udaydinmaan, News Jagran, Danik Uttarakhand, Khabar Aaj Tak,Hindi News, Online hindi news कब से मरने का इंतजार कर रहा हूँ लेकिन मौत है कि कम्‍बखत आती ही नहीं है।

कब से मरने का इंतजार कर रहा हूँ लेकिन मौत है कि कम्‍बखत आती ही नहीं है।

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मौत मेरे घर का रास्ता भूल गई
मौत मेरे घर का रास्ता भूल गई

आज के इस प्रदूषित वातावरण में लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। भारत में औसत आयु 60-70 वर्ष के बीच है, भारत के प्रदूषण की बात की जाये तो यहाँ बहुत ज्यादा है। आज के समय में जैसे ही लोग 60-65 वर्ष पूरा कर लेते हैं अपने जीवन का बस सोचते हैं कि उनका आख़िरी वक़्त आ गया है। अगर आज कोई 100 साल की उम्र का व्यक्ति मिल जाये तो वह बहुत बड़ी बात होती है।

ऐसे ही प्रदूषित शहर में एक ऐसा शख्स है जो इन सब भ्रांतियों को तोड़ता हुआ दिख रहा है। जी हाँ हम आपको बता रहे हैं एक ऐसे शख्स के बारे में जो 60, 90 या 150 साल का नहीं बल्कि वह अपने जीवन के 181 साल (world’s oldest man) पुरे कर चुका है। अभी भी वह सही सलामत है, और अपने सभी काम सही तरह से कर सकने में सक्षम भी है।

महाष्टा मुरासी नाम के ये व्यक्ति जीते- जीते थक चुका है और मरने की कामना करता है। वह कहता है कि लगता मौत मेरे घर का रास्ता भूल गई है। मैं कब से मरने का इंतजार कर रहा हूँ लेकिन मौत है कि कम्‍बखत आती ही नहीं है।

महाष्टा की उम्र को देखकर लोग यही कहते हैं कि इनको देवी का वरदान मिला हुआ है तभी तो यह इतना जी रहे हैं। महाष्टा मुरासी से जब उनके बारे में पूछा गया तो बताते हैं कि वो जनवरी 1835 को बेंगलुरु में पैदा हुए ( 181 years old man)। सन् 1903 में महाष्टा मुरासी बेंगलुरु से अपना ठिकाना बदलकर बनारस रहने के लिए आ गए और उसी समय से वह बनारस में रह रहे हैं। मुरासी ने 1957 तक एक मोची के रूप में काम किया। जब उन्होंने अपना काम छोड़ा तब उनकी उम्र 122 साल हो चुकी थी।

महाष्टा मुरासी अनेक बार अधिकारियों के समक्ष अपने जन्म प्रमाण पत्र और पहचान पत्र भी प्रस्तुत कर चुके हैं। कई बार महाष्टा मुरासी का मेडिकल चेक-अप भी किया जा चुका है, जिससे उनकी असली उम्र के बारे में पता चल सके। सब तरह की जाँच करने के बाद भी डॉक्टर उनकी वास्तविक उम्र का सही आकलन करने में असफल रहे हैं। डॉक्‍टर जब कुछ नहीं पता लगा पाए तो इसे ईश्वर का करिश्मा कह दिया।

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