय दिनमान, धाद, कुमगढ।
अश्विनी गौड़ दानकोट लोकभाषा आंदोलन रूद्रप्रयाग ।
मो-9411592189

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